गर्भावस्था में क्या खाना चाहिए
गर्भावस्था में खान पान का ध्यान देना बहुत आवश्यक होता है। स्वास्थ आहार महत्वपूर्ण होता है ताकि पेट में पल रहे शिशु को पोषक तत्व मिल सके। फोलिक एसिड , आयरन एवं विटामिन वाले चीजें खाना अच्छा होता है ऐसी अवस्था में।
क्या खाना चाहिए ~
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गर्मी में मोटा होने के उपाय में दही खाना चाहिए
दही का सेवन गर्मियों में करना बहुत ही लाभदायक होता है, यह ठंडा होता जो आपकी बॉडी ठंडा रखने में मदद करता है। फुल फेट दही एक और स्वस्थ स्नेक है जो कि अपने पोषण तत्व के लिए जाना जाता है क्योंकि इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स एंड फैट्स का एक संतुलित मिश्रण होता है। दही का उपयोग करके आप कई सारी हेल्दी वेट गेन रेसिपी बना सकते है।
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जल्दी वजन बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए?
कुछ लोगों के लिए वजन बढ़ाना या मसल्स बनाना उतना ही मुश्किल हो सकता है जितना कि मोटे लोगों के लिए वजन कम करना होता है।
हालांकि आप अपने आहार में कुछ खाद्य पदार्थों को शामिल करके आसानी से कुछ ही समय में वजन को बढ़ा सकते हैं और यह अधिक प्रभावी हो सकते हैं।
वजन बढ़ाने या मांसपेशियों का विकास करने के स्वस्थ तरीके में यहाँ दी गई खाद्य पदार्थों की सूची आपकी मदद कर सकती है। आइये जानते है कि जल्दी वजन बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए।
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सर्वाइकल की समस्या के लिए योग करने के दौरान किन-किन बातों का रखें ख्याल?
किसी भी योग का सही लाभ मिले इसके लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें। जैसे:
योग शब्द संस्कृत धातु युज से निकला है
योग शब्द संस्कृत धातु 'युज' से निकला है, जिसका मतलब है व्यक्तिगत चेतना या आत्मा का सार्वभौमिक चेतना या रूह से मिलन। योग, भारतीय ज्ञान की पांच हजार वर्ष पुरानी शैली है । हालांकि कई लोग योग को केवल शारीरिक व्यायाम ही मानते हैं, जहाँ लोग शरीर को मोडते, मरोड़ते, खिंचते हैं और श्वास लेने के जटिल तरीके अपनाते हैं। यह वास्तव में केवल मनुष्य के मन और आत्मा की अनंत क्षमता का खुलासा करने वाले इस गहन विज्ञान के सबसे सतही पहलू हैं। योग विज्ञान में जीवन शैली का पूर्ण सार आत्मसात किया गया है|
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योग की परिभाषा
योग संतुलित तरीके से एक व्यक्ति में निहित शक्ति में सुधार या उसका विकास करने का शास्त्र है। यह पूर्ण आत्मानुभूति पाने के लिए इच्छुक मनुष्यों के लिए साधन उपलब्ध कराता है। संस्कृत शब्द योग का शाब्दिक अर्थ 'योक' है। अतः योग को भगवान की सार्वभौमिक भावना के साथ व्यक्तिगत आत्मा को एकजुट करने के एक साधन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। महर्षि पतंजलि के अनुसार, योग मन के संशोधनों का दमन है।
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तंदुरुस्ती के बारे में कुछ मायने और जॉंच
फिटनेस या तंदुरुस्ती यह अब जीवन का एक नया मंत्र है। इसके बारे में अपने परिवार और मित्रों में जागृती करे। लेकिन पहले आप स्वयं फिट रहने की जरुरत है। तंदुरुस्ती से अनेक बीमारियाँ टलती है और जीवनका सही आनंद भी इसी से मिलता है। बचपन से इसका चस्का लगना चाहिए। आप स्वयं सोचे की आप फिट या तंदुरुस्त है या नहीं। उम्र और कामकाज के अनुरुप फिटनेस के मायने बदलते है। हर एक खेल के लिए फिटनेस की अलग जरूरतें होती है। फिटनेस के लिए हमको अलग अलग व्यायाम जरुरी है। आमतौर पर ऐसे व्यायाम के लिए शरीर में सिंपथॅटीक तंत्रिका तंत्र कृतीशील होती है। इसके चलते एक मस्ती का अनुभव होता है।
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योगअभ्यास के लिए सामान्य दिशानिर्देश
योगाभ्यास करते समय योग के अभ्यासी को नीचे दिए गए दिशा निर्देशों एवं सिद्धांतों का पालन अवश्य करना चाहिए :
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योग से अवसाद का निदान
बढ़ती अवसाद की बीमारी
विश्व स्वास्थ्य संगठन के विश्व मानसिक स्वास्थ्य सर्वे 2011 पर आधारित एक अध्ययन के अनुसार विश्व स्तर पर भारत में अवसाद की दर सबसे ज्यादा है। अधिक चिंताजनक स्थिति यह है कि सभी आयु के लोग, किशोर से लेकर प्रौढ़ तक, अवसाद से ग्रस्त हो रहे हैं। यह सभी आर्थिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को प्रभावित कर रहा है। चाहे एक अभावग्रस्त व्यक्ति जो एक शाम के भोजन के लिए जद्दोजहद कर रहा है या एक अमीर व्यक्ति जो विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत कर रहा है। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि अवसाद ग्रस्त व्यक्ति भावनात्मक रूप से कमजोर मानसिक स्थिति में अपना जीवन ही समाप्
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योग करें,हृदय-रोग से मुक्त रहें
आज की लाइफ स्टाइल में अपनी सेहत का खयाल रखने के लिए भी हम पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते। व्यस्त दिनचर्या का असर धीरे-धीरे हमारे दिल पर भी पड़ने लगता है जिससे बाद में बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है। अगर योग का थोड़ा सहयोग लें तो हम अपने दिल का खयाल रख सकते हैं।
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“योग विज्ञान है” – ओशो
योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है।
जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।
नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।