नाड़ी शोधन प्राणायाम के फायदे

आपको बता दें कि नाड़ी शोधन प्राणायाम श्वसन की एक तकनीक (technique) है जिसका अभ्यास करने से स्वास्थ्य को कई फायदे होते हैं। यह प्राणायाम शरीर की अशुद्धियों को दूर करने के साथ ही मन को शांत (calm) रखने में सहायक होता है। आइये जानते हैं कि नाड़ी शोधन प्राणायाम करने के क्या फायदे होते हैं।

बेहतर नींद के लिए नाड़ी शोधन प्राणायाम के फायदे

नाड़ी शोधन प्राणायाम करते समय श्वास पर ध्यान केंद्रित करने से मन शांत रहता है। नासिका द्वार (nostril ) से श्वास लेने और छोड़ने की क्रिया से शरीर अपने आप शांत हो जाता है औऱ शरीर को एक अलग तरह की ऊर्जा मिलती है। इससे व्यक्ति को अच्छी नींद आती है।

यादाश्त बढ़ाने में नाड़ी शोधन प्राणायाम बेनिफिट्स

नाड़ी शोधन का अभ्यास करने से एकाग्रता बढ़ती है और मस्तिष्क तेज होता है। यह एक ऐसा प्राणायाम है जिसका प्रतिदिन अभ्यास करने से सुस्त (dull) मस्तिष्क के दोनों तरफ ऑक्सीजन का बेहतर प्रवाह होता है। यदि आपको प्रेजेंटेशन देने जाना है या किसी मीटिंग, इंटरव्यू, परीक्षा में जाना हो तो उससे पहले नाड़ी शोधन प्राणायाम जरूर करना चाहिए।

क्या गर्भावस्था में गुड़ खाना सुरक्षित है?

गर्भावस्था में थोड़ी मात्रा में गुड़ खा सकते हैं, अधिक गुड़ खाने से समस्या हो सकती है। गुड़ में कैल्शियम और आयरन होता है जो गर्भवती के लिए जरूरी तत्व हैं लेकिन गुड़ की तासीर गर्म होती हैं। गुड़ के अधिक सेवन से प्रेगनेंसी में लूज मोशन
की समस्या हो सकती है। साथ ही गुड़ का नियमित सेवन गर्भावस्था डायबिटीज़ यानि गेस्टेशनल डायबिटिज़ का खतरा पैदा कर सकता है। गुड़ खाने से शरीर में खारिश और फुंसियाँ निकलने का भी डर रहता है इसलिए थोड़ा बहुत खा सकते हैं, अधिक नहीं।

स्ट्रांग कोर के लिए करें वॉल प्रेस एक्सरसाइज

वॉल प्रेस एक्सरसाइज स्ट्रांग कोर के लिए बहुत ही फायदेमंद है। यह वॉशबोर्ड एब्स और एक मजबूत कोर के लिए बहुत प्रभावी है। वॉल प्रेस एक्सरसाइज मुख्य रूप से पेट का सेक्शन और कमर का एरिया आदि की समस्या को ठीक करने आपकी मदद करता हैं।

लो ब्लड प्रेशर के लिए प्राणायाम

निम्न रक्तचाप के लिए योग भस्त्रिका प्राणायाम – Bhastrika Pranayama Yoga for low blood pressure in Hindi
कपालभाति प्राणायाम के फायदे लो बीपी में – Kapalbhati Pranayama ke fayde low BP me in Hindi
लो बीपी के लिए योग सूर्यभेदी प्राणायाम – Suryabhedi Pranayama Yoga for low blood pressure in Hindi

निम्न रक्तचाप या हाइपोटेंशन को कम करने में प्राणायाम भी आपकी मदद कर सकते हैं। यदि आप लो ब्लड प्रेशर के रोगी हैं तो आपको निम्न प्राणायाम को करना चाहिए।

बालों को उगाने के लिए योग कपालभाति प्राणायाम

कपालभाति प्राणायाम योग आपके बालों को फिर से उगाने में मदद कर सकता है। कपालभाति प्राणायाम पूरे शरीर में रक्त परिसंचरण की समस्या का मुकाबला करता है और बालों के विकास में मदद करता है। इस योग को करने से आपके पेट की पाचन क्रिया स्वस्थ रहती है जो वजन कम करने और मधुमेह में मदद करती है। इस आसन को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को जमीन पर बिछाकर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखे और ध्यान की मुद्रा में बैठे। साँस अन्दर को ओर ले, अब साँस को बाहर छोड़ते हुए पेट को अन्दर की ओर इस प्रकार खींचे की पेट और पीठ आपस में मिल जाएं। फिर साँस को अन्दर ले ओर पेट को ढीला करें। य

नींद आने का मंत्र भस्त्रिका प्राणायाम

भस्त्रिका प्राणायाम एक बहुत ही अच्छा श्वास अभ्यास हैं यह शरीर को स्वस्थ और दिमाग को खुश रखता हैं। ह्रदय और मस्तिष्क के रोगियों को एक चमत्कारी परिमाण प्राप्त करने लिए इस आसन को करना लाभदायक होता हैं। यदि आपको रात में ठीक से नींद नहीं आती है तो आप भस्त्रिका प्राणायाम का नियमित रूप से अभ्यास करें। इस आसन को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को जमीन पर बिछा के पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। अपनी आँखों को बंद कर लें और अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। कुछ देर ध्यान की मुद्रा में बैठे और तर्जनी को अंगूठे से मिलाएं। अब एक गहरी साँस अन्दर लें और फिर बलपूर्वक उसके बाहर निकालें। फिर से बलपूर्वक अन

दिमाग को रिलैक्स करने के लिए करें अनुलोम विलोम प्राणायाम

दिमाग को चिंता मुक्त करके रिलैक्स करने और मानसिक शांति के लिए आप अनुलोम विलोम प्राणायाम को करें। इस आसन को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को जमीन पर बिछा कर सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन या वज्रासन में बैठ जाएं। अब अपने दाहिने हाथ को ऊपर उठायें और अंगूठे से दाहिने नाक को बंद करके बाएं नाक से लम्बी साँस लें। अब अपने दाहिने हाथ की अनामिका से बाएं नाक को बंद करके दाहिने नाक से साँस को बाहर छोड़े। इस स्थिति में आपका बायां हाथ घुटने पर रहेगा।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।