प्राण, अपान और अपानवायु मुद्रा

मुद्राओं का जीवन में बहुत महत्व है। मुद्रा दो तरह की होती है पहली जिसे आसन के रूप में किया जाता है और दूसरी हस्त मुद्राएँ होती है। मुद्राओं से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ प्राप्त किया जा सकता है। यहाँ प्रस्तुत है प्राण, अपान और अपानवायु मुद्रा की विधि और लाभ।

प्राण मुद्रा : छोटी अँगुली (चींटी या कनिष्ठा) और अनामिका (सूर्य अँगुली) दोनों को अँगूठे से स्पर्श करो। इस स्थिति में बाकी छूट गई अँगुलियों को सीधा रखने से अंग्रेजी का 'वी' बनता है।

लिंग मुद्रा के फायदे

अन्य योग क्रियाओं एवं मुद्राओं की तरह लिंग मुद्रा भी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। विशेषरुप से यह श्वसन से जुड़े विकारों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कफ, बलगम एवं गले की खराश दूर करने सहित लिंग मुद्रा के अनेकों फायदे हैं। आइये जानते हैं कुछ मुख्य फायदे के बारे में।

योग से जुड़ी सात भ्रांतियां

सद्‌गुरु: इस पूरी धरती पर ज्यादातर लोग योग को ‘आसन’ समझ बैठते हैं। योग विज्ञान ने जीवन से जुड़े तकरीबन हर पहलू के बारे में तमाम तरह की बातें उजागर की हैं, लेकिन आज दुनिया योग के सिर्फ शारीरिक पहलू को ही जानती है। जबकि योगिक पद्धति में आसनों को बहुत कम महत्व दिया गया है। दो सौ से भी अधिक योग सूत्रों में से मात्र एक सूत्र आसनों के लिए है। लेकिन किसी तरीके से यही एक सूत्र आजकलं खासी अहमियत पा रहा है।

पैरों की मांसपेशियों को बनाने के लिए करें कार्डियो एक्सरसाइज

कार्डियो एक्सरसाइज करके आप अपने शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियां बना सकते हैं। कार्डियो व्यायाम में बहुत सारी एक्सरसाइज शामिल होती है जैसे कि जंपिंग जैक्स, लंजेस, लैटरल (lateral), बर्पीज, बॉक्स कूद, ओबलिक ट्विस्ट्स (Oblique twists) आदि को करें। इन सभी व्यायाम को एक एक मिनट के लिए करे। इससे पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

अपर बॉडी को बनाने के लिए करें कर्ल्स एक्सरसाइज

घर पर अपर बॉडी को बनाने के लिए आप कर्ल्स एक्सरसाइज को कर सकते हैं, यह बहुत फायदेमंद होती है। इस व्यायाम में आपको डंबल के सामान घर की किसी भी वस्तु को उठाना होता हैं। इसके लिए आप दूध की बोतल, कोई वजनदार बुक या घरेलू डम्ब-बेल्स का इस्तेमाल करें।

बाँहों के व्यायाम में करें डिप्स

बिना जिम जाएं ऊपरी शरीर को बनाने में डिप्स एक्सरसाइज आपकी मदद कर सकती हैं, यह बहुत ही प्रभावी होती है। डिप्स एक्सरसाइज करने के लिए आपको एक मजबूत ब्रेंच या मेज की जरूरत होगी, जिसकी ऊंचाई लगभग एक से दो फीट हो। अब इस ब्रेंच को पीछ की ओर रख कर फर्श पर बैठ जाएँ। अपने दोनों हाथों को पीछे ले जाकर इन ब्रेंच पर रखें। अब हाथों पर वजन को डालते हुए फर्श से हिप्स को ऊपर उठाएं और फिर नीचे लायें। इस क्रिया को 15-20 बार करें।

सीना बनाने के लिए करें पुश अप एक्सरसाइज

पुश अप एक्सरसाइज करना बहुत आसान है और यह शरीर के ऊपरी भाग को बनाने मदद करता हैं। पुश अप करने के लिए आप फर्श पर पेट के बल लेट जाएं और अपने दोनों हाथों की हथेलियों को फर्श पर अपनी छाती के पास में रखें।अब दोनों हाथों और पैर की उंगलियों पर वजन डालते हुए शरीर को ऊपर करें और फिर से हाथ की कोहनी को मोड़ें और शरीर को नीचे करें। यह क्रिया आप बार-बार दोहराहएं और इसके आप 3 सेट पूरा करें।

डांसिंग एक्सरसाइज के फायदे स्ट्रेस कम करने में

तनाव को कम करने में डांस बहुत ही फायदेमंद होता हैं। डांस करना भी एक प्रकार की एक्सरसाइज है जो आपके मेंटल स्ट्रेस को कम करने में मदद करता है। डांसिंग एक्सरसाइज मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार से लाभकारी होती है, इसे करने से डिमेंशिया और दिलकी धड़कन बढ़ाने की संभावना कम होती है। इसलिए आप टेंशन को कम करने के लिए अपने मन पसंद के गानों को चला कर उन पर डांस करें।

स्ट्रेस कम करने के लिए वॉक एक्सरसाइज

वॉक एक्सरसाइज करके आसानी से डिप्रेशन या तनाव जैसे लक्षण को कम करके मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं। लेकिन अवसाद और तनाव से बचने के लिए मॉर्निंग वॉक करना एक अच्‍छा उपाय है। सुबह की सैर करने के बाद आपको कम तनाव का अनुभव होगा। क्‍योंकि इस दौरान ताजी ऑक्‍सीजन आपके मस्तिष्‍क स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बनाने में मदद करती है। इसलिए स्ट्रेस को कम करने के सभी को हर रोज सुबह की वॉकिंग एक्सरसाइज करना चाहिए।

शरीर को मजबूत कैसे बनाएं में खाएं फलियां

सेम की कई अलग-अलग किस्में शरीर को मजबूत बनाने के लिए आहार का हिस्सा हो सकती हैं।

लोकप्रिय किस्में, जैसे कि काली, पिंटो और किडनी बीन्स की पकी हुई फलियों में लगभग 15 ग्राम प्रोटीन प्रति कप (लगभग 172 ग्राम) होता हैं। वे मैग्नीशियम, फास्फोरस और लोहे में उच्च होने के अलावा, फाइबर और बी विटामिन के उत्कृष्ट स्रोत हैं।

इन कारणों से, बीन्स आपके आहार में जोड़ने के लिए पौधे-आधारित प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत हैं। ये दीर्घकालिक स्वास्थ्य और बीमारी की रोकथाम में भूमिका निभा सकते हैं। और आपके शरीर को अधिक ताकतवर बना सकतीं हैं।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।