जॉगिंग करने से पहले वार्म-अप करे

हम जानते हैं कि किसी भी व्यायाम को करने से हमारे शरीर को गर्म करने की आवश्यकता होती है जिसे वार्म अप कहा जाता है। यह वार्म अप आपके शरीर को व्यायाम करने से लिए तैयार करता है। उसी प्रकार जॉगिंग के पहले वार्म अप करने से आपके पैरों की मांसपेशियों में लचीलापन आ जाता है जो जॉगिंग करने मदद करता हैं।

जाने जॉगिंग शुरू करने का सही तरीका

जॉगिंग कैसे करे: जॉगिंग दौड़ का ही एक रूप है जिसमें व्यक्ति धीमी गति से लगातार दौड़ता रहता है। आप जॉगिंग करके खुद को फिट रख सकते हैं। लेकिन जॉगिंग की शुरूआत करने के लिए पहले शरीर को इसके लिए तैयार कर लेना चाहिए कभी भी एकदम से जॉगिंग करने से बचना चाहिए। जॉगिंग शुरू करने से पहले पैदल चलें फिर उसके बाद जॉगिंग करें। नियमित रूप से व्यायाम आपको अनेक लाभों को देता है और जॉगिंग करना एक बहुत ही अच्छा व्यायाम है। वजन कम करने और फिट रहने के लिए जॉगिंग एक शानदार तरीका है। सप्ताह में तीन बार 30-40 मिनट तक जॉगिंग करना वसा कम करने के लिए साथ स्टेमिना बढ़ाने और मांसपेशियों के निर्माण का एक सरल और आसान तरीका

मजबूत पाचन तंत्र के लिए क्रंच एक्सरसाइज

क्रंच एक्सरसाइज एक एब वर्कआउट है जो पेट की मांसपेशियों को सही ढंग से कार्य करने और पाचन को मजबूत करने में मदद करता है। सामान्य क्रंच एक्सरसाइज के अलावा आप इसके अन्य रूप जैसे – वर्टिकल लेग क्रंच (vertical leg crunch), लॉन्ग आर्म क्रंच (long arm crunch) और रिवर्स क्रंच (reverse crunch) आदि विभिन्न रूपों को भी आजमा सकते हैं। क्रंच एक्सरसाइज को करने के लिए आप सबसे पहले एक एक्सरसाइज मैट को बिछाकर उस पर सीधे ले जाएं। अब अपने दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ कर फर्श पर रख लें और हाथों को सिर के पीछे रखें लें। अब अपने सिर और कन्धों को फर्श से ऊपर उठायें और फिर से नीचे रखें। आप इस क्रंच एक्सरसाइज को बार

पाचन को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज है तेज चलना

तेज चलना भी एक एक्सरसाइज जो कि हमारे शरीर के लिए अनेक प्रकार से लाभदायक है। तेज चलना सबसे सरल व्यायाम माना जाता है जिसे प्रत्येक व्यक्ति आसानी से कर सकता है। रोजाना लगभग 30 से 40 मिनट तक तेज चलना आपको पाचन संबंधी समस्याओं से और अन्य शारीरिक बीमारियों से दूर रखता है। यह आंतों की सिकुड़न को उत्तेजित करता है, और बड़ी आंत के माध्यम से मल को निकने में मदद करता है।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।