आंखों के लिए फायदेमंद शीर्षासन

जब आप सिर के बल उल्टा होकर शरीर का संतुलन बनाते हैं तो सिर में अतिरिक्त ऑक्सीजन, पोषक पदार्थ युक्त खून पहुंचता है जो कि आंखों की कोशिकाओं को भी मजबूत बनाने में मदद करता है। इसलिए आंखों की विभिन्न बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए शीर्षासन फायदेमंद माना जाता है।

शीर्षासन के फायदे एकाग्रता बढ़ाने में

जब आप जमीन पर उल्टा होकर शीर्षासन का अभ्यास करते हैं तो मस्तिष्क में खून का प्रवाह (blood flow) बढ़ता है, जिसके कारण मस्तिष्क की क्रियाएं बेहतर होती हैं और एकाग्रता बढ़ती है। इसके अलावा शीर्षासन करने से दिमाग और यादाश्त तेज होती है।

मोटी जांघ को पतला करने के लिए साइड लंज व्यायाम

साइड लंज व्यायाम आंतरिक जांघों के लिए बहुत ही प्रभावी होता है। साइड लंज एक्सरसाइज करने के लिए आप सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं। अब अपने दोनों पैरों के बीच में कम से कम 2 फुट का दूरी रखें। अपने दोनों हाथों को सामने की ओर लायें और कोहनी से मोड़ कर दोनों हथेलियों को आपस में मिला लें। अब दाएं पैर को घुटने से मोड़े और बाएं पैर को सीधा रखें। फिर से अपने दायं पैर को सीधा करके बाएं पैर के पास ले आयें। अब फिर से बाएं पैर को दाएं पैर से 2 फुट की दूरी पर रखें और पूरी क्रिया दूसरे पैर से दोहराहएं।

शीर्षासन के फायदे

शीर्षासन एक ऐसा आसन है जिसका प्रतिदिन खाली पेट अभ्यास करने से शरीर के विभिन्न विकार दूर हो जाते हैं। यह आसन सिरदर्द की समस्या, नींद की समस्या, लिवर और किडनी के रोगों को दूर करने के साथ ही शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसके अलावा भी इस आसन के विभिन्न फायदे हैं। आइये जानते हैं उन फायदों के बारे में।

शीर्षासन करने का तरीका

शीर्षासन को बहुत सामान्य और बेहद आसान आसन माना जाता है लेकिन यह उतना ही कठिन भी होता है। इस आसन का अभ्यास करने के लिए जमीन पर सिर टिकाकर पूरे शरीर का संतुलन बनाने आना चाहिए अन्यथा आप इसका अभ्यास नहीं कर पाएंगे। आइये जानते हैं शीर्षासन करने का सही तरीका क्या है।

जांघ की चर्बी कैसे कम करें के लिए लेग स्विंग व्यायाम

लेग स्विंग व्यायाम थाई को पतला करने के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है। यह व्यायाम आपकी बाहरी जांघों और आपके तिरछेपन को लक्षित करता है। इसे करने लिए आप सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरो को पास-पास रखें। अब अपने दाएं पैरों को आगे की ओर अधिकतम ऊंचाई तक स्विंग करें। यदि आपको लेग स्विंग करते समय संतुलन बनाने में कठिनाई हो रही है तो आप किसी कुर्सी का सहारा ले सकते है। ध्यान रखें कि जब आप पैर को स्विंग करे तो पैर मुड़ना नहीं चाहिए। अब यही पूरी क्रिया अपने बाएं पैर से भी करें। अपनी क्षमता के अनुसार आप दोनों पैरों से लेग स्विंग बराबर संख्या में करें। यह व्यायाम आपकी जांघों को पतला करने में मदद क

पश्चिमोत्तानासन करने का तरीका, फायदे और सावधानियां

निए पश्चिमोत्तानासन योग की विधि, पश्चिमोत्तानासन के फायदे, करने का तरीका और सावधानियों के बारे में। (Benefits of Paschimottanasana in Hindi) पश्चिमोत्तानासन संस्कृत भाषा का शब्द है, जहां पश्चिम का अर्थ पीछे की ओर (west direction) उत्तान का अर्थ खिंचना या तानना (stretched) और आसन का अर्थ (pose) है। इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर के पिछले हिस्से अर्थात् रीढ़ की हड्डी (spine) में खिंचाव उत्पन्न होता है, इस कारण इस आसन को पश्चिमोत्तानासन कहा जाता है। यहां पश्चिम का अर्थ पश्चिम दिशा से नहीं बल्कि पीछे के भाग से है। पश्चिमोत्तानासन देखने में बहुत आसान लगता है लेकिन वास्तव में इस आसन का

महिलाओं का पेट कम करने का व्यायाम प्लैंक क्रोल आउट

प्लैंक क्रोल आउट व्यायाम महिलाओं के पेट को कम करने में बहुत ही फायदेमंद है। यह व्यायाम अपने हाथों और पैरों की तीव्रता का उपयोग करके प्रतिरोध को बढ़ाता है। प्लैंक क्रोल आउट एक्सरसाइज करने के लिए आप सबसे पहले फर्श पर सीधे खड़े हो जाएं। अब अपनी कमर से नीचे की ओर झुकें और हाथों की उँगलियों से फर्श को छूने का प्रयास करें। जैसे ही आपकी उंगलियां फर्श से टकराती हैं, अपने हाथों को फर्श पर रख कर आगे की ओर ले जाएं, जब तक आप पुश-अप स्थिति तक नहीं पहुंच जाते। अब फिर से अपने दोनों हाथों को पीछे की ओर ले जाएं और अपने हाथों को फर्श ऊपर उठायें। अपनी कमर को सीधा करके सीधे खड़े हो जाएं। यह प्लैंक क्रोल आउट व्याय

ગર્ભપિંડાસન

પિંડ એટલે અંગ્રેજીમાં ફીટસ-ભ્રૂણ. આ આસનમાં શરીરનો આકાર ગર્ભમાં રહેલ ભ્રૂણ જેવો દેખાય છે એટલે તે શબ્દશઃ ગર્ભમાં રહેલ ભ્રૂણની મુદ્રા કહેવાય છે.
આ આસન જે લોકો પદ્માસનમાં બેસે છે અને પાતળા પગ તથા હાથ છે તેઓ સરળતાથી કરી શકે છે.
 

हनुमानासन के फायदे शरीर से विषाक्त पदार्थ निकालने में

प्रतिदिन हनुमानासन करने से शरीर के अंदर जमा हानिकारक (harmful) पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। इसके अलावा यह आसन पेट की मांसपेशियों का मसाज करने का काम करता है और पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। इसलिए शरीर को साफ रखने और दूषित हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने के लिए यह आसन किया जाता है।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।