योगा करें गर्दन की चरबी हटायें

जैसे जैसे उम्र बढती है वैसे वैसे हमारा शरीर विकास की ओर भी आगे कूच करता है और अधोगति भी करता है । यह अधोगति का मतलब कुछ बीमारियाँ, रोग आदि। हमारी उम्र हमारे चेहरे से साफ दिखती है। हम उन सब पर तो संपूर्ण ध्यान रखते हैं। किन्तु हमारे शरीर के कुछ हिस्से ऐसे है जिसे हम नजरअंदाज करते है। हमारी पीठ, हमारी गर्दन आदि। हमारी गर्दन में लम्बे समय के बाद दर्द शुरु हो जाता है। कुछ लोगो को तो छोटी से उम्र में ही यह दर्द होता है।

मकरासन योग करने का तरीका

जमीन पर योगा मैट बिछाकर पेट के बल लेट जाएं।
पैरों को एकदम सीधे फैलाएं और शरीर को सीधा रखें। शरीर में अधिक तनाव (strech) नहीं होना चाहिए और शरीर को हल्का लचीला भी रख सकते हैं।
दोनों पैरों के बीच बराबर दूरी बनाए रखें।
इसके बाद अपने सिर, सीने (chest) और कंधों को हल्का सा जमीन से ऊपर उठाएं।
दोनों हाथों की कोहनी को मोड़ें और कलाइयों को एक दूसरे के ऊपर इस तरह से रखें कि कोहनी मुड़ी हुई अवस्था में ही रहे।
इसके बाद हथेलियों को मोड़ने के बाद अपने सिर को इन्हीं हथेलियों के ऊपर टिकाएं और गहरी सांस लेते हुए आंखें बंद रखें।

Benefits of Bhujangasana: महिलाओं के लिए बेहद फायदेमंद है यह आसन, पीठ दर्द से मिलती है राहत, जानिए दूसरे जबरदस्त फायदे

स्वस्थ रहने के लिए योग जरूरी है. योग के कई आसन हैं. इनमें एक आसन भुजंगासन है. इस योग को करने से पेट पर अधिक बल पड़ता है. इससे पाचन तंत्र बहुत मज़बूत होता है. यह कई बीमारियों में फायदेमंद है. इससे कब्ज, अस्थमा, महिलाओं को होने वाली मासिक धर्म में समस्या को दूर किया जा सकता है. 

भुजंगासन के जबरदस्त फायदे

  1. इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं.
  2. कंधों और बाहों को मजबूती प्रदान होता है.
  3. शरीर में लचीलापन बढ़ता है.
  4. तनाव और थकान को दूर करता है.
  5. भुजंगासन से हृदय स्वस्थ रहता है.
  6. अस्थमा के लक्षणों में आराम मिलता है.
  7. बेडौल कमर को पतली-सुडौल व आकर्षक बनाता है.
  8. इसे रोज़ाना करने से लंबाई बढ़ती है.
  9. पीठ दर्द से आराम मिलता है.

भुजंगासन करने का आसान तरीका

समतल और स्वच्छ जमीन पर दरी बिछाकर पेट के बल लेट जाएं और थोड़ी देर आराम करें.
इसके बाद पुश अप मुद्रा में आकर शरीर के अगले हिस्से को उठाएं.
इस आसान को अपने धड़ को आगे की दिशा में उठाकर रखना होता है.
इस मुद्रा में अपनी शारीरिक क्षमता अनुसार रहें.
फिर पहली अवस्था में आ जाएं. इसे रोजाना दस बार जरूर करें.
 

नाभि खिसकने पर करें ये 5 योगासन

नाभि खिसकना एक आम समस्या है जो अक्सर लोगों को परेशान करती है। नाभि खिसकने के कई कारण होते है जैसे कि कोई भारी वस्तु या वजन को उठाना, तेज गति से दौड़ना, ऊँची जगह से कूदना, अचानक से झुकना और मानसिक तनाव की वजह से भी नाभि खिसक जाती है।

जब किसी व्यक्ति की नाभि खिसक जाती है तो इसकी वजह से पेट में दर्द, दस्त, जी मिचलाना, घबराहट और शरीर में कमजोरी होना आदि की परेशानी का सामना करना पड़ता है। लंबे समय तक नाभि का खिसका रहना कई प्रकार की गंभीर समस्या का कारण बन जाता है जिसमें बीपी, अनिद्रा, कब्ज, तनाव और लिवर सिरोसिस शामिल हैं।

भुजंगासन के दौरान रखें ये सावधानियां

  • हर्निया से पीड़ित व्यक्ति इस आसन को ना करें.
  • पेट दर्द होने पर यह आसन ना करें.
  • गर्भवती महिलाएं इस आसन को बिल्कुल ना करें.
  • हाथ, पीठ और गर्दन में दर्द या चोट है तो इसे न करें.
  • आसन करते समय अपने सर को पीछे की ओर ज्यादा ना झुकाएं वरना मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है.

नाभि खिसकने पर नौकासन योग

नौकासन या नावासन योग खिसकी हुई नाभि को सही जगह पर लाने में मदद करता है। यदि आप नियमित रूप से नौकासन योग करते है तो यह नाभि के अलावा भी और कई प्रकार से लाभदायक होता है, इस योग की मदद से पाचन क्रिया में सुधार होता है और पेट का मोटापा कम किया जा सकता हैं। आप नावासन योग करके पेट, कूल्हे और रीढ़ की मांसपेशियों को भी मजबूत कर सकते हैं। आइये इस योग को करने के तरीके को विस्तार से जानते हैं।

उत्तानपादासन योग करने का तरीका

इस योग को करने के लिए सबसे पहले आप योगा मैट बिछाकर उस पर सीधे लेट जाइये।
दोनों पैर को पास पास रखें, पैरों के बीच अधिक दूरी नहीं होनी चाहियें।
दोनों हाथों को सीधा फर्श से चिपका के रखें जिसमें आपकी हथेली नीचे के तरफ जमीन से जुड़ी रहें।
धीरे धीरे साँस लें औरे अपने दोनों पैरों को ऊपर उठायें, आपको अपने पैर 45 डिग्री के कोण तक उठाना हैं।
उत्तानपादासन में कुछ लोग अपने पैरों को 60 डिग्री या 90 डिग्री तक उठा सकते हैं।
पैरों को 45 डिग्री उठाने के बाद इस स्थिति में पैरों को 15 से 20 सेकंड के लिए रोक के रखें।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।