योग की परिभाषा

योग संतुलित तरीके से एक व्यक्ति में निहित शक्ति में सुधार या उसका विकास करने का शास्त्र है। यह पूर्ण आत्मानुभूति पाने के लिए इच्छुक मनुष्यों के लिए साधन उपलब्ध कराता है। संस्कृत शब्द योग का शाब्दिक अर्थ 'योक' है। अतः योग को भगवान की सार्वभौमिक भावना के साथ व्यक्तिगत आत्मा को एकजुट करने के एक साधन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। महर्षि पतंजलि के अनुसार, योग मन के संशोधनों का दमन है।

तंदुरुस्ती के बारे में कुछ मायने और जॉंच

फिटनेस या तंदुरुस्ती यह अब जीवन का एक नया मंत्र है। इसके बारे में अपने परिवार और मित्रों में जागृती करे। लेकिन पहले आप स्वयं फिट रहने की जरुरत है। तंदुरुस्ती से अनेक बीमारियाँ टलती है और जीवनका सही आनंद भी इसी से मिलता है। बचपन से इसका चस्का लगना चाहिए। आप स्वयं सोचे की आप फिट या तंदुरुस्त है या नहीं। उम्र और कामकाज के अनुरुप फिटनेस के मायने बदलते है। हर एक खेल के लिए फिटनेस की अलग जरूरतें होती है। फिटनेस के लिए हमको अलग अलग व्यायाम जरुरी है। आमतौर पर ऐसे व्यायाम के लिए शरीर में सिंपथॅटीक तंत्रिका तंत्र कृतीशील होती है। इसके चलते एक मस्ती का अनुभव होता है।

 

योगअभ्यास के लिए सामान्य दिशानिर्देश

योगाभ्यास करते समय योग के अभ्यासी को नीचे दिए गए दिशा निर्देशों एवं सिद्धांतों का पालन अवश्य करना चाहिए :

योग से अवसाद का निदान

बढ़ती अवसाद की बीमारी

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के विश्‍व मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य सर्वे 2011 पर आधारित एक अध्‍ययन के अनुसार विश्‍व स्‍तर पर भारत में अवसाद की दर सबसे ज्‍यादा है। अधिक चिंताजनक स्थिति यह है कि सभी आयु के लोग, किशोर से लेकर प्रौढ़ तक, अवसाद से ग्रस्‍त हो रहे हैं। यह सभी आर्थिक पृष्‍ठभूमि वाले लोगों को प्रभावित कर रहा है। चाहे एक अभावग्रस्‍त व्‍यक्ति जो एक शाम के भोजन के लिए जद्दोजहद कर रहा है या एक अमीर व्‍यक्ति जो विला‍सितापूