ਜੇ waterਰਜਾ ਪਾਣੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਇਹ ਯੋਗਾ ਆਸਣ ਕਰੋ
ਯੋਗਾ ਤੁਹਾਡੇ ਸਰੀਰ, ਮਨ ਅਤੇ ਆਤਮਾ ਨੂੰ ਇਕੱਠਾ ਕਰਨ ਲਈ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ. ਇਹ ਇੱਕ ਰੂਹਾਨੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਹੈ. ਇਹ ਸਰੀਰ ਨੂੰ energyਰਜਾ ਦਿੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਰੀਰ ਅਤੇ ਆਤਮਾ ਦਾ ਮਿਲਾਪ. ਯੋਗਾ ਨਾ ਸਿਰਫ ਤਣਾਅ ਨੂੰ ਘਟਾਉਂਦਾ ਹੈ, ਬਲਕਿ ਭਾਰ ਘਟਾਉਣ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ, ਕਈ ਹੋਰ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦੇ ਇਲਾਜ ਲਈ ਵੀ ਇਹ ਅਸਰਦਾਰ ਸਿੱਧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ.
ਬਾਲਸਨ
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ਇਹ 10 ਮਿੰਟ ਦਾ ਆਸਣ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਮਰ ਦਰਦ ਤੋਂ ਰਾਹਤ ਦੇਵੇਗਾ
ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਦਿਨ ਭਰ ਦਫਤਰ ਵਿਚ ਕੰਮ ਕਰਕੇ ਕਮਰ ਦਰਦ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਨਾਲ ਜੂਝ ਰਹੇ ਹੋ, ਤਾਂ ਇਹ 10 ਮਿੰਟ ਦਾ ਯੋਗਾ ਤੁਹਾਡੀ ਸਮੱਸਿਆ ਨੂੰ ਦੂਰ ਕਰੇਗਾ. ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਹਰ ਦਿਨ 10 ਮਿੰਟ ਲਈ ਕੋਨਾਸਨਾ ਦਾ ਅਭਿਆਸ ਕਰਦੇ ਹੋ, ਤਾਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇਸਦੇ ਹੋਰ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਫਾਇਦੇ ਦਿਖਾਈ ਦੇਣਗੇ.
ਇਹ ਆਸਣ ਰੀੜ੍ਹ ਦੀ ਹੱਡੀ ਨੂੰ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਰੀਰ ਨੂੰ ਤਣਾਉਂਦਾ ਹੈ. ਇਸ ਤੋਂ ਇਲਾਵਾ ਇਹ ਪੇਟ, ਹੇਠਲੇ ਸਰੀਰ, ਕਮਰ, ਬਾਹਾਂ ਅਤੇ ਲੱਤਾਂ ਦੀਆਂ ਮਾਸਪੇਸ਼ੀਆਂ ਨੂੰ ਮਜ਼ਬੂਤ ਬਣਾਉਣ ਵਿਚ ਲਾਭਕਾਰੀ ਹੈ. ਜਾਣੋ ਅਗਲੀ ਸਲਾਈਡ ਵਿਚ ਇਸ ਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਕਰਨਾ ਹੈ
ਯਾਮਾ ਯੋਗਾ ਦਾ ਪਹਿਲਾ ਭਾਗ ਹੈ
ਇਹ ਸਾਡੇ ਸਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਸੰਭਾਲ ਰਿਹਾ ਹੈ. ਯਕੀਨਨ ਇਹ ਮਨੁੱਖ ਦਾ ਮੁ natureਲਾ ਸੁਭਾਅ ਵੀ ਹੈ. ਯਮ ਦੁਆਰਾ ਮਨ ਨੂੰ ਮਜਬੂਤ ਅਤੇ ਸ਼ੁੱਧ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ. ਮਾਨਸਿਕ ਤਾਕਤ ਵੱਧਦੀ ਹੈ. ਇਹ ਆਪਣੇ ਵਿਚ ਦ੍ਰਿੜਤਾ ਅਤੇ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਦੇ ਵਿਕਾਸ ਵੱਲ ਅਗਵਾਈ ਕਰਦਾ ਹੈ.
ਇੱਥੇ ਪੰਜ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀਆਂ ਯਮ ਹਨ - (1) ਅਹਿੰਸਾ, (2) ਸੱਤਿਆ, (3) ਅਸਟਯਾ, (4) ਬ੍ਰਹਮਾਚਾਰੀਆ ਅਤੇ (5) ਅਪਰਿਗ੍ਰਹਿ
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વાઈ માટે યોગ
વ્યાખ્યા: મગજમાં અસામાન્ય વિદ્યુત પ્રવૃત્તિ સાથે સંકળાયેલ સંવેદનાત્મક વિક્ષેપ, ચેતનાની ખોટ અથવા આળસના અચાનક અને વારંવાર આવતા એપિસોડ્સ દ્વારા વર્ગીકૃત થયેલ ન્યુરોલોજીકલ ડિસઓર્ડર.
