पीठ दर्द को जड़ से खतम करे मार्जारी आसन

मार्जारी आसन एक बहुत ही सरल आसन है जो कि खासतौर पर रीढ़ को लचीला बनाने के लिये किया जाता है। रीढ़ हमारे शरीर का स्‍तंभ होता है, अगर यह ठीक नहीं रहेगा तो आप ठीक से काम नहीं कर पाएंगे। मार्जारी आसन करने में बहुत ही आसान है। अगर आपको पीठ दर्द रहता है तो आप के लिये यह मार्जारी आसन बहुत लाभकारी होगा। पीठ दर्द की वजह से शरीर के अन्‍य भाग जैसे, कंधों में दर्द, मांसपेशियों में लोच की कमी, वजन का घटना, गर्दन में दर्द, कमजोरी और कभी-कभी सिरदर्द की भी शिकायत हो सकती है। मार्जारी आसन महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभदायक है। गर्भावस्था के दौरान पहले तीन महीने तक मार्जारी आसन का अभ्यास किया जा सकता है। यह

नाभि का टलना दूर करता है सुप्तवज्रासन

सुप्त का अर्थ होता है सोया हुआ अर्थात वज्रासन की स्थिति में सोया हुआ। इस आसन में पीठ के बल लेटना पड़ता है, इसिलिए इस आसन को सुप्त-वज्रासन कहते है, जबकि वज्रासन बैठकर किया जाता है

विधिः 

हरिकासन पेट की समस्या के लिए रामबाण

असंतुलित खाना और असंयमित दिनचर्या पेट से जुड़ी हर समस्या की मुख्य वजह है। कब्ज, गैस व एसीडिटी पेट से जुड़ी कुछ ऐसी प्राब्लम्स हैं जो हर उम्र के लोगों में देखी जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए योग सबसे अच्छा और आसान तरीका है। हरिकासन के लिए थोड़ा समय निकाले आपको यह आसन हमेशा के लिए इस समस्या से निजात दिला सकता है। पेट साफ  रखने के लिए हरिकासन काफी फायदेमंद है। इस आसन को पद्मासन की ही तरह खाने के बाद भी किया जा सकता है। हरिकासन प्रार्थना व ध्यान के लिए भी लाभकारी है। इस आसन में काफी समय तक बैठा जा सकता है। इसलिए अधिकांश ऋषि-मुनि, योगी आदि इस आसन की मुद्रा में ही बैठते थे।

ब्रेस्ट साइज बढ़ाना चाहती हैं, तो आज से शुरू कर दें गोमुखासन

योग ब्रेस्ट साइज बढ़ाने के लिए काफी सही उपचार है। इससे किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता है। ऐसे में गोमुखासन करने से आपको फर्क जरूर दिखेगा।

जॉगिंग शुरू करने की धीमी शुरुआत करें

जॉगिंग को धीमी-धीमी गति से करना शुरू करें। यह कहा जाता है कि रनिंग करने से पहले कम से कम 5 मिनिट के लिए पैदल चलें। फिर 2 मिनिट के लिए जॉगिंग करें, थोड़ा से रुके और फिर अपनी जॉगिंग को करना प्रारंभ कर दें। यह आपके शरीर को दौड़ने के लिए तैयार करता है और आप अच्छे से जॉगिंग कर पाते हैं।

जॉगिंग शुरू करने की तैयारी

रनिंग के लिए बहुत कम उपकरणों की आवश्यकता होती है, लेकिन इसके लिए अच्छे रनिंग शूज आवश्यक है। जॉगिंग के दौरान आपके जोड़ों और मांसपेशियों पर आपके शरीर के दबाव का तीन से पांच गुना अधिक होता है, जो आपके निचले शरीर पर काफी तनाव बढ़ाता है। गलत जूतों के साथ दौड़ना (यानी किसी भी प्रकार का जूता जो दौड़ने के लिए नहीं बनाया गया है) चोट लगने और जोड़ों में दर्द का कारण बन सकता है। इसलिए जॉगिंग के लिए सही शूज का चयन करें।

ज़रूरत से अधिक जॉगिंग ना करें

किसी भी कार्य को एक निश्चित मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि कोई भी कार्य जो हमारे लिए लाभदायक होता है उसे अत्यधिक करने से वह हमारे लिए हानिकारक हो सकता है। उसी प्रकार जॉगिंग को जरूरत से ज्यादा ना करें क्योंकि वह हमारे स्वस्थ के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

जॉगिंग की शुरुआत कैसे करे सही तरीका

यदि आप एक बिगिनर है और जॉगिंग करने की शुरुआत कर रहें है तो आपके एक अच्छे रनर बनने के लिए आठ सप्ताह के लिए 30 मिनिट की जॉगिंग रूटीन अपनानी है।

चेहरे की चमक, तेज, नूर कैसे बढ़ाएं?

अगर आपको चेहरे पर चमक, तेज, नूर लाना है तो एक ड्रिंक की सलाह दूंगी जिसे पीने से लाभ मिल जायेगा….

Drink For Glowing skin: स्किन को गोरा करने वाला ड्रिंक कैसे बनाये; इस आर्टिकल में हम आपको इनफार्मेशन देने वाले है; की आप कैसे अपने स्किन के उप्पर से टैनिंग को दूर कर सकते है; और अपने स्किन के उप्पर से Melanin के Production को काफी हद तक कम कर सकते है; सिर्फ एक ड्रिंक बनाना है और हर रोज आपको पि लेना है, ऐसा हर रोज करना है; आपके स्किन के उप्पर से सिर्फ तीन महीने में टैनिंग को दूर देंगे;

स्किन पर कालापन क्यों होता है

उष्ट्रासन करने से जुड़ी सावधानी

जिन लोगों को गर्दन में तनाव या चोट की परेशानी है, वे लोग यह योगासन ना करें.
लो ब्लड प्रेशर के रोगी भी इस आसन से बचें.
अगर आपके घुटनों में दर्द रहता है, तो यह आसन करते हुए सावधानी बरतें और घुटनों के नीचे तकिया भी लगा सकते हैं.
अगर शुरुआत में आपके हाथ तलवों तक नहीं पहुंच पा रहे, तो उन्हें कूल्हों पर भी रख सकते हैं.
 

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।