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योगा करें और पायें निरोग आंखें

आखों के योग अपनाकर आजीवन अपनी दृष्टि को मजबूत बना सकते हैं। निश्चित अंतराल के बाद आखों की रोशनी अपने-आप कम हो जाती है। आखों के आसपास की मांसपेशियां अपने लचीलेपन को समाप्त कर देती हैं और कठोर हो जाती हैं। लेकिन अगर आखों के आस-पास की मासपेशिया मजबूत हों तो आखों की रोशनी बढ़ती है। आखों और दिमाग के बीच एक गहरा संबंध होता है। दिमाग की 40 प्रतिशत क्षमता आखों की रोशनी पर निर्भर होती है। जब हम अपनी आखों को बंद करते हैं तो दिमाग को अपने-आप आराम मिलता है। दुनिया की कुल आबादी की 35 प्रतिशत जनसंख्या निकट दृष्टि दोष और दूरदृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया) से ग्रस्त है जिसकी वजह से लोग मोटे-मोटे चश्मों का प्रयोग करते हैं। लेकिन चश्मे का प्रयोग करके आखों की रोशनी को बढाया नहीं जा सकता है। योगा करके आखों की रोशनी को कायम रखा जा सकता है।

काम के दौरान कुछ बातों का ख्याल रखें:

  • गर्दन को सीधा रखकर आखों की पुतलियों को पहले 4-6 बार ऊपर नीचे और फिर दाएं-बाएं घुमाएं। उसके पश्चात 4-6 बार दाएं-बाएं गोलाई में क्लॉकवाइज और एंटी-क्लॉकवाइज घुमाइए।
  • आखों को घुमाते वक्त हथेलियों के मध्य भाग से आखों को कुछ देर तक ढंककर रखें, इससे आखों की मासपेशिया मजबूत बनी रहेंगी।
  • कंप्यूटर पर काम करते वक्त हर 10 मिनट बाद कम से कम 20 फुट दूर जरूर देखें, इससे दूर दृष्टि बनी रहेगी।

आखों के लिए कुछ योगा

सर्वागासन:

-इस क्त्रिया को करने के लिए सबसे पहले शवासन में लेट जाइए, दोनों हाथों को जाघों की बगल में तथा हथेलियों को जमीन पर रखें। पैरों को घुटनों से मोडकर ऊपर उठाइए तथा पीठ को कंधों तक उठाइए। दोनों हाथ कमर के नीचे रखकर शरीर के उठे हुए भाग को सहारा दीजिए इस तरह ठुड्डी को छाती से लगाए रखें। अब सास को रोके नहीं। अब पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए वापस माथे के पास ले आइए। अब हाथों को जमीन पर रखते हुए शरीर और पैरों को धीरे-धीरे शवासन में लाइए। आसन करते समय आखों को खुला रखें। इस आसन को करने से आखों की रोशनी तेजी से बढती है। क्त्रोध और चिड़चिड़ापन भी समाप्त होता है। बच्चों के दिमाग के लिए यह आसन बहुत उपयोगी है।

शवासन:

इस आसन को करने के लिए सहज और शात मन से पीठ के बल लेट जाइए। पैरों को ढीला छोड़कर भुजाओं को शरीर से सटाकर बगल में रख लीजिए। शरीर को पूरी तरह से फर्श पर स्थिर हो जाने दीजिए। इस आसन को करने से शरीर की थकान और दबाव कम हो जाएगी। सास और नाड़ी की गति सामान्य हो जाएगी। आखों को आराम मिलता है और रोशनी बढ़ती है।

प्राणायाम:

प्राणायाम पद्मासन और सिद्धासन की मुद्रा में बैठकर किया जाता है। प्राणायम शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की साधनाओं में किया जा सकता है। प्राणायाम करने से दिमाग स्थिर रहता है और आखों की रोशनी बनी रहती है। प्राणायाम से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।

कई लोग जो कंप्यूटर पर लगातार 8-10 घटे काम करते वक्त आखें गड़ाए रहते हैं उनकी आखों पर नुकसान पहुंचता है। आखों को आराम देने के लिए केवल नींद लेना ही पर्याप्त नहीं होता है। आखों में कमजोरी आने की वजह से स्मृति दोष और चिड़चिड़ापन की समस्या आम हो जाती है जिसके लिए आखों का योगा बहुत जरूरी है।

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