किस रोग में कौन से योग आसन कारगर
मोटापा : वैसे तो मात्र आंजनेय आसन ही लाभयायक सिद्ध होगा लेकिन आप करना चाहे तो ये भी कर सकते हैं- वज्रासन, मण्डूकासन, उत्तानमण्डूसकासन, उत्तानकूर्मासन, उष्ट्रासन, चक्रासन, उत्तानपादासन, सर्वागांसन व धनुरासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, कटिचक्रासन, कोणासन, उर्ध्वाहस्तोहत्तातनासन और पद्मासन।
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स्तन कैंसर में योगाभ्यास का महत्व
योग करना सामान्य मनुष्य के लिए तो स्वास्थ्यवर्धक है, और कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को योग के अभ्यास विधायक उर्जा से भर देते हैं | और स्तन कैंसर की महिलाओं के लिए योग के आसन इलाज के दौरान और इलाज के बाद भी अत्यंत जरूरी होते हैं|
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एसिडिटी से हैं परेशान तो इन योगासनों का करें नियमित अभ्यास
नियमित योग करने वाले कई बीमारियों से बचे रहते हैं. एसिडिटी भी उनमें से एक है. एसीडिटी आधुनिक जीवनशैली की वजह से होने वाली आम समस्या है. खाने-पीने में जरा भी अनियमितता हुई नहीं कि एसिडिटी गले पड़ गई. इससे बचने के लिए लोग कई तरह की औषधियों और दवाइयों का इस्तेमाल करते हैं फिर भी परेशान रहते हैं.
एसीडिटी की समस्याओं से बचने के लिए अपनाएं ये आसान से योगासन-
मत्स्यासन
यह आसन मांसपेशियों के लिए बहुत लाभदायक है. इसके नियमित अभ्यास से एसिडिटी की समस्या से राहत मिलती है.
योग से गैस की दिक्कत को यूं करें गायब
पेट गैस को अधोवायु बोलते हैं। इसे पेट में रोकने से कई बीमारियां हो सकती हैं, जैसे एसिडिटी, कब्ज, पेटदर्द, सिरदर्द, जी मिचलाना, बेचैनी आदि। लंबे समय तक अधोवायु को रोके रखने से बवासीर भी हो सकती है। आयुर्वेद कहता है कि आगे जाकर इससे नपुंसकता और महिलाओं में यौन रोग होने की भी आशंका हो सकती है।
गैस बनने के लक्षण
पेट में दर्द, जलन, पेट से गैस पास होना, डकारें आना, छाती में जलन, अफारा। इसके अलावा, जी मिचलाना, खाना खाने के बाद पेट ज्यादा भारी लगना और खाना हजम न होना, भूख कम लगना, पेट भारी-भारी रहना और पेट साफ न होने जैसा महसूस होना।
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योग का महत्व
यह प्रमाणित तथ्य हैं की योग मुद्रा, ध्यान और योग में श्वसन की विशेष क्रियाओं द्वारा तनाव से राहत मिलती है, योग मन को विभिन्न विषयों से हटाकर स्थिरता प्रदान करता है और कार्य विशेष में मन को स्थिर करने में सहायक होता है.
हम मनुष्य किसी चीज़ की ओर तभी आकर्षित होते हैं जब उनसे हमें लाभ मिलता है. जिस तरह से योग के प्रति हमलोग आकर्षित हो रहे हैं वह इस बात का संकेत हैं कि योग के कई फायदे हैं. योग को न केवल हमारे शरीर को बल्कि मन और आत्मिक बल को सुदृढ़ और संतुष्टि प्रदान करता है. दैनिक जीवन में भी योग के कई फायदे हैं, आइये! इनसे परिचय करें.
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योग के प्रकार
हमारे शरीर में अलग अलग अंगों और विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य लाभों को प्राप्त करने के लिए योग किया जाता है। लेकिन योग के कई प्रकार होते हैं आइए संक्षिप्त में जाने योग के प्रकार जो हमें कई प्रकार के लाभ दिलाते हैं।
विनीसा योग (Vinyasa Yoga)
अष्टांग योग (Ashtanga Yoga)
आयंगर योग (Iyengar Yoga)
बिक्रम योग (Bikram Yoga)
जिवामुक्ति योग (Jivamukti Yoga)
पावर योग (Power Yoga)
शिवानंद योग (Sivananda Yoga)
यिन योग (Yin Yoga)
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योग करने से पहले क्या करे
किसी भी कार्य को करने से पहले उसकी कुछ तैयारियां जरूरी होती है | इसी प्रकार योग करने से पहले कुछ तैयारियां जरूरी होती है और सही समय का चुनाव योग के लिए उचित स्थान स्थान का साफ सुथरा होना संचित हवा का होना और योग के करने की जगह पर किसी भी प्रकार के चुगने वाले चीज नहीं होने चाहिए योग अगर प्रातः काल खुले में किया जाए तो यह सर्वोत्तम होता है अन्यथा आप अपने घर के अंदर भी साफ सुथरी जगह पर नियमित रूप से योग कर सकते हैं|
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ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਐਸਿਡਿਟੀ ਤੋਂ ਪ੍ਰੇਸ਼ਾਨ ਹੋ, ਤਾਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਯੋਗਾਸ਼ਾਂ ਦਾ ਨਿਯਮਿਤ ਅਭਿਆਸ ਕਰੋ
ਜੋ ਨਿਯਮਿਤ ਯੋਗਾ ਕਰਦੇ ਹਨ ਉਹ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਤੋਂ ਬਚ ਜਾਂਦੇ ਹਨ. ਐਸਿਡਿਟੀ ਵੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚੋਂ ਇਕ ਹੈ. ਐਸਿਡਿਟੀ ਆਧੁਨਿਕ ਜੀਵਨ ਸ਼ੈਲੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਆਮ ਸਮੱਸਿਆ ਹੈ. ਖਾਣ-ਪੀਣ ਵਿਚ ਕੋਈ ਮਾਮੂਲੀ ਬੇਨਿਯਮੀ ਨਹੀਂ ਹੋਈ ਕਿ ਐਸਿਡਿਟੀ ਗ੍ਰਹਿਣ ਕੀਤੀ ਗਈ. ਲੋਕ ਇਸ ਤੋਂ ਬਚਣ ਲਈ ਕਈ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀਆਂ ਦਵਾਈਆਂ ਅਤੇ ਦਵਾਈਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਫਿਰ ਵੀ ਉਹ ਪ੍ਰੇਸ਼ਾਨ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ.
