शुरुआती जॉगिंग के लिए महत्वपूर्ण टिप्स
जॉगिंग करते समय अपनी सांस को अपने मार्गदर्शक की तरह इस्तेमाल करें।
आपको जॉगिंग करते समय बातचीत करने में सक्षम होना चाहिए, और आपकी सांस भारी नहीं होनी चाहिए।
प्रति मील अपनी गति के बारे में चिंता न करें – यदि आप “टॉक टेस्ट” पास कर सकते हैं और हवा के लिए हांफे बिना पूरे वाक्यों में बात कर सकते हैं, तो आप सही गति से आगे बढ़ रहे हैं।
सुनिश्चित करें कि आप अपनी नाक और मुंह से सांस ले रहे हैं, और अपने मुंह से सांस छोड़ रहे हैं। उचित साँस लेना और गहरी पेट की साँस लेना आपको पेट के क्षेत्र ऐंठन से बचने में मदद करेगा।
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दौड़ने के नियम में जॉगिंग पोस्चर भी है ज़रूरी
अधिकांस लोग जानते है कि धीरज और दृढ़ संकल्प के साथ आप लंबी दूरी तय कर सकते है। जॉगिंग का अधिकतम लाभ लेने के लिए शरीर की सही स्थिति भी होना बहुत ही आवश्यक होता हैं। जॉगिंग करते समय ध्यान रखें की आपका शरीर सीधा रहें। अपने शरीर का संतुलन बनायें और वजन को पंजे के बीच में ही रखें। आपको वजन केवल एड़ी और उँगलियों पर नहीं रखना हैं।
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जॉगिंग शुरू करने से पहले चलें
चलना एक प्रकार का वार्म अप होता हैं इसलिए आप जॉगिंग करने से पहले थोड़ी देर के लिए कुछ दूरी पैदल चल कर तय करें। यह खासकर उन लोगों के लिए है जो लोग अभी रनिंग की शुरुआत कर रहें है। इसे अलावा सप्ताह में 3-4 बार और एक दिन में 15-20 मिनट के लिए चलना शुरू करें। और धीरे धीरे चलने की गति बढ़ाएं, जब तक कि अगला कदम जॉगिंग न बन जाए।
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जॉगिंग शुरू करने का सही तरीका
जॉगिंग शुरू करने के नीचे कुछ तरीके दियें जा रहें हैं जिनको करके आप इसे आसानी से और सही ढंग से कर सकते हैं।
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जॉगिंग शुरू करने की धीमी शुरुआत करें
जॉगिंग को धीमी-धीमी गति से करना शुरू करें। यह कहा जाता है कि रनिंग करने से पहले कम से कम 5 मिनिट के लिए पैदल चलें। फिर 2 मिनिट के लिए जॉगिंग करें, थोड़ा से रुके और फिर अपनी जॉगिंग को करना प्रारंभ कर दें। यह आपके शरीर को दौड़ने के लिए तैयार करता है और आप अच्छे से जॉगिंग कर पाते हैं।
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जॉगिंग शुरू करने की तैयारी
रनिंग के लिए बहुत कम उपकरणों की आवश्यकता होती है, लेकिन इसके लिए अच्छे रनिंग शूज आवश्यक है। जॉगिंग के दौरान आपके जोड़ों और मांसपेशियों पर आपके शरीर के दबाव का तीन से पांच गुना अधिक होता है, जो आपके निचले शरीर पर काफी तनाव बढ़ाता है। गलत जूतों के साथ दौड़ना (यानी किसी भी प्रकार का जूता जो दौड़ने के लिए नहीं बनाया गया है) चोट लगने और जोड़ों में दर्द का कारण बन सकता है। इसलिए जॉगिंग के लिए सही शूज का चयन करें।
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ज़रूरत से अधिक जॉगिंग ना करें
किसी भी कार्य को एक निश्चित मात्रा में करना चाहिए। क्योंकि कोई भी कार्य जो हमारे लिए लाभदायक होता है उसे अत्यधिक करने से वह हमारे लिए हानिकारक हो सकता है। उसी प्रकार जॉगिंग को जरूरत से ज्यादा ना करें क्योंकि वह हमारे स्वस्थ के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
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जॉगिंग की शुरुआत कैसे करे सही तरीका
यदि आप एक बिगिनर है और जॉगिंग करने की शुरुआत कर रहें है तो आपके एक अच्छे रनर बनने के लिए आठ सप्ताह के लिए 30 मिनिट की जॉगिंग रूटीन अपनानी है।
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शरीर की ऊर्जा बढ़ाने के लिए लिंग मुद्रा के फायदे
जब शरीर और मन काम करते हुए थक जाता है और व्यक्ति को आत्मविश्वास में कमी महसूस होने लगती है, ऐसे समय में लिंग मुद्रा का अभ्यास करने से शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है और खोया हुआ आत्मविश्वास वापस लौट आता है। यह मुद्रा शरीर एवं आत्मा दोनों को ऊर्जा प्रदान करने के साथ ही शुद्ध करने का भी कार्य करती है।
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लिंग मुद्रा के फायदे ब्लड प्रेशर में
उम्र बढ़ने के साथ ही रक्तचाप की समस्या से भी व्यक्ति ग्रसित होने लगता है। ऐसी स्थिति में लिंग मुद्रा का नियमित रुप से अभ्यास करना बेहद फायदेमंद होता है। यह मुद्रा करने से रक्तचाप नियंत्रित रहता है और हृदय से जुड़ी बीमारियों का खतरा नहीं रहता है और व्यक्ति की सेहत अच्छी होती है।
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“योग विज्ञान है” – ओशो
योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है।
जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।
नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।