बकासन करने के लाभ से पाचन क्रिया बेहतर होती है

यह आसन करने से व्यक्ति के पेट में अम्ल कम मात्रा में बनता है जिसके कारण सीने में जलन या खट्टी डकार नहीं आती है और पाचन क्रिया बेहतर होती है। जिन लोगों को अपच की समस्या है उनके लिए बकासन काफी फायदेमंद हो सकता है।

नियमित रूप से बकासन करने से तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है

बकासन करने से व्यक्ति का तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है जिसके कारण उसकी इम्यूनिटी बढ़ती है और उसे भूख न लगने, कब्ज और पेट से संबंधित परेशानियां नहीं होती हैं।

बकासन के फायदे कूल्हे मजबूत होते हैं

विशेषरूप से महिलाएं अपने कूल्हे की चर्बी कम करने के लिए तरह-तरह के उपाय करती हैं। यह आसन करने से कूल्हों पर जमा अतिरिक्त फैट घटता है और कूल्हे मजबूत और आकर्षक होते हैं।

बकासन करने के फायदे रीढ़ की हड्डी को टोन करने में

बकासन करने से पीठ और पेट की मांसपेशियां सीधी अवस्था में हो जाती हैं। यह आसान रीढ़ की हड्डी को टोन करने का कार्य करता है जिसके कारण हड्डी से जुड़े रोगों का खतरा कम होता है।

बालासन के फायदे ब्लड सर्कुलेशन ठीक रखने में

प्रतिदिन बालासन का अभ्यास करने से पूरे शरीर में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है। इसके साथ ही यह पेट के अंगों का मसाज करने एवं उन्हें टोन करने के साथ ही पाचन को बढ़ाने में भी मदद करता है।

शरीर को लचीला बनाने में बकासन के फायदे

बकासन करने से शरीर की मांसपेशियां लचीली होती है जिससे व्यक्ति का शरीर आकर्षक दिखायी देता है। यह आसन करने से कलाई और भुजाएं भी मजबूत होती हैं जिससे व्यक्ति को हाथों में आसानी से चोट नहीं लगती है।

बकासन करने के फायदे

चूंकि इस आसन को करने में पूरे शरीर एक साथ शामिल होता है इसलिए शरीर के सभी अंगों को इसका लाभ पहुंचता है। बकासन करने से व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास तो पैदा होता ही है साथ में वह भावनात्मक रूप से भी मजबूत होता है। इसके अलावा बकासन करने के अन्य फायदे निम्न हैं।

बकासन के फायदे मानसिक मजबूती के लिए

प्रतिदन निर्धारित समय पर बकासन करने से व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत होता है और वह हर तरह की परेशानियों का सामना आसानी से कर सकता है। यह आसन करने से व्यक्ति में ऐसी क्षमता विकसित होती है कि वह भावनात्मक रूप से कमजोर नहीं पड़ता है।

भुजंगासन करते समय सावधानियां

अगर किसी को अल्सर, हार्निया एवं क्षय रोग हो तो उसे भुजंगासन किसी भी परिस्थिति में नहीं करना चाहिए।
यदि आपको हाइपो थॉयराइड की समस्या है तो डॉक्टर के परामर्श के बाद ही इस आसन को करें।
अगर आपके पेट में कोई चोट लगी हो या फिर आप अस्थमा के मरीज हों तो आपको भुजंगासन से दूर रहना चाहिए।
गर्भवती स्त्री को किसी भी परिस्थिति में भुजंगासन को करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
 

व्याघ्रासन करने का तरीका

  • पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं और दोनों हाथों को जमीन पर टिकाते हुए शरीर को अत्यधिक ऊपर उठा लें।
  • अपने एक पैर का घुटना कूल्हे के नीचे रखें और कलाई को कंधे के नीचे जमीन पर टिकाकर रखें। नजरों को सामने रखें और आराम के मुद्रा में रहें।
  • श्वास लें और अपनी पीठ को कमान(arch) देते हुए धीरे से अपना दायां पैर ऊपर उठायें और और इसे  ऊपर एवं पीछे की ओर खींचे।
  • सीने को फैलाएं और पैरों की उंगलियों को सिर के पीछे तक लाएं।
  • दूसरे पैर का घुटने तक का भाग जमीन पर मुड़ा होना चाहिए और उसके बाद का हिस्सा जमीन पर फैला होना चाहिए।
  • सिर को हल्का ऊपर की ओर मोड़े और

उत्तानपादासन के फायदे

इस आसन को करने से अपच(indigestion), एसिडिटी और कब्ज दूर हो जाता है एवं पेट के अंग मजबूत होते हैं।
यह आसन जांघों (thigh) और कूल्हों (hip) की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। (और पढ़े –नितंब/Butt को कम करने के लिए करें ये एक्सरसाइज)
अर्थराइटिस, कमर दर्द, डायबिटीज और हृदय रोगियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण आसन है। यह आसन शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।