ਐਸਿਡਿਟੀ ਦੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਤੋਂ ਬਚਣ ਲਈ, ਇਸ ਯੋਗ ਯੋਗ ਅਭਿਆਸ ਨੂੰ ਅਪਣਾਓ-
ਮਾਤਸਿਆਸਨ
ਇਹ ਆਸਣ ਮਾਸਪੇਸ਼ੀਆਂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹੈ. ਇਸ ਦੇ ਨਿਯਮਤ ਅਭਿਆਸ ਨਾਲ ਐਸਿਡਿਟੀ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਤੋਂ ਛੁਟਕਾਰਾ ਮਿਲਦਾ ਹੈ.
ਇੱਕ ਹਫ਼ਤੇ ਵਿੱਚ ਯੋਗਾ ਦੇ ਕਿੰਨੇ ਦਿਨ ਲਾਭਕਾਰੀ ਹੁੰਦੇ ਹਨ? ਇੱਥੇ ਯੋਗਾ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਪ੍ਰਸ਼ਨਾਂ ਦੇ ਜਵਾਬ ਪੜ੍ਹੋ
ਯੋਗਾ ਸੰਸਕ੍ਰਿਤ ਸ਼ਬਦ ਯੁਜ ਤੋਂ ਲਿਆ ਗਿਆ ਹੈ. ਇਸ ਨੂੰ ਜੋੜਨਾ ਹੈ. ਯੋਗਾ, ਨਿਯਮ, ਆਸਣ, ਪ੍ਰਾਣਾਯਾਮ, ਪ੍ਰਤਿਹਾਰ ਅਤੇ ਧਾਰਣਾ, ਧਿਆਨ ਅਤੇ ਸਮਾਧੀ ਨੂੰ ਜੋੜ ਕੇ ਬਾਹਰੀ ਸੰਸਾਰ ਤੋਂ ਅੰਤਰਮੁਖੀ ਬਣਨ ਦਾ ਯੋਗਾ ਹੈ. ਜੋ ਯੋਗਾ ਕਰਦੇ ਹਨ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਯੋਗੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ. ਪ੍ਰਾਚੀਨ ਮਹਾਰੀਆਂ ਨੇ ਅਨੁਸ਼ਾਸਿਤ ਜੀਵਨ ਅਤੇ ਤੰਦਰੁਸਤ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਧਿਆਨ ਵਿੱਚ ਰੱਖਦੇ ਹੋਏ ਯੋਗਾ ਬਾਰੇ ਦੱਸਿਆ ਸੀ. ਅੱਜ, ਲੋਕ ਬਿਮਾਰੀ ਮੁਕਤ ਬਣਨ ਅਤੇ ਸਿਹਤਮੰਦ ਰਹਿਣ ਲਈ ਵਿਸ਼ਵ ਦੇ ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਨਿਰੰਤਰ ਯੋਗਾਸਨ ਦਾ ਅਭਿਆਸ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ. ਯੋਗ ਇਕ ਵਿਗਿਆਨ ਹੈ. ਇਸ ਨੂੰ ਸਹੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਮਝੇ ਬਿਨਾਂ ਇਸ ਦਾ ਅਭਿਆਸ ਕਰਨਾ ਨੁਕਸਾਨਦੇਹ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ. ਇਸ ਲਈ, ਅਕਸਰ ਮਾਹਰਾਂ ਦੀ ਨਿਗਰਾਨੀ ਹੇਠ ਅਜਿਹਾ ਕਰਨ ਦੀ ਸਲਾਹ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ.
कर्मण्येवाधिकारस्ते मां फलेषु कदाचन’ अर्थात कर्म योग
श्रीमद्भगवद्गीता में योग शब्द का प्रयोग व्यापक रूप में हुआ है | गीता के प्रत्येक अध्याय के नाम के साथ योग शब्द लगाया गया है जैसे ‘अर्जुन विषाद योग, सांख्य योग, कर्म योग, ज्ञान कर्म सन्यास योग आदि। एक विद्वान् के अनुसार गीता में इस शब्द उपयोग एक उद्देश्य़ से किया गया है। उन का कहना है कि जिस काल में गीता कही गयी थी, उस समय कर्म का अर्थ प्रायः यज्ञादि जैसे अनुष्ठानों के सन्दर्भ में किया जाता था। इसलिए गीता में कर्म के साथ योग शब्द जोड़ कर इसे अनुष्ठानों से अलग कर दिया। इस योग में कर्म को ईश्वर प्राप्ति का एक साधन बताया गया है। गीता में कर्म योग को
“योग विज्ञान है” – ओशो
योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है।
जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।
नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।