कसरत, योग और फ़िटनेस की आवश्यकता

अन्य देशों जैसा हमारे यहाँ शारीरिक तन्दुरूस्ती पर खास ध्यान नहीं दिया जाता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे देशों में जनसंख्या के एक बड़े हिस्से को अपना जीवन यापन करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। पर हम आगे देखेंगे यह ज़रूरी नहीं है कि कड़ी मेहनत से शारीरिक तंदरुस्ती सुनिश्चित हो जाए। शारीरिक कसरत से ताकत भी बढ़ती है और तनाव और थकान को झेलने की क्षमता भी। इससे कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव होता है, स्वास्थ्य में सुधार होता है और कई एक बीमारियॉं ठीक भी हो जाती हैं। इस अध्याय में शारीरिक तन्दुरूस्ती क्या है इसके बारे में हम जानेंगे और कुछ एक कसरतों के मुख्य अवयवों के बारे में भी।

योग करने से पहले क्या करे

किसी भी कार्य को करने से पहले उसकी कुछ तैयारियां जरूरी होती है | इसी प्रकार योग करने से पहले कुछ तैयारियां जरूरी होती है और सही समय का चुनाव योग के लिए उचित स्थान स्थान का साफ सुथरा होना संचित हवा का होना और योग के करने की जगह पर किसी भी प्रकार के चुगने वाले चीज नहीं होने चाहिए योग अगर प्रातः काल खुले में किया जाए तो यह सर्वोत्तम होता है अन्यथा आप अपने घर के अंदर भी साफ सुथरी जगह पर नियमित रूप से योग कर सकते हैं|

बुजुर्गों के लिए आसान योगासन : कटिचक्रासन

यह आसन शरीर को सीधा रखने में मदद करता है, क्योंकि इससे स्पाइन सीधी रहती है। इसके अलावा, यह हाथों और पैरों की मसल्स को मजबूती प्रदान करता है। बुजुर्गों के लिए योगासन में यह आसन काफी आसान है और फायदेमंद भी है। इसे करने के लिए पैरों को थोड़ा सा खोलकर आराम से खड़े हो जाएं। इसके बाद अपने हाथों को कंधे की सीध में रखते हुए सामने की तरफ फैला लें। अब लंबी और गहरी सांस लें और सांस छोड़ते हुए जितना हो सके अपनी कमर को दायीं तरफ ले जाएं और सिर को दाएं कंधे की तरफ झुकाएं। अब सांस लेते हुए पिछली वाली पोजीशन में आ जाएं और फिर इस प्रक्रिया को दूसरी तरफ से भी दोहराएं।

पेट कम करने के लिए प्राणायाम में करे भस्त्रिका प्राणायाम

भस्त्रिका प्राणायाम भी कपालभाति की तरह ही फायदेमंद होता है। इस प्राणायाम को करने से डाइजेशन सिस्टम सही रहता है, जिसकी वजह आप जो भी खाते है वह आसानी से पच जाता है। अगर आप पेट को कम करना चाहते है तो इस भस्त्रिका प्राणायाम को कर सकते है।

सर्वाइकल के लिए योग : सूर्य नमस्कार

कोई भी व्यक्ति जिसे गर्दन में दर्द, कंधे में दर्द और सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस हो उसके लिए यह आसन बेहद उपयोगी है। हालांकि, इसे करते समय बेहद सावधान रहना चाहिए। अगर आपको यह आसन नहीं आता, तो किसी विशेषज्ञ के निर्देशों का पालन करते हुए ही इस आसन को करें। इससे रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। सूर्य नमस्कार करने के लिए बारह चरणों का पालन करना होता है।

तंत्रिका तंत्र के लिए योनि मुद्रा के फायदे

वास्तव में योनि मुद्रा एक ऐसा आसन है जिसमें आंखों को बंद रखकर श्वास लेने और छोड़ने की क्रिया की जाती है। इसकी वजह से व्यक्ति का तंत्रिता तंत्र मजबूत होता है और शरीर के अंदर जमा अनावश्यक पदार्थ बाहर निकलते हैं। यह आसान करने के बाद मांसपेशियों में जकड़न महसूस नहीं होती है और एक आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है एवं मन प्रसन्न रहता है।

सूर्य मुद्रा फॉर थाइरोइड

सूर्य मुद्रा थायरायड के रोगों में भी बहुत फायदेमंद हैं, हमारे हाथ की हथेली में थायरायड ग्रन्थि का केंद्र बिंदु स्थित होता हैं, सूर्य मुद्रा में अनामिका उंगली से इस केंद्र बिंदु पर दबाव बनता हैं जिसके कारण थायरायड ग्रंथि में कम स्त्राव के कारण इसे होने वाले रोग मोटापा आदि दूर होते हैं।

पैंक्रियास (अग्नाशय) के लिए योग

अग्नाशय को स्वस्थ्य और एक्टिव रखने और सुचारु रूप से कार्य करने के लिए योग का अभ्यास किया जा सकता है। पैंक्रियास को स्वस्थ्य और एक्टिव रखने के लिए योग बहुत ही लाभदायक होता है। पैंक्रियास को अग्नाशय के नाम से भी जाना जाता है। यह हमारे पेट के अन्दर उपस्थित पाचन प्रणाली की एक ग्रंथि है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि योग वजन कम करने, मधुमेह आदि की समस्या को कम करने में आपकी मदद करता है। मधुमेह, पेट दर्द और कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं से बचाव के लिए अपने अग्न्याशय को फिट और स्वस्थ रखना भी उतना ही आवश्यक है। शरीर के प्रत्येक अंग को फिट और ठीक बनाए रखने में योग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बुजुर्गों के लिए योगासन- बद्धकोणासन

बुजुर्गों के लिए योगासन में यह आसन उनकी बॉवेल मूवमेंट को सुधारता है और पाचन क्रिया मजबूत करता है। इसके अलावा, इस आसन से जांघ, घुटने की मसल्स स्ट्रेच होती हैं और जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। इसे करने के लिए कमर को सीधा रखते हुए जमीन पर बैठ जाएं और पैरों को सामने की तरफ फैला लें। अब दोनों घुटनों को मोड़ते हुए उनके तलवे अपने जननांग की तरफ लाएं। अब दोनों पैर के तलवों को एक साथ मिला लें और जितना हो सके जननांगों के पास ले जाएं। अब अपनी जांघों और घुटनों को जमीन पर टिका लें और हाथों से तलवों को पकड़ लें। अब लंबी और गहरी सांस लें और अपनी जांघों को तितली के पंखों की तरह तेज-तेज ऊपर नीचे करें। जब

बुजुर्गों के लिए योगासन- शलभासन

यह योगासन बुजुर्गों की गर्दन और कमर की मसल्स को मजबूत फ्लैक्सिबल बनाता है और उनकी पाचन क्रिया सुधारता है। इस योगासन को करने के लिए पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। अब सांस अंदर लेते हुए अपना दायां पैर उठाएं और पैर को सीधा रखें। अब इसी अवस्था में रहें और सांस लेते रहें। सांस छोड़ते हुए दाएं पैर को नीचे रखें। अब अपने बाएं पैर से भी यही प्रक्रिया दोहराएं। इसके बाद सांस अंदर लेते हुए और घुटनों को सीधा रखते हुए कुछ गति के साथ दोनों पैरों को जितना हो सके ऊपर ले जाएं और इसी अवस्था में बने रहने की कोशिश करें। इसके बाद सांस छोड़ें और दोनों पैरों को आराम से नीचे लाएं।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।