एक हफ्ते में हिप्स कम करने के लिए प्लाइस (plies) को शामिल करें

अपने कंधे के बराबर दूरी पर अपने पैरों को रखकर खड़े रहें। अपने पैर की उंगलियों को अपने शरीर से 45 डिग्री के कोण पर रखें। अपने हाथों को अपनी छाती के सामने प्रार्थना की स्थिति में रखें या अपने हाथों को अपने कूल्हों पर रखें।

अपने सिर, धड़ (ऊपरी शरीर) और हिप्स को एक सीधी रेखा में बनाते हुए अपने शरीर को छत से ज़मीन की ओर ले जाएँ।

जब आप अपने शरीर को नीचे ला रहे हैं, तो आपके घुटने आपके शरीर से बाहर की ओर झुके होने चाहिए। अपने से जितना संभव हो कूल्हों को उतना नीचे लाने की कोशिश करें।

कूल्हों को टोन करने के लिए ब्रिज (bridge) एक्सरसाइज को भी शामिल करें

ब्रिज एक ऐसी पोजिशन है जो आपके पैरों के पीछे के हिस्से पर काम करती है, साथ ही यह एक्सरसाइज आपकी जांघों और कूल्हों को अधिक टोन्ड और पतला बना सकती है।


 
जमीन पर लेट जाएं और छत की ओर मुंह करें। अपने घुटनों को अपने शरीर के सामने 90 डिग्री के कोण पर मोड़ें। अपनी बाहों को अपनी तरफ रखें।

अपने नितंबों को दबाते हुए, अपने कूल्हों को हवा में ऊपर उठाएं जब तक कि आपका शरीर आपके घुटनों से आपके सिर तक एक सीधी रेखा में न हो।

अपनी पीठ या रीढ़ को जमीन पर लाने से पहले, कुछ सेकंड के लिए इस स्थिति में रहें।

किस रोग में कौन से योग आसन कारगर

मोटापा : वैसे तो मात्र आंजनेय आसन ही लाभयायक सिद्ध होगा लेकिन आप करना चाहे तो ये भी कर सकते हैं- वज्रासन, मण्डूकासन, उत्तानमण्डूसकासन, उत्तानकूर्मासन, उष्ट्रासन, चक्रासन, उत्तानपादासन, सर्वागांसन व धनुरासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, कटिचक्रासन, कोणासन, उर्ध्वाहस्तोहत्तातनासन और पद्मासन।

स्तन कैंसर में योगाभ्यास का महत्व

योग करना सामान्य मनुष्य के लिए तो स्वास्थ्यवर्धक है, और कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को योग के अभ्यास विधायक उर्जा से भर देते हैं | और स्तन कैंसर की महिलाओं के लिए योग के आसन इलाज के दौरान और इलाज के बाद भी अत्यंत जरूरी होते हैं|

एसिडिटी से हैं परेशान तो इन योगासनों का करें नियमित अभ्यास

नियमित योग करने वाले कई बीमारियों से बचे रहते हैं. एसिडिटी भी उनमें से एक है. एसीडिटी आधुनिक जीवनशैली की वजह से होने वाली आम समस्या है. खाने-पीने में जरा भी अनियमितता हुई नहीं कि एसिडिटी गले पड़ गई. इससे बचने के लिए लोग कई तरह की औषधियों और दवाइयों का इस्तेमाल करते हैं फिर भी परेशान रहते हैं.
एसीडिटी की समस्याओं से बचने के लिए अपनाएं ये आसान से योगासन-

मत्स्यासन
यह आसन मांसपेशियों के लिए बहुत लाभदायक है. इसके नियमित अभ्यास से एसिडिटी की समस्या से राहत मिलती है.

योग से गैस की दिक्कत को यूं करें गायब

पेट गैस को अधोवायु बोलते हैं। इसे पेट में रोकने से कई बीमारियां हो सकती हैं, जैसे एसिडिटी, कब्ज, पेटदर्द, सिरदर्द, जी मिचलाना, बेचैनी आदि। लंबे समय तक अधोवायु को रोके रखने से बवासीर भी हो सकती है। आयुर्वेद कहता है कि आगे जाकर इससे नपुंसकता और महिलाओं में यौन रोग होने की भी आशंका हो सकती है।

गैस बनने के लक्षण 
पेट में दर्द, जलन, पेट से गैस पास होना, डकारें आना, छाती में जलन, अफारा। इसके अलावा, जी मिचलाना, खाना खाने के बाद पेट ज्यादा भारी लगना और खाना हजम न होना, भूख कम लगना, पेट भारी-भारी रहना और पेट साफ न होने जैसा महसूस होना।

योग का महत्व

यह प्रमाणित तथ्य हैं की योग मुद्रा, ध्यान और योग में श्वसन की विशेष क्रियाओं द्वारा तनाव से राहत मिलती है, योग मन को विभिन्न विषयों से हटाकर स्थिरता प्रदान करता है और कार्य विशेष में मन को स्थिर करने में सहायक होता है.

हम मनुष्य किसी चीज़ की ओर तभी आकर्षित होते हैं जब उनसे हमें लाभ मिलता है. जिस तरह से योग के प्रति हमलोग आकर्षित हो रहे हैं वह इस बात का संकेत हैं कि योग के कई फायदे हैं. योग को न केवल हमारे शरीर को बल्कि मन और आत्मिक बल को सुदृढ़ और संतुष्टि प्रदान करता है. दैनिक जीवन में भी योग के कई फायदे हैं, आइये! इनसे परिचय करें.

योग के प्रकार

हमारे शरीर में अलग अलग अंगों और विभिन्‍न प्रकार के स्‍वास्‍थ्‍य लाभों को प्राप्‍त करने के लिए योग किया जाता है। लेकिन योग के कई प्रकार होते हैं आइए संक्षिप्‍त में जाने योग के प्रकार जो हमें कई प्रकार के लाभ दिलाते हैं।

वि‍नीसा योग (Vinyasa Yoga)
अष्‍टांग योग (Ashtanga Yoga)
आयंगर योग (Iyengar Yoga)
बिक्रम योग (Bikram Yoga)
जिवामुक्ति योग (Jivamukti Yoga)
पावर योग (Power Yoga)
शिवानंद योग (Sivananda Yoga)
यिन योग (Yin Yoga)
 

योग द्वारा जोड़ों के दर्द का उपचार

अपने दैनिक जीवन के सामान्य कामकाज को निपटाते वक्त क्या आपके घुटनों, कन्धों या कलाई में दर्द होता है? क्या आप इन जोड़ों के दर्द के कारण अपने अपनी इच्छानुसार जीवन जीने के आनंद से वंचित है? क्या आप दिन में कई कई बार दर्द निवारक दवाओं के सेवन से परेशान है?

सर्वाइकल के लिए योग : मत्स्यासन

मत्स्यासन यानी मछली की तरह किया जाने वाला आसन। यह योगासन हमारी रीढ़ की हड्डी को मजबूती और लचीलापन प्रदान करता है। इसके साथ ही, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या से राहत मिलती है। इस आसन को करने से हमारे कंधे और गर्दन की मांसपेशियों को भी आराम मिलता है।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।