स्वस्थ पाचन क्रिया के लिए पुशअप एक्सरसाइज
पुशअप एक्सरसाइज हमारे पाचन को मजबूत बनाने के लिए बहुत ही फायदेमंद होती है। पुशअप एक्सरसाइज में हम अपने हाथों के द्वारा बल का प्रयोग करके पेट की मांसपेशियों पर काम करते हैं। पाचन में सुधार के लिए यह काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस एक्सरसाइज को करने के लिए आप फर्श पर पेट के बल लेट जाएं और अपने दोनों हाथों की हथेलियों को फर्श पर अपनी छाती के पास में रखें। अब दोनों हाथों और पैर की उंगलियों पर वजन डालते हुए शरीर को ऊपर करें और फिर से हाथ की कोहनी को मोड़ें और शरीर को नीचे करें। पुशअप एक्सरसाइज के आप 3 सेट पूरा करें। यदि आप अच्छे फॉर्म के साथ एक मानक पुशअप नहीं कर सकते हैं तो अपने घुटनों क
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वज्रासन योग, भोजन के बाद करने के फायदे एसिडिटी में
गैस और एसिडिटी के कई साधारण कारण हो सकते हैं। यह हमारे खाना खाने के कारण हो सकता है जो अत्यधिक तैलीय, नमकीन, मसालेदार या मीठा होता है। एसिडिटी का एक अन्य संभावित कारण खाना खाने के तुरंत बाद सोना हो सकता है। इस समस्या से बचने के लिए आप खाना खाने के तुरंत बाद वज्रासन योग को करें।
शुरुआती लोगों के लिए पादहस्तासन योग करने की टिप
यदि आप एक बिगिनर हैं और योग अभ्यास की अभी अभी शुरुआत कर रहें है तो आपको निम्न तरीके को करना चाहियें।
योग’ और ‘मेडिटेशन’ के बीच क्या अंतर है?
योग एक सम्पूर्ण प्रक्रिया व प्रणाली है जबकि मेडिटेशन या ध्यान महज एक भाग है अष्टांगिक योग प्रणाली का।
योग का अर्थ है - “मिलन”। जीव की समष्टिगत चेतना का व्यष्टिगत चेतना से एकाकार होना ही योग है।
पातंजल योगसूत्र के अनुसार - “योगश्चित्तवृत्ति निरोधः” —
अर्थात, चित्त की समस्त वृत्तियों यथा - प्रमाण-विपर्यय-विकल्प-निद्रा और स्मृति रूप समस्त वृत्तियों का पूरी तरह से निरुद्ध हो जाना ही योग है।
योग समाधि को भी कहते हैं क्योंकि यह ‘योग’ शब्द “युज् समाधौ” से निष्पन्न होता है, ना कि “युजिर् योगे” संयोग अर्थ वाली युजिर धातु से।
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ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਕਮਜ਼ੋਰ ਯਾਦਦਾਸ਼ਤ ਤੋਂ ਛੁਟਕਾਰਾ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ, ਤਾਂ ਭਾਦ੍ਰਸਣਾ ਕਰੋ
ਭਾਵੇਂ ਤੁਸੀਂ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ, ਤੁਸੀਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਯਾਦ ਕਰਨ ਵਿਚ ਅਸਮਰੱਥ ਹੋ. ਜੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵੀ ਇਹ ਸਮੱਸਿਆ ਹੈ, ਤਾਂ ਹਰ ਰੋਜ ਆਪਣੇ ਚਲ ਰਹੇ ਰੁਕਾਵਟ ਵਿਚੋਂ ਥੋੜਾ ਸਮਾਂ ਕੱ spendੋ ਅਤੇ ਭਦਰਸਨਾ ਕਰੋ. ਕਮਜ਼ੋਰ ਯਾਦਦਾਸ਼ਤ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੌਲੀ ਹੌਲੀ ਖਤਮ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ.
