निम्न रक्तचाप के लिए योग भस्त्रिका प्राणायाम

निम्न रक्तचाप से पीड़ित लोगों के लिए भस्त्रिका प्राणायाम एक प्रभावी श्वास योग है। इसके अभ्यास से शरीर को सभी विषाक्त पदार्थों से छुटकारा पाने में मदद मिलती है। फेफड़े मजबूत बनते हैं और आप भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास करके शरीर को ऑक्सीजन की प्रचुर आपूर्ति प्राप्त करते हैं। योग करने से पहले इसका अभ्यास करें। इस आसन को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को जमीन पर बिछा के पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। अपनी आँखों को बंद कर लें और अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। कुछ देर ध्यान की मुद्रा में बैठे और तर्जनी को अंगूठे से मिलाएं।

पीठ दर्द को जड़ से खतम करे मार्जारी आसन

मार्जारी आसन एक बहुत ही सरल आसन है जो कि खासतौर पर रीढ़ को लचीला बनाने के लिये किया जाता है। रीढ़ हमारे शरीर का स्‍तंभ होता है, अगर यह ठीक नहीं रहेगा तो आप ठीक से काम नहीं कर पाएंगे। मार्जारी आसन करने में बहुत ही आसान है। अगर आपको पीठ दर्द रहता है तो आप के लिये यह मार्जारी आसन बहुत लाभकारी होगा। पीठ दर्द की वजह से शरीर के अन्‍य भाग जैसे, कंधों में दर्द, मांसपेशियों में लोच की कमी, वजन का घटना, गर्दन में दर्द, कमजोरी और कभी-कभी सिरदर्द की भी शिकायत हो सकती है। मार्जारी आसन महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभदायक है। गर्भावस्था के दौरान पहले तीन महीने तक मार्जारी आसन का अभ्यास किया जा सकता है। यह

नाभि का टलना दूर करता है सुप्तवज्रासन

सुप्त का अर्थ होता है सोया हुआ अर्थात वज्रासन की स्थिति में सोया हुआ। इस आसन में पीठ के बल लेटना पड़ता है, इसिलिए इस आसन को सुप्त-वज्रासन कहते है, जबकि वज्रासन बैठकर किया जाता है

विधिः 

हरिकासन पेट की समस्या के लिए रामबाण

असंतुलित खाना और असंयमित दिनचर्या पेट से जुड़ी हर समस्या की मुख्य वजह है। कब्ज, गैस व एसीडिटी पेट से जुड़ी कुछ ऐसी प्राब्लम्स हैं जो हर उम्र के लोगों में देखी जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए योग सबसे अच्छा और आसान तरीका है। हरिकासन के लिए थोड़ा समय निकाले आपको यह आसन हमेशा के लिए इस समस्या से निजात दिला सकता है। पेट साफ  रखने के लिए हरिकासन काफी फायदेमंद है। इस आसन को पद्मासन की ही तरह खाने के बाद भी किया जा सकता है। हरिकासन प्रार्थना व ध्यान के लिए भी लाभकारी है। इस आसन में काफी समय तक बैठा जा सकता है। इसलिए अधिकांश ऋषि-मुनि, योगी आदि इस आसन की मुद्रा में ही बैठते थे।

लाभदायक है त्रिकोणासन

शरीर का बाह्य रूप से ही नहीं भीतरी रूप से भी ठोस होना मौजूदा जीवनशैली की जरूरत है। ऐसे में सिर्फ खानपान पर आश्रित रहना सही नहीं है। जरूरत इससे कुछ ज्यादा की है। त्रिकोणासन इसमें हमारी मदद कर सकता है। सामान्यतः त्रिकोणासन चैड़े सीने की चाह रखने वालों के लिए लाभकर है। लेकिन त्रिकोणासन के तिगुने लाभ हैं। यह शारीरिक रूप से फिट रहने की चाह रखने वालों को अवश्य करना चाहिए। पेट, कूल्हे और कमर के बेहतरीन शेप के लिए तो त्रिकोणासन से बेहतर और कुछ है ही नहीं। यह आसन सिर्फ कुछ शारीरिक अंगों पर ही कारगर नहीं है वरन हमारी मांसपेशियों के लिए भी त्रिकोणासन सहायक है। कहने का मतलब यह है त्रिकोणासन हमारे संपूर

कटिचक्रासन : डाइबिटीज को रखें कंट्रोल में हमेशा

वर्तमान समय में हर उम्र वाले लोगों में डाइबिटीज के रोगी देखे जा सकते हैं। डाइबिटीज एक ऐसा रोग है जो अगर एक बार इंसान को लग जाए तो उसे जिंदगी भर दवाईयां खानी पड़ती है। अगर आपके साथ भी यही समस्या है तो योग के कटिचक्रासन के माध्यम से आप इस पर काबू पा सकते हैं।

भूचरी आसन दिमाग तेज रखने और याददाश्त बढ़ाने के ल‌िए

काम में ध्यान न लगे या फिर पढ़ी हुई चीजें न याद रहें, याददाश्त और दिमाग से जुड़ी छोटी-छोटी समस्याओं का पुख्ता उपचार योग में मौजूद है।

ऐसे में योग की भूचरी मुद्रा का नियमित अभ्यास न सिर्फ याददाश्त बढ़ाने में मदद करता है बल्कि यह मानसिक शांति देता है और फोकस बढ़ाता है। साथ ही, इसके नियमित अभ्यास से बहुत अधिक गुस्से पर काबू पाया जा सकता है।

जानिए, इस मुद्रा की सही विधि और आप खुद आजमाकर देखिए।

– इसे करने के लिए सुखासन में यानी पालथी मारकर सीधे बैठें और कमर सीधी रखें।

– अब हथे‌लियों को ऊपर की ओर करके अपनी जांघों या घुटनों पर रखें। आराम महसूस करें।

पवनमुक्‍तासन पेट में गैस की समस्‍या में रामबाण

लगातार बैठ कर काम करने और खाना-पानी लेने में जरूरी सावधानी नहीं बरते जाने के कारण गैस की समस्या आज आम हो गई है। इससे बचाव जरूरी है और कुछ यौगिक क्रियाओं का अभ्यास भी।

आजकल के मशीनी युग की भागदौड़ से गैस की शिकायत एक आम समस्या बन गई है। हालांकि गांवों में भी इस समस्या से पीडित लोगों की संख्या कम नहीं, लेकिन शहर में रहने वाला प्राय: हर व्यक्ति गैस की परेशानी से पीडित है।

सूर्य मुद्रा करने के लाभ कोलेस्ट्रोल कम करें

कोलेस्ट्रोल को कम करने के लिए सूर्य मुद्रा बहुत ही अच्छी मुद्रा मानी जाती हैं,  यह आपके शरीर में चयापचय (Metabolism) को तेज करती है। जिससे कोलेस्ट्रोल को कम करने मदद मिलती हैं यह वसा को भी कम कर देती हैं।

लिंग मुद्रा करते समय बरतें सावधानियां

इस मुद्रा का अभ्यास आप चाहे किसी भी समय करें लेकिन यह ध्यान रखें कि अधिक देर तक अभ्यास करने से अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है।

पित्त दोष से ग्रसित लोगों को लिंग मुद्रा का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
उच्च रक्तचाप से से पीड़ित लोगों को यह मुद्रा नहीं करनी चाहिए।
अगर किसी व्यक्ति के पेट में ट्यूमर हो तो उसे लिंग मुद्रा नहीं करनी चाहिए।
लिंग मुद्रा का अभ्यास करते समय हमेशा बायां अंगूठा ऊपर उठाना चाहिए।
 

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।