સમસ્યા: ભારતમાં લગભગ 10 કરોડ લોકો વાઈથી પીડાય છે, જે વૈશ્વિક ભારણના છમા ભાગને અસર કરે છે. સક્રિય વાઈ સાથેની ઘણી વ્યક્તિઓની પર્યાપ્ત સારવાર કરવામાં આવતી નથી, પરિણામે સારવારનો મોટો અંતર આવે છે.
જોખમ પરિબળો અને કારણ: મોટાભાગના કેસોમાં વાઈ માટેનું ચોક્કસ કારણ અજ્ isાત છે. કેટલાક કિસ્સાઓમાં મગજની ઇજા, સ્ટ્રોક, મગજની ગાંઠો, મગજનું ચેપ, આનુવંશિક પ્રભાવ અને વિકાસલક્ષી વિકારના પરિણામે થાય છે.
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10 मिनट का ये आसन आपको दिलाएगा कमर दर्द से राहत
दिन भर दफ्तर में बैठकर काम करने से अगर आप कमर दर्द की समस्या से जूझ रहे हैं तो 10 मिनट का ये योग आपकी इस समस्या को दूर कर देगा। अगर आप रोज 10 मिनट कोणासन का अभ्यास करेंगे तो आपको इसके कई और भी फायदे नजर आएंगे।
इस आसन से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और शरीर की स्ट्रेचिंग होती है। इसके अलावा यह पेट, शरीर के निचले हिस्से, कमर, बाजू और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करने में फायदेमंद है। अगली स्लाइड में जानें इसे करने का तरीका
डायबिटीज और तोंद को कंट्रोल करे कुर्मासन योग
कुर्म का अर्थ होता है कछुआ। इस आसन को करते वक्त व्यक्ति की आकृति कछुए के समान बन जाती है इसीलिए इसे कुर्मासन कहते हैं।
कुर्मासन की विधि : सबसे पहले आप वज्रासन में बैठ जाएं। फिर अपनी कोहनियों को नाभि के दोनों ओर लगाकर हथेलियों को मिलाकर ऊपर की ओर सीधा रखें।
इसके बाद श्वास बाहर निकालते हुए सामने झुकिए और ठोड़ी को भूमि पर टिका दें। इस दौरान दृष्टि सामने रखें और हथेलियों को ठोड़ी या गालों से स्पर्श करके रखें। कुछ देर इसी स्थिति में रहने के बाद श्वास लेते हुए वापस आएं।
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योगासन एवं आसन के मुख्य प्रकार
चित्त को स्थिर रखने वाले तथा सुख देने वाले बैठने के प्रकार को आसन कहते हैं। आसन अनेक प्रकार के माने गए हैं। योग में यम और नियम के बाद आसन का तीसरा स्थान है।
आसन का उद्येश्य : आसनों का मुख्य उद्देश्य शरीर के मल का नाश करना है। शरीर से मल या दूषित विकारों के नष्ट हो जाने से शरीर व मन में स्थिरता का अविर्भाव होता है। शांति और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। अत: शरीर के स्वस्थ रहने पर मन और आत्मा में संतोष मिलता है।
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योग से रोग और शोक का निदान
।।ॐ।।योगश्चित्तवृत्तिनिरोध:।।ॐ।।
योग से चित्त वृत्तियों का निरोध किया जा सकता है। चित्त में ही रोग और शोक उत्पन्न होते हैं जो शरीर, मन और मस्तिष्क को क्षतिग्रस्त कर देते हैं। सदा खुश और हंसमुख रहना जीवन की सबसे बड़ी सफलता होती है।
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योगा से हेयर केयर
बालों समस्या अब आम हो चली है। इसका कारण शहर का प्रदूषण, धूल, धुवां और दूषित भोजन-पानी। इस सबके कारण सिर से लेकर पांव तक त्वचा रुखी हो जाती है। रुखी त्वचा से जहां, डैंड्रफ और बालों से संबंधित अन्य रोग होते हैं वहीं यह चर्म रोग का कारण भी बन सकता है।
हालांकि बाल झड़ने का एक और कारण है- तनाव और अन्य मानसिक परेशानियां। आओ हम जानते हैं कि योग इस सबसे छुटकारा दिलाने में हमारी क्या मदद कर सकता है।
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दर्शन में योग का महत्व
भारतीय धर्म और दर्शन में योग का अत्यधिक महत्व है। आध्यात्मिक उन्नति या शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग की आवश्यकता व महत्व को प्राय: सभी दर्शनों एवं भारतीय धार्मिक सम्प्रदायों ने एकमत व मुक्तकंठ से स्वीकार किया है।
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“योग विज्ञान है” – ओशो
योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है।
जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।
नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।