ਭਦਰਸਾਨਾ
कमजोर याददाश्त से छुटकारा चाहिए तो करे भद्रासन
आप चाहकर भी आप बातों को याद नहीं रख पाते। यदि आपके साथ भी यह समस्या है तो रोजाना कुछ समय अपनी भागदौड़ भरी दिनचर्या में से थोड़ा वक्त निकालकर भद्रासन करें। कमजोर याददाश्त की समस्या धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी।
भद्रासन
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हाइट एवं परफेक्ट पर्सनालिटी बनाने के लिए ताड़ासन
परफेक्ट पर्सनालिटी पाने के लिये लंबी हाइट होनी बहुत जरुरी है। जिन लोगों की हाइट कम होती है वे लोग अपने पर्सनालिटी में कुछ कमी सी महसूस करते हैं। लंबाई कम होने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण रोल आनुवांशिक गुण अदा करते हैं। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपकी हाइट बढ जाए तो इसमें योग आपकी निश्चित रूप से सहायता कर सकता है। माना जाता है कि प्रोटिन युक्त भोजन करने से व नियमित रूप से दस मिनट ताडा़सन करने से हाइट बढती है। लेकिन यह आसन २३ साल की उम्र तक ही हाइट बढाने में मददगार है। ताड़ासन की खासियत यह है कि बच्चों की लंबाई निश्चित रूप से बढ़ती है
मन की शांति और सुकून के लिये करें सुखासन
अगर आप योगा करते हैं तो आपको पता होगा कि सुखासन करना कितना आसान होता है। जो लोग सुखासन करते हैं उनका मन एक दम शांत हो जाता है। चित्त की एकाग्रता से धारणा सिद्ध होती है। यह योग श्वास प्रश्वास और ध्यान पर आधारित है। यह योगा की सबसे आसान विधि है इसलिए इसे सुखासन के नाम से जानते हैं। इसको करने से घुटने 90 डिग्री मुडते हैं, जिससे उन्हें दर्द से आराम मिलता है। यह आसान प्रणायाम करने से पहले किया जाता है। सुखासन से पैरों का रक्त-संचार कम हो जाता है और अतिरिक्त रक्त अन्य अंगों की ओर संचारित होने लगता है जिससे उनमें क्रियाशीलता बढ़ती है। यह तनाव हटाकर चित्त को एकाग्र कर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।
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विपरीत करनी आसन से पाइये मां बनने का सुख
वे महिलाएं जिन्हें स्ट्रेस की वजह से बच्चा नहीं हो पा रहा है, उनके लिये विपरीत करनी मुद्रा बहुत ही फायदेमंद है। विपरीत करनी योग मुद्रा करने से मानसिक तनाव दूर होता है। इस करने में मन को शांति और मन स्थिर हो जाता है। इस योग मुद्रा को करते समय मन को शांत रखें और चाहें तो हल्का सा म्यूजिक चला लें। यह मुद्रा करने से शरीर का हार्मोन प्राकृतिक रूप से बैलेंस होता है। इसके अलावा भी पैरों में थकान एवं दर्द की स्थिति में इस योग से लाभ होता है। यह आसन रक्त संचार को सुचारू बनाता है। अनिद्रा सम्बनधी रोग में इस आसन का अभ्यास लाभकारी होता है। गर्दन और कंधों में मौजूद तनाव को दूर करने के लिए भी यह व
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बुजुर्गों के लिए योगासन- भुजंगासन
भुजंगासन करने से बुजुर्गों के शरीर में रक्त प्रवाह सुधरता है और उनकी कमर और कंधों की मसल्स को मजबूती मिलती है। इससे वह काफी ऊर्जावान महसूस करते हैं। इसे करने के लिए जमीन पर पेट के बल लेट जाएं। अब तलवों को रखते हुए एड़ियों को मिलाकर रखें। अब हथेलियों को कंधों के ठीक नीचे रखें और कोहनियों को अपने शरीर के पास रखें। अब गहरी सांस लें और अपनी छाती और सिर को ऊपर की तरफ उठाएं। जितना हो सके अपनी सिर और छाती को पीछे की तरफ खींचे। इसी अवस्था में कुछ सेकेंड रहने की कोशिश करें और फिर सांस छोड़ते हुए आराम से पिछली अवस्था में लौट आएं।
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“योग विज्ञान है” – ओशो
योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है।
जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।
नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।