आँखों की रोशनी बढ़ाने के लिए रिलैक्सेशन एक्सरसाइज

आप आँखों का भारीपन और थकान को दूर करने के लिए रिलैक्सेशन एक्सरसाइज को करें। इसे करने के लिए आप सबसे पहले दोनों हाथों को आपस में रगड़ें, इससे आपके हाथ थोड़े गर्म हो जायेंगें। अब हाथों को तुरंत ही अपनी आँखों पर कुछ सेकंड के लिए रखें। फिर हाथों को हटाकर धीरे धीरे ऑंखें खोलें। इस एक्सरसाइज को 2-3 बार करें।

चश्मा हटाने के लिए एक्सरसाइज फिगर

यदि आपको आँखों की रोशनी कम होने की वजह से चश्मा लग गया है तो इसे हटाने में व्यायाम आपकी सहायता कर सकता है।

इस एक्सरसाइज को करने के लिए आप सबसे पहले एक स्थान पर सीधे बैठ जाएं।
अब अपने सामने लगभग 10 फीट की दूरी पर एक बिंदु चुनें।
इस बिंदु पर अपना ध्यान केंद्रित करें।
अब अपनी आँखों से उन स्थान पर एक काल्पनिक आठ की आकृति बनाएं।
मन में कल्पना करने की यहाँ पर 8 बना हुआ है और आपको इस ∞ की लाइन पर अपनी आँखों को घुमाना है।
इस प्रक्रिया को 30 सेकंड के लिए करे रखें, फिर थोड़ी देर कहीं ओर देखें।
 

वॉल प्रेस एक्सरसाइज के फायदे स्थिरता बढ़ाने में

स्थिरता बनाने में वॉल प्रेस एक्सरसाइज बहुत ही फायदेमंद होती है। यह पुश अप एक्सरसाइज की तरह ही फायदेमंद है। जब आप वॉल प्रेस करने का प्रयास करते हैं तो ये नसें आपके शरीर को धकेलने और रोकने का प्रयास करती हैं, जो आपके संतुलन और गति को प्रभावित करता है।

मुगदर व्यायाम करने का तरीका

इंडियन क्लब ट्रेनिंग यानि मुगदर व्यायाम के कई वेरियंट है, इसे अलग अलग प्रकार से किया जा सकता है। मुदगल एक्सरसाइज को करने केलिए आप निम्न स्टेप्स को फॉलो करें।

  • मुगदर व्यायाम करने के लिए आप सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और दोनों हाथों में मुगदर को पकड़ लें।
  • अब सबसे पहले अपने दाएं हाथ के मुगदल को सिर के ऊपर से घुमाकर नीचे लगाएं।
  • फिर अब अपने बाएं हाथ के मुगदल को सिर के ऊपर से घुमाकर नीचे लगाएं।
  • यह क्रिया आपको बारी-बारी से दोनों हाथों से करनी है।
  • शुरूआत में आप कम वजन वाले मुगदल से करें. फिर अनुभव होने के बाद वजन को बढ़ा सकते है।

फेस की चर्बी कम करने की एक्सरसाइज

चेहरे पर जमी अतिरिक्त चर्बी देखने में ख़राब लगती है जो आपकी सुंदरता को भी ख़राब कर देती है। फेस की चर्बी कम करने की एक्सरसाइज इससे छुटकारा पाने में आपकी मदद कर सकती है। अधिक मोटापा के कारण आपके फेस पर भी चर्बी जमा हो जाती है।


जब भी आप किसी के सामने जाते है तो देखने वाला सबसे पहले आपका फेस ही देखता है। यदि आपके चेहरे पर अतिरिक्त चर्बी जमा हो जाती है तो फेस काफी भरा भरा सा दिखाई देता है और फैट की वजह से लटक रही चिन से आप काफी मोटे लगते है।

खून को शुद्ध करने में नाड़ी शोधन प्राणायाम के फायदे

नियमित रूप से शांत वातावरण में बैठकर नाड़ी शोधन प्राणायाम का अभ्यास करने से श्वसन प्रणाली(Respiratory System) बेहतर होती है और शरीर का खून शुद्ध होता है। इसके अलावा यह प्राणायाम ब्लड में ऑक्सीजन की अच्छी तरह आपूर्ति (supply) करने में भी सहायक होता है। नाड़ी शोधन का अभ्यास करते समय गहरी श्वास लेने से कई तरह की बीमारियां दूर हो जाती हैं।

ब्रेस्ट साइज बढ़ाना चाहती हैं, तो आज से शुरू कर दें गोमुखासन

योग ब्रेस्ट साइज बढ़ाने के लिए काफी सही उपचार है। इससे किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता है। ऐसे में गोमुखासन करने से आपको फर्क जरूर दिखेगा।

लिंग मुद्रा क्या है

लिंग मुद्रा एक ऐसी मुद्रा है जिसमें हथेली को इंटरलॉक करके शरीर के भीतर विभिन्न तत्वों पर ध्यान केंद्रित करने और उनके प्रवाह को बनाए रखने में सक्षम होती है। हाथ का अंगूठा मनुष्य के शरीर में अग्नि तत्व का प्रतीक होता है। लिंग मुद्रा अग्नि तत्व को मजबूत बनाने का कार्य करती है। आमतौर पर लिंग मुद्रा को ऊष्मा (Heat ) और ऊर्जा (Energy) की मुद्रा कहा जाता है। लिंग संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ पुरुष के जननांग से है। लिंग मुद्रा शरीर की ऊष्मा ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करती है।

योनि मुद्रा करने का तरीका एवं फायदे

योनि मुद्रा पुराने समय में लोगों के जीवन का एक हिस्सा एवं दिनचर्या में शामिल थी। भारत में प्राचीन काल से ही योग और मुद्राओं का अभ्यास किया जा रहा है। मान्यताओं के अनुसार योनि मुद्रा को उस समय का स्वर्णिम काल माना जाता था। यही कारण है कि उन दिनों स्वास्थ्य प्रणाली इतनी मजबूत थी। उन दिनों जानलेवा बीमारियां जैसे कैंसर एवं एड्स नहीं था और ना ही लोग इतनी मात्रा में दवाओं का सेवन करते थे। योनि मुद्रा का अभ्यास करके लोग अपने अंदर के चक्र की कल्पना करते थे और आंतरिक आवाज को सुनते थे। इस मुद्रा का अभ्यास करने वाले लोग मानते हैं कि दांये हाथ का अधिक इस्तेमाल करने वाले लोगों को दाहिने कान से आंतरिक आव

સુપ્ત पादांगुष्ठासन

 

सुप्त पादांगुष्ठासन (સુપ્ત પાદંગુસ્થાસન), संस्कृत भाषा का शब्द है. આ ચાર શબ્દોથી મળીકર બનાવો. પહેલો शब्द सुप्त का अर्थ है लेटा हुआ या Reclined. બીજો શબ્દ છે પાદ, શબ્દોનો અર્થ છે પગ અથવા પગ.

तृतीय शब्द अंगुष्ठ का अर्थ है अंगूठा या बिग टो. આસન, કોઈ વિશેષ સ્થિતિ ઊભી થઈ, લેટને અથવા બેસીને કહ્યું. અંગ્રેજી ભાષામાં તે પોજ અથવા પોઝ કહે છે.

सुप्त पादांगुष्ठासन को अंग्रेजी में Reclined Hand to Big Toe Pose भी कहा जाता है। इस योगासन की रचना का श्रेय महान योग गुरु आचार्य बीकेएस आयंगर (B. K. S. આયંગર) को जाता है।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।