शवासन योग के फायदे स्लिप डिस्क में

शवासन योग आसन के बाद में किया जाता हैं। यह योग आपको आराम दिलाने में मदद करता है। स्लिप डिस्क के दर्द से आराम पाने के लिए शवासन योग करें। इस आसन को करने के लिए आप एक योगा मैट को फर्श पर बिछा के उस पर पीठ के बल लेट जाएं। अपने दोनों पैरों और हाथों को सीधा रखें। अब अपने दोनों पैरों के बीच में 1.5 फिट की दूरी रखें। अपने दोनों हाथों को शरीर से 45 डिग्री पर रखें और हथेलियों को ऊपर की ओर रखें। अब इस मुद्रा में आराम करें, इस आसन में आपको सोना नहीं हैं। शवासन में आप अपनी क्षमता के अनुसार रह सकते है।

स्लिप डिस्क के लिए योग सेतुबंधासन

सेतुबंधासन स्लिप डिस्क के लिए एक शानदार मुद्रा है जो पीठ को मजबूत करता है। यह आसन धीरे-धीरे पीठ के निचले हिस्से और प्रमुख मांसपेशियों को नितंब में फैलाता है। यह लचीलेपन को बढ़ता है और स्लिप डिस्क प्रभावित उन क्षेत्रों में गति को प्रेरित करता है जो ज्यादातर निष्क्रिय और संकुचित होते हैं।

सेतुबंध आसन करने के लिए आप एक योगा मैट को बिछा के उस पर सीधे लेट जाएं, अब अपने पैरों को घुटनों के यहाँ से मोड़ें और अपने हिप्स को ऊपर उठायें, अपने दोनों हाथों को पीठ के नीचे आपस में जोड़ लें। इस स्थिति में रहते हुयें 20 बार साँस लें और स्थिति से बाहर आयें।

स्लिप डिस्क के लिए योग शलभासन

शलभासन योग पीठ के निचले हिस्से को मजबूत करता है और कूल्हे क्षेत्र में स्वस्थ रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देता है। यह स्लिप डिस्क के दर्द को दूर करने में मदद करता है क्योंकि जब परिसंचरण की कमी होती है तो यह उस क्षेत्र में दबाव बनता है। इस आसन को करने के लिए आप एक स्थान पर योगा मैट को बिछा के उस पर पेट के बल लेट जाएं। दोनों हाथों और पैर को सीधा फर्श पर रखें। अब अपने धड़ और दोनों पैरो को ऊपर की ओर उठायें। साथ में दोनों हाथों को भी ऊपर उठायें। आप इस मुद्रा में कम से कम 20 सेकंड तक रहने की कोशिश करें।

स्लिप डिस्क के लिए योगासन में करे उष्ट्रासन

उष्ट्रासन योगासन को करने से आपकी रीढ़ की हड्डी पर खिंचाव पड़ता है जो पीठ दर्द और गर्दन दर्द आदि सभी समस्यों को दूर करने में मदद करता है। स्लिप डिस्क से छुटकारा पाने के लिए आप इस योग को कर सकते है। उष्ट्रासन योग को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को बिछा के उस पर घुटनों के बल खड़े हो जाएं। अब अपनी कमर के यहाँ से पीछे की ओर झुके और अपने दोनों हाथों को पीछे ले जाएं। आपने सिर को पीछे झुका लें और दोनों हाथों को पैर की एड़ियों पर रखें। उष्ट्रासन की स्थिति में आप 30 से 60 सेकंड तक रुकने का प्रयास करें।

हाइड्रोसील के लक्षण

आमतौर पर हाइड्रोसील होने पर किसी प्रकार का दर्द नहीं होता है। इसका एक मात्रा लक्षण अंडकोष की सूजन ही होता है। वयस्‍क पुरुषों में स्‍क्रोटम में भारीपन की संभावना हो सकती है। कुछ मामलों में अंडकोष की सूजन शाम की अपेक्षा सुबह के समय अधिक हो सकती है। हाइड्रोसील के दौरान गंभीर दर्द टेस्टिकुलर टोरसन नामक एक अन्‍य समस्‍या का कारण हो सकता है। टेस्टिकुलर टोरसन तब होता है जब टेस्टिकल्‍स में मोड़ आ जाते हैं जो कि आमतौर पर चोट या दुर्घटना के कारण हो सकता है।

हाइड्रोसील क्‍या है

अंडकोश की थैली (scrotum) की सूजन को हाइड्रोसील कहा जाता है। यह तब होता है जब तरल पदार्थ अंडकोश की थैली में जमा हो जाता है। यह समस्‍या नवजात शिशुओं के लिए आम होती है जो सामान्‍य रूप से 1 वर्ष की आयु के भीतर ही बिना उपचार के खत्‍म हो जाती है। लेकिन यह समस्‍या युवा और वयस्‍क पुरुषों में भी हो सकती है जो कि अंडकोश के भीतर सूजन या चोट के कारण हो सकती है। सामान्‍य रूप से इस समस्‍या में रोगी को किसी प्रकार का दर्द नहीं होता है और न ही उसे किसी उपचार की आवश्‍यकता होती है। लेकिन यदि आप अंडकोश में सूजन हो तो आपको अपने डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए। क्‍योंकि यह किसी संक्रमण का कारण भी हो सकता है। आइए ज

हाइड्रोसील के लिए योग

हाइड्रोसील पुरुषों में होने वाली बीमारी है जो कि 10 प्रतिशत पुरुषों को प्रभावित करती है। अंडकोष में पानी भर जाना, सूजन आना, अण्डकोष में वृद्धि आदि सभी प्रकार की समस्याओं को दूर करने और अण्डकोष को स्वस्थ रखने में योग आपकी मदद कर सकता है। आज हम आपको हाइड्रोसील के लिए योग के लिए योग के बारे में बताएंगे

पुरुषों में एक हाइड्रोसील तब होता है जब तरल पदार्थ अंडकोष (scrotum) की थैली में जमा हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप अंडकोश में सूजन हो सकती है। बड़े लड़के और वयस्क पुरुष में हाइड्रोसील संक्रमण, सूजन, चोट या ट्यूमर के कारण विकसित हो सकता है।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।