આકર્ણ ધનુરાસન

આકર્ણ ધનુરાસનને આર્ચર્સ પોઝ પણ કહે છે, ધનુષ્ય-બાણ પોઝ કહે છે. આ એવું આસન છે જે એક ધનુર્ધારી બાણ છોડવાની તૈયારીમાં છે તે મુદ્રા દર્શાવે છે. કર્ણ એટલે કાન. ‘આ’ એ પ્રીફિક્સ છે જેનો અર્થ છે એની નજીક.

અર્ધહલાસન અને કર્ણપીડાસન

રીત:

  • શવાસનમાં સૂઈ જાવ.
  • સર્વાંગાસન કરો અને તેમાં પગ તમારા માથા પાછળ લેતાં હલાસન કરો.
  • હલાસનમાં શ્વાસ નોર્મલ અને નેચરલ રીતે લો. થોડાક શ્વાસ લેવા સુધી હલાસનમાં રહો અને એક વાર કમ્ફર્ટેબલ લાગે, એટલે એક પગ ઢીંચણમાંથી વાળીને કાનને સ્પર્શ કરાવો.

અધોમુખ વૃક્ષાસન

અધોમુખ એટલે નીચું મોઢું હોવું. વૃક્ષ એટલે ઝાડ. આખી ય મુદ્રા આખાય હાથના સંતુલનના આધારે છે.

  • શરૂઆતમાં દીવાલનો સહારો લેવો અને તે પછી આસનની પ્રેક્ટિસ કરવી.
  • જો કોઈ સહારા વિના પ્રેક્ટિસ કરતા હોવ તો આજુબાજુની સલામતી ચકાસી લેવી જેથી કદાચ પડો તો પણ વાગે નહીં.

રીત:

सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार योगासन एवं प्राणायाम दोनों का ही संख्यात्मक अभ्यास है |

अभ्यासक्रम में यह शिथिलीकरण व्यायाम एवं योगासन के मध्य में आता है | तथा योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए हमारे शरीर को तैयार करता है |

पढ़ाई का सही वक्त

पढ़ाई के लिए रूटीन जब भी बनाए तो सुबह का समय को ज़्यादा महत्व दे. सुबह का वक्त सबसे अच्छा है पढ़ने के लिए। इस समय माइंड पूरा फ्रेश रहता हैं और ग्रॅसपिंग पावर ज़्यादा होती हैं। दिन का 5 घंटा और सुबह का 1 घंटा बराबर हैं।

ध्यान

 ध्यान महर्षि महर्षि पतंजलि अष्टांग योग साधना पद्धति का सप्तम मंगल योग दर्शन का उद्देश्य आत्म साक्षात करना यह समाधि की प्राप्ति करना है ध्यान समाधि से पूर्व की अवस्था है जब ध्यान अमृत रूप से प्रभावित होता रहता है तो यह समाधि का सादर करा देता है अष्टांग योग के दो भाग बजरंग कथा अंतरंग योग है बहिरंग योग में यम यम नियम आसन प्राणायाम प्रत्याहार आते हैं जबकि अंतरंग योग साधना में धारणा ध्यान तथा समाधि आते हैं दाना में अपने इस चंचल मन को किसी एक स्थान पर केंद्रित किया जाता है जब किसी स्थान विशेष पर हमारा मन नियंत्रण केंद्रित रहने लगता है तब वह धारणा ध्यान में परिवर्तित होने लगती है महर्षि पतंज

यौगिक क्रियाएं

योगिक क्रिया शरीर की आंतरिक शुद्धि की विशेष तकनीक है जिसका वर्णन हठयोग के ग्रंथों में पाया जाता है योगी को योगी ने अपने अनुभव और अभ्यास द्वारा इंहें भी विकसित किया है जिस प्रकार हम सामान्य मनुष्य अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दांतो की सफाई वालों की सफाई स्नान धुले वस्त्र पहनना आदि दैनिक नित्य कर्म करते हैं उसी प्रकार एक योगी योग साधना में लीन होने से पूर्व शरीर की आंतरिक शुद्धि के लिए श्रेष्ठ कर्मों का सहारा लेता है एवं का योग साधना में योग का अभ्यास करता है उन्हें कहते हैं कपालभाति योग द्वारा शरीर में तत्वों को बाहर निकालने का प्रयास किया जाता है अनावश्यक मानवाधिकार शरीर में जमा हो गया त

पैदल चलने के बहोत सारे फायदे है।

ब्रेन स्ट्रोक – आपको जानकर आश्चर्य होगा की अगर एक सप्ताह में सिर्फ 2 घंटे भी पैदल चला जाये तो इससे ब्रेन स्ट्रोक का खतरा 30% तक कम हो जाता है।

दिल – क्या आपको पता है प्रतिदिन 30 से 60 मिनट तक पैदल चलने से दिल का दौरा पड़ने का खतरा काफी हद तक टल जाता है।

मधुमेह – अगर प्रतिदिन 30 से 40 मिनट भी पैदल चला जाये तो इससे मधुमेह का खतरा करीब 29% तक घट जाता है।

डिप्रेशन – आज के समय में डिप्रेशन एक आम बीमारी बनकर उभर रहा है लेकिन अगर प्रतिदिन 30 से 45 की वॉक की जाये तो डिप्रेशन का खतरा करीब 36% तक कम हो जाता है।

जिम जाने के क्या फायदे एवं नुकसान हैं?

मैं आजकल अपने एक दोस्त को ट्रेन कर रहा हूँ, मैं जिम जाने का कोई खास शौक़ीन नहीं हूँ पर उनको ट्रेन करने जाता हूँ और खुद बिना मशीन के अपने आप को ट्रेन करता हूँ.

मैं काफ़ी सालों बाद जिम गया पर मुझे कोई खास बदलाव नहीं नज़र आया, सब कुछ आज भी वैसे ही चल रहा है - वो ही आधी अधूरी जानकारी और गलत ढंग से कराई और की जा रही कसरत.

अगर आपको यह पोस्ट पूरा नहीं पढ़ना है, तो नीचे जाकर इसका सार पढ़ लीजिये.

मैं जब मेरे दोस्त को कार्डिओ ट्रेनिंग के लिए ट्रेडमिल पर चलाता और दौड़ाता हूँ, तब मैं वहां आये हुए लोगों को भी ध्यान से देखता हूँ.

बनाएं पतली कमर, घटाएं तोंद

आजकल मैदे और बेसन से बनी चीजें खाने का प्रचनल बढ़ गया है साथ ही कोक से भी पेट का कबाड़ा होते जा रहा है। इसके अलावा और भी कई कारण है जिससे पेट अब तोंद या कहे टैंक बन गया है।

फ्लैट स्टमक की इच्छा रखने वालों के लिए यहां कुछ योग टिप्स दिए जा रहे हैं। शरीर की अतिरिक्त चरबी घटाने में योग काफी मदद करता है, लेकिन इसके साथ आपको खानपान भी सुधारना होगा।

योगासन 
वैसे रोजाना आप नौकासन, उष्ट्रासन और त्रिकोणासन करके आप फ्लैट स्टमक बना सकते हैं। योगाभ्यास और सही डायट का कॉम्बिनेशन आपके पेट को तोंद से टोन कर सकता है।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।