कंधों एवं भुजाओं को मजबूत बनाने में शीर्षासन करने के फायदे
जब सिर के बल खड़े होकर आप शीर्षासन का अभ्यास करते हैं तो इससे भुजाएं और कंधों में मजबूती आती है। इसके अलावा सिर, गर्दन एवं पीठ की मांसपेशियां भी मजबूत होती है। यह आसन सिर के ऊपरी हिस्से को टोन करने और मजबूत बनाने में मदद करता है।
शीर्षासन के लाभ सिर में खून का प्रवाह बढ़ाने में
शीर्षासन एक ऐसा योग मुद्रा है जिसका प्रतिदिन अभ्यास करने से सिर में सही तरीके से खून का प्रवाह होता है। यह आसन सिर की त्वचा में अतिरिक्त पोषण और ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करता है और हेयर फॉलिकल को भी पोषण प्रदान करता है जिससे सिर दर्द दूर होता है बाल झड़ने की समस्या खत्म हो जाती है।
15 साल के बच्चों के लिए डाइट प्लान का पांचवा दिन
स्नैक में- एक होल ग्रेन टोस्ट, एक खीरा और एक गिलास फ्रेश जूस पीने के लिए दें।
दोपहर के भोजन में- उबली हुई सब्जियों के साथ पांच औंस (142 ग्राम) मछली और एक कप बीन्स सर्व करें।
ईवनिंग स्नैक में- एक कप दही के साथ फलों की स्मूदी दें।
रात के खाने में – चीज और वेजिटेबल ऑमलेट देना अच्छा विकल्प है।
क्या सुबह जिम जाना शाम मे जाने से बेहतर है?
मुझे लगता है शाम का समय बेहतर होगा क्योंकि सुबह सुबह चाहे जिम जाना अच्छा हो पर जल्दी जल्दी ऑफिस/स्कूल आदि काम पर जाने का जो मानसिक तनाव होगा वो शारीरिक मज़बूती से कही ज्यादा गुना होगा। ऐसा मेरा मानना है और दूसरा मेरे हसाब से सुबह सुबह meditaion करना अर्थात ध्यान करना उस ईश्वर का जिसने आपको जीवन दिया ज्यादा बेहतर होगा मानसिक स्वास्थ्य के लिए। शुक्रिया, सवाल पूछने के लिए।
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आंखों के लिए फायदेमंद शीर्षासन
जब आप सिर के बल उल्टा होकर शरीर का संतुलन बनाते हैं तो सिर में अतिरिक्त ऑक्सीजन, पोषक पदार्थ युक्त खून पहुंचता है जो कि आंखों की कोशिकाओं को भी मजबूत बनाने में मदद करता है। इसलिए आंखों की विभिन्न बीमारियों से छुटकारा पाने के लिए शीर्षासन फायदेमंद माना जाता है।
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शीर्षासन के फायदे एकाग्रता बढ़ाने में
जब आप जमीन पर उल्टा होकर शीर्षासन का अभ्यास करते हैं तो मस्तिष्क में खून का प्रवाह (blood flow) बढ़ता है, जिसके कारण मस्तिष्क की क्रियाएं बेहतर होती हैं और एकाग्रता बढ़ती है। इसके अलावा शीर्षासन करने से दिमाग और यादाश्त तेज होती है।
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मोटी जांघ को पतला करने के लिए साइड लंज व्यायाम
साइड लंज व्यायाम आंतरिक जांघों के लिए बहुत ही प्रभावी होता है। साइड लंज एक्सरसाइज करने के लिए आप सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं। अब अपने दोनों पैरों के बीच में कम से कम 2 फुट का दूरी रखें। अपने दोनों हाथों को सामने की ओर लायें और कोहनी से मोड़ कर दोनों हथेलियों को आपस में मिला लें। अब दाएं पैर को घुटने से मोड़े और बाएं पैर को सीधा रखें। फिर से अपने दायं पैर को सीधा करके बाएं पैर के पास ले आयें। अब फिर से बाएं पैर को दाएं पैर से 2 फुट की दूरी पर रखें और पूरी क्रिया दूसरे पैर से दोहराहएं।
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शीर्षासन के फायदे
शीर्षासन एक ऐसा आसन है जिसका प्रतिदिन खाली पेट अभ्यास करने से शरीर के विभिन्न विकार दूर हो जाते हैं। यह आसन सिरदर्द की समस्या, नींद की समस्या, लिवर और किडनी के रोगों को दूर करने के साथ ही शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसके अलावा भी इस आसन के विभिन्न फायदे हैं। आइये जानते हैं उन फायदों के बारे में।
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शीर्षासन करने का तरीका
शीर्षासन को बहुत सामान्य और बेहद आसान आसन माना जाता है लेकिन यह उतना ही कठिन भी होता है। इस आसन का अभ्यास करने के लिए जमीन पर सिर टिकाकर पूरे शरीर का संतुलन बनाने आना चाहिए अन्यथा आप इसका अभ्यास नहीं कर पाएंगे। आइये जानते हैं शीर्षासन करने का सही तरीका क्या है।
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जांघ की चर्बी कैसे कम करें के लिए लेग स्विंग व्यायाम
लेग स्विंग व्यायाम थाई को पतला करने के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है। यह व्यायाम आपकी बाहरी जांघों और आपके तिरछेपन को लक्षित करता है। इसे करने लिए आप सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरो को पास-पास रखें। अब अपने दाएं पैरों को आगे की ओर अधिकतम ऊंचाई तक स्विंग करें। यदि आपको लेग स्विंग करते समय संतुलन बनाने में कठिनाई हो रही है तो आप किसी कुर्सी का सहारा ले सकते है। ध्यान रखें कि जब आप पैर को स्विंग करे तो पैर मुड़ना नहीं चाहिए। अब यही पूरी क्रिया अपने बाएं पैर से भी करें। अपनी क्षमता के अनुसार आप दोनों पैरों से लेग स्विंग बराबर संख्या में करें। यह व्यायाम आपकी जांघों को पतला करने में मदद क
“योग विज्ञान है” – ओशो
योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है।
जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।
नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।