चेहरे की चमक बढ़ाने के लिए कौन से योग आसन करने चाहिए?
आज कल आपने देखा ही होगा की सभी अपने चेहरे
उष्ट्रासन करने के 5 आसान स्टेप्स
उष्ट्रासन योग करने के लिए आप निम्नलिखित क्रम को दोहराएं.
सबसे पहले योगा मैट पर घुटने के सहारे बैठ जाएं.
अपने घुटनों की चौड़ाई कंधों के बराबर रखें और तलवें पूरे फैले हुए आसमान की तरफ रखें.
अब अपनी रीढ़ की हड्डी को पीछे की तरफ झुकाते हुए दोनों हाथों को एड़ियों पर टिकाने की कोशिश करें.
ध्यान रखें कि इस समय आपकी गर्दन पर अत्यधिक दबाव ना पड़े और कमर से लेकर घुटनों तक का हिस्सा सीधा रहे.
इसी स्थिति में 5 से 10 बार गहरी सांस लें और फिर धीरे सामान्य स्थिति में आ जाएं.
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ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए करें भुजंगासन योग
भुजंगासन योग आपके फेफड़ों को खोलता है जिसकी वजह से साँस लेने पर ऑक्सीजन अधिक मात्रा में आपके शरीर में जाती है। इस लिए इस योग को करके ऑक्सीजन की कमी को पूरा किया जा सकता है। भुजंगासन योग को करने लिए आप एक योगा मैट को बिछा के उस पर पेट के बल लेट जाएं जिसमे आपकी पीट ऊपर की ओर रहे।
अपने दोनों हाथों को जमीन पर रखें। अब अपने दोनों हाथों पर वजन डालते हुयें धीरे-धीरे अपने सिर को पीछे के ओर करें और ठुड्डी को ऊपर की ओर करने का प्रयास करें। ध्यान रखें की आपके कमर से नीचे का शरीर जमीन से ऊपर ना उठे। आप इस आसन में 20 से 30 सेकंड तक रुकने का प्रयास करें।
बॉडी में ऑक्सीजन लेवल को बढ़ाने के लिए योग कपालभाति प्राणायाम
कपालभाति योग एक साँस लेने की प्रकिया है जो हमारे श्वसन प्रणाली को मजबूत करता है और शरीर में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करता हैं। कपालभाति प्राणायाम को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को जमीन पर बिछाकर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखे और ध्यान की मुद्रा में बैठे।
साँस अन्दर को ओर ले अब साँस को बाहर छोड़ते हुए पेट को अन्दर की ओर इस प्रकार खींचे की पेट और पीठ आपस में मिल जाएं। फिर साँस को अन्दर ले ओर पेट को ढीला करें। यह क्रिया फिर से दोहराहएं। कपालभाति प्राणायाम को पांच मिनट तक लगातार दोहराएं।
शरीर में ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के लिए योग अनुलोम विलोम प्राणायाम
अगर आप कोरोना वायरस के संक्रमण से बचना चाहते हैं तो अनुलोम विलोम प्राणायाम को करें। यह योग आसान शरीर में ऑक्सीजन लेवल की कमी को दूर करने में मदद करता हैं। इसे करने से रक्त परिसंचरण में सुधार होता है और फेफड़े भी स्वस्थ रहते हैं।
अनुलोम विलोम प्राणायाम को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को जमीन पर बिछा कर सुखासन या वज्रासन में बैठ जाएं। अब अपने दाहिने हाथ को ऊपर उठायें और अंगूठे से दाहिने नाके नथुने को बंद करके बाएं नथुने से लम्बी साँस लें अब अपने दाहिने हाथ की अनामिका से बाएं नथुने को बंद करके दाहिने नथुने से साँस को बाहर छोड़े। इस स्थिति में आपका बायां हाथ घुटने पर रहेगा।
उष्ट्रासन करने के 5 आसान स्टेप, शरीर के 3 हिस्से बनते हैं मजबूत
उष्ट्रासन योगा (Ustrasana Yoga) आपके शरीर में ऊर्जा का संचार करने के लिए काफी फायदेमंद है. यह संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है, पहला उष्ट्र यानी ऊंट और दूसरा आसन यानी मुद्रा. इसलिए इस योगासन को अंग्रेजी में Camel Pose भी कहा जाता है. उष्ट्रासन के अभ्यास से शरीर लचीला बनता है और शरीर का चौथा मुख्य चक्र अनाहत खुलता है. इस चक्र को हृदय चक्र भी कहते हैं. इस आध्यात्मिक चक्र के सक्रिय होने से व्यक्ति की ऊर्जा, चेतना व भावनाओं का विस्तार होता है. उष्ट्रासन से शरीर के तीन हिस्से काफी मजबूत हो जाते हैं, जिनके बारे में नीचे उष्ट्रासन के फायदों में जिक्र किया गया है.
HOW YOGA CAN HELP PREPARE YOUR BODY FOR PREGNANCY
If you are hoping to become pregnant in the coming year, it’s a good idea to start preparing your body for the upcoming changes now. That’s because your body will undergo dramatic adjustments to make room for your growing baby as well as to prepare you for labor and delivery. The more you can prepare your body for what’s ahead, the smoother the journey can be for both you and baby. Yoga can play an important role in this adventure!
USING YOGA TO EASE ANXIETY
If you suffer from anxiety, you should know that you aren’t alone. In fact, there are over 40 million others in the United States who suffer from anxiety, putting you in a lot of good company. While the stigma of anxiety disorders and mental illness is starting to fall away, there are still a lot of people who are reluctant to get help. According to the Anxiety and Depression Association of America, only a little over a third of the people who suffer from anxiety get treatment for it.
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PRACTICING YOGA COLLECTIVELY
At Collective Yoga, we celebrate diversity. Our instructors do not strive to make everyone look the same in any pose. Instead, we encourage everyone to find their own variation – their own “shape” – of each pose while still practicing safely.
In our studio, it is common to see our teachers practicing alongside our members. Why is this? Because we truly love our space, the vibe, the friendships, and our community, as well as the creativity and freedom that we experience in our individual practices.
What does it mean to #practicecollectively?
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HEART OPENERS FOR VALENTINE’S DAY
The heart symbolizes love, but what exactly is an open heart? In honor of Valentine’s Day, let’s take a look at the yogic practice of “heart opening,” and how incorporating heart openers into our practice can lead to pure love and a blissful state.
WHAT ARE HEART OPENERS?
“Heart openers” are movements in yoga that expand your chest and rib cage.
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“योग विज्ञान है” – ओशो
योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है।
जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।
नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।