योग करें,हृदय-रोग से मुक्त रहें

आज की लाइफ स्टाइल में अपनी सेहत का खयाल रखने के लिए भी हम पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते। व्यस्त दिनचर्या का असर धीरे-धीरे हमारे दिल पर भी पड़ने लगता है जिससे बाद में बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है। अगर योग का थोड़ा सहयोग लें तो हम अपने दिल का खयाल रख सकते हैं। 

शरीर को मजबूत कैसे बनाएं में खाएं शकरकंद

व्‍यस्‍त जीवन और अधिक परिश्रम के कारण शरीर में कमजोरी आना सामान्‍य है। लेकिन इस कमजोरी को दूर करने और शरीर को मजबूत बनाने के लिए आप शकरकंद का सेवन कर सकते हैं। शकरकंद में बीटा-कैरोटीन, विटामिन सी, मैंगनीज आदि के साथ ही अन्‍य खनिज पदार्थ उच्‍च मात्रा में होते हैं। शकरकंद में फाइबर के साथ ही स्‍टार्चयुक्‍त कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं जो मांसपेशियों की क्षतिग्रस्‍त कोशिकाओं की मरम्‍मत करने के लिए प्रोटीन उत्‍प्रेरक के रूप में सहायक होते हैं। अधिक परिश्रम और नियमित व्‍यायाम करने वाले लोगों को अपने ऊर्जा स्‍तर को उच्‍च रखने की आवश्‍यकता होती है। यदि आप भी अपने शरीर का उचित वजन और शक्तिशाली शरीर च

शरीर को बलवान बनाना है तो खाएं साल्‍मन

साल्‍मन मछली का नियमित सेवन मांसपेशियों के निर्माण और समग्र स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छा उपाय है। साल्‍मन मछली की लगभग 85 ग्राम मात्रा का सेवन करने पर 17 ग्राम प्रोटीन, 2 ग्राम ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन B सहित कई महत्‍वपूर्ण विटामिन प्राप्‍त होते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड मांसपेशियों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत ही आवश्‍यक और फायदेमंद घटक है। जिसके कारण नियमित रूप से साल्मन मछली का सेवन करना मांसपेशियों सहित आपके शरीर की ताकत बढ़ाने में सहायक होता है।

शरीर मजबूत बनाने के उपाय काले

जिन लोगों को शारीरिक कमजोरी का अनुभव हो रहा है उन्हें अपने आहार में कुछ परिवर्तन करने चाहिए। काले भी एक खाद्य सब्‍जी है जिसे पावरहाउस कहा जाता है। काले में मैग्नीशियम की उच्‍च मात्रा होती है। मैग्‍नीशियम शरीर में ऊर्जा के स्‍तर को बढ़ाने में सहायक होता है। आप भी आपनी शारीरिक कमजोरी और थकान संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए काले को अपने नियमित आहार में शामिल कर सकते हैं। इसलिए शरीर को ताकतवर बनाने के आसान तरीके में काले को शामिल किया जा सकता है। काले को आप सलाद के साथ या अन्‍य स्‍वादिष्‍ट व्‍यंजनों के रूप से उपभोग कर सकते हैं।

ताकतवर बनने के घरेलू उपाय भांग के बीज

भांग के बीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड की अच्‍छी मात्रा होती है। स्‍वस्‍थ वसा होने के कारण नियमित रूप से भांग के बीजों की बहुत ही कम मात्रा का सेवन करना शरीर के लिए लाभकारी होता है। यह लंबे समय तक ऊर्जा प्राप्‍त करने का सबसे अच्‍छा तरीका है। आप इन्‍हें सलाद, स्‍मूदी और अन्‍य खाद्य पदार्थों के साथ मिलाकर सेवन कर सकते हैं। हालांकि भांग एक नशीला पदार्थ होता है। इसलिए इन बीजों का बहुत ही कम मात्रा में सेवन किया जाना चाहिए। साथ ही आपको इनका सेवन करने से पहले अपने डॉक्‍टर से सलाह लेना आवश्‍यक है।

जॉगिंग की शुरूआत करने के पहले सप्ताह में

जॉगिंग की शुरूआत करने के लिए पहले आप 6 मिनट तक चलें, फिर धीरे-धीरे 1 मिनट के लिए जॉगिंग करें। और दोबारा फिर 1 मिनट के लिए चलें और 1 मिनट के लिए जॉगिंग करें। जब तक आप थक नहीं जाते, तब तक इन अंतरालों को दोहराएं। शरीर का ठंडा होने के लिए 5 मिनट तक चलें।

रस्सी कूदना

आप रस्सी कूदकर भी अपने स्टेमिना को बढ़ा सकते है। यह आपको दिल पंप करता है और आपके हाथ और पैर दोनों पर काम करता है। इसमें आपको दोनों हाथों को घुमाते हुए एक या दो इंच जमीन से ऊपर कूदना है। स्टेमिना बढ़ाने के लिए रस्सी कूद आप एक-एक मिनिट करके 10 मिनट तक करने कोशिश करें।


 
इसके अलावा आप अन्य एक्सरसाइज को करके अपने स्टेमिना को बढ़ा सकते हैं जैसे –

बाइसेप्स एक्सरसाइज – Biceps exercises
ट्राइसेप्स एक्सरसाइज –Triceps exercises
एब्डोमिनल एक्सरसाइज – Abdominal exercise
ग्लूट्स एक्सरसाइज – Glutes exercise

रनिंग

अपनी सहनशक्ति बढ़ाने के लिए आप रनिंग जैसी एक्सरसाइज को कर सकते हैं। रनिंग में आप स्प्रिंटिंग कर सकते हैं जो कि एक प्रकार से तेज दौड़ना है। अपने स्टेमिना को बढ़ाने एक लिए आप नियमित रूप से कम से कम 30 मिनिट की जॉगिंग पर जा सकते हैं। इसके साथ आप सुबह-सुबह वाकिंग पर भी जा कर अपने स्टेमिना को बढ़ा सकते हैं

साइकिलिंग

स्टेमिना को बढ़ाने के लिए साइकिलिंग एक्सरसाइज बहुत ही अच्छी मानी जाती हैं। साइकिलिंग कार्डियो एक्सरसाइज का एक प्रमुख हिस्सा है। आप इस व्यायाम को करने के लिए इनडोर साइकिलिंग या स्पिन क्लास को भी कर सकते हैं। आप इस एक्सरसाइज से कम समय में अधिक कैलोरी भी जला सकते हैं।

निम्न सावधानियां शीर्षासन करते समय बरतें

यदि आपको उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, सेरेब्रल या कोरोनरी थ्रॉम्बोसिस एवं ग्लूकोमा (glaucoma) की समस्या है तो शीर्षासन का अभ्यास न करें।
सिर में ब्लड हेमरेज की समस्या, किडनी का रोग और स्लिप डिस्क की समस्या हो तो इस आसन का अभ्यास (practice) करने से बचें।
यदि आपका पेट पूरी तरह से भरा (full stomach) हो, शरीर में थकान हो, सिर दर्द या माइग्रेन की समस्या हो  तो इस आसन का अभ्यास न करें।
शीर्षासन  का अंतिम मुद्रा में शरीर को उर्ध्वाधर रखें और पीछे या आगे की ओर न झुकाएं अन्यथा शरीर का बैलेंस बिगड़ सकता है और आपको चोट भी लग सकती है।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।