मधुमेह को कम करने के लिए सूर्य मुद्रा के फायदे

सूर्य मुद्रा मधुमेह के मरीजों के लिए बहुत ही लाभदायक हैं, यह मुद्रा हमारे शरीर में उपस्थित चीनी के मात्रा को जला के खत्म कर देती हैं, यह वसा के कारण उत्पन्न्य मोटापे से होने वाले रोगों जैसे मधुमेह और कब्ज को ठीक करती हैं। सूर्य मुद्रा लीवर में होने होने वाले सभी रोगों से बचाता हैं और रक्त में यूरिया की मात्रा को भी नियंत्रित करता हैं।

अधिक समय तक सेक्स करे अनुलोम विलोम प्राणायाम से

अनुलोम विलोम प्राणायाम एक साँस लेने की तकनीक है और यह श्वसन एलर्जी, राइनाइटिस (rhinitis), साइनसाइटिस (sinusitis), सर्दी और खांसी जैसी कई समस्याओं को हल करने में मदद करने के लिए जानी जाती है। इसके अलावा अनुलोम विलोम प्राणायाम यौन आनंद को बढ़ाने में भी मदद करता है और संभोग की भावना को रोकता है। यह स्खलन में देरी करने में भी मदद करता है और पूरे शरीर को ताकत देता है। इस आसन को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को जमीन पर बिछा कर सुखासन या वज्रासन में बैठ जाएं।

बालों को उगाये अनुलोम विलोम प्राणायाम योग –

अनुलोम विलोम प्राणायाम योग फेफड़ों के काम को बेहतर बनाने और अवसाद तथा तनाव को दूर करने में मदद करता है, जो बालों के झड़ने का मुख्य कारण है। यह साँस लेने का व्यायाम फेफड़ों को स्वस्थ रखता है और शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त के प्रवाह को भी उत्तेजित करता है जो खोपड़ी को भी पोषण देता है जिसके कारण बाल फिर से उगना प्रारंभ हो जाते है। अनुलोम विलोम प्राणायाम योग को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को जमीन पर बिछा कर सुखासन या वज्रासन में बैठ जाएं।अब अपने दाहिने हाथ को ऊपर उठायें और अंगूठे से दाहिने नाके नथुने को बंद करके बाएं नथुने से लम्बी साँस लें अब अपने दाहिने हाथ की अनामिका से बाएं नथुने क

एक्सरसाइज मशीनों को बिजी करके ना रखें

पहली बार जिम जाने की ख़ुशी अलग ही होती है ये बात बिलकुल सही है लेकिन इस ख़ुशी में आप यह ना भूल जायें की और भी लोग एक्सरसाइज करने का इंतेजार कर रहे है। एक ही मशीन पर घंटों तक एक्सरसाइज ना करें, इससे दूसरों को एक्सरसाइज करने में परेशानी हो सकती है। अपने ट्रेनर के निर्देशानुसार से हर मशीन का इस्तेमाल तय समय तक ही करें ताकि आपकी वजह से किसी अन्य व्यक्ति को एक्सरसाइज करने में परेशानी ना हों। साथ ही एक्सरसाइज करते समय फ़ोन या मेसेज ना करें। इससे दूसरों को डिस्टर्ब हो सकता है।

शरीर की शक्ति बढ़ाने के उपाय हाइड्रेट रहे

हमारे शरीर के कुल‍ वजन का 70 प्रतिशत हिस्‍सा पानी होता है जो ऊर्जा उत्‍पादन सहित शरीर को स्‍वस्‍थ्‍य रहने में सहायक होता है। इसका मतलब यह है कि शरीर में पानी की कमी ऊर्जा की कमी सहित कई गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य स्थिति का कारण हो सकता है। आप अपने शरीर की ताकत को बढ़ाने के लिए अपने शरीर को हाइड्रेट रखें। यह आपके शरीर में ऊर्जा के स्‍तर को बढ़ाने और थकान को कम करके आपकी सहनशक्ति को बढ़ा सकता है। इसके लिए आप नियमित अंतराल में दिन भर पर्याप्‍त मात्रा में पानी पिएं। इसके अलावा आप घर पर बने ताजे फलों के जूस का भी सेवन कर सकते हैं। आप अपने दैनिक आहार में सूप, स्‍टॉज और शोरबा आदि को भी शामिल कर सकते हैं ज

शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए एवोकाडो

यदि आप शरीर की ताकत और क्षमता में वृद्धि करना चाहते हैं तो एवोकाडो को अपने आहार में श‍ामिल करें। शरीर का उचित ढंग से काम करने के लिए पर्याप्‍त ऊर्जा की आवश्‍यकता होती है। शरीर की ताकत बढ़ाने के उपाय के रूप में आप एवोकैडो का उपयोग फायदेमंद होता है। यह फल वसा की स्‍वस्‍थ खुराक प्रदान करने में सहायक होता है। एवोकैडो में विटामिन सी, फाइबर, विटामिन K, फोलिक एसिड और विटामिन बी6 की अच्‍छी मात्रा होती है। विटामिन सी हमारे शरीर में एंटीऑक्‍सीडेंट का काम करता है जो तनाव और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने में सहायक होता है। जबकि विटामिन हमारे शरीर को ऊर्जा उत्‍पादन करने और अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍य

शरीर की ताकत बढ़ाने पौष्टिक आहार

यदि आप हमेशा थका हुआ, सुस्‍त और ताकत में कमी का अनुभव कर रहे हैं तो आपको अपने आहार पर ध्‍यान देना चाहिए। पौष्टिक आहार का सेवन कई गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को कम करने में सहायक हो सकता है। इसके अलावा उचित और संतुलित आहार शरीर की ताकत बढ़ाने का सबसे अच्‍छा और प्रभावी तरीका भी होता है। आपके शरीर को एक्टिव बने रहने के लिए ऊर्जा की आवश्‍यकता होती है। आपके शरीर को ऊर्जा आपके द्वारा उपभोग किये जाने वाले आहारों के माध्‍यम से ही प्राप्‍त होती है। इसलिए अपनी शारीरिक कमजोरी को दूर करने और शरीर की सहनशक्ति बढ़ाने के लिए आप अपनी दिनचर्या में पौष्टिक आहार को शामिल करना चाहिए। सभी प्रकार का संतुलित भोज

शरीर में ताकत बढ़ाने के लिए उपाय धूम्रपान छोड़े

सभी लोग जानते हैं कि धूम्रपान करना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक होता है। लेकिन शायद आप यह नहीं जानते हैं कि धूम्रपान करना अनिद्रा का कारण भी हो सकता है। इसके अलावा धूम्रपान करने से फेफड़ों के कैंसर, हृदय रोग और स्‍ट्रोक जैसी समस्‍याएं हो सकती है। धुएं में मौजूद टॉक्सिन और टार आपके फेफड़ों की कार्य क्षमता को कम कर सकते हैं। इसके अलावा इनकी मौजूदगी समय के साथ आपके शरीर में ऑक्‍सीजन के परिवहन को भी बाधित करती है। यदि आप अधिक मात्रा में धूम्रपान करते हैं तो यह आपके शरीर की ताकत कम करने का प्रमुख कारण हो सकता है।

शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए उपाय व्‍यायाम

शारीरिक कमजोरी या शरीर में ताकत की कमी के कारण अन्‍य गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं हो सकती हैं। इन स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं में हृदय रोग, मधुमेह और मोटापा आदि शामिल है। लेकिन इन सभी समस्‍याओं से बचने और शरीर की ताकत बढ़ाने के उपाय में आप नियमित व्‍यायाम शामिल कर सकते हैं। नियमित व्‍यायाम करने से आप शारीरिक थकान को आसानी से दूर कर सकते हैं साथ ही यह आपको अच्‍छी नींद लेने में भी सहायक होता है। व्‍यायाम करने से शरीर की कोशिकाओं को ऑक्‍सीजन उपलब्‍ध कराने और अधिक ऊर्जा उत्‍पादन करने में मदद मिलती है। जिन लोगों को शारीरिक कमजोरी का अनुभव होता है उन्‍हें नियमित व्‍यायाम करना चाहिए। क्‍योंकि व्‍यायाम

गर्दन के लिए व्यायाम

सबसे पहले अपने सिर को दाईं ओर झुकाएं जिससे आपके कान आपके कंधों को छुएं। कंधें न उठाएं। अब अपने बाएं हाथ को ऊपर उठाएं और धीरे-धीरे फर्श की ओर रखें। इससे गर्दन और कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव होगा और ये सुडौल होंगे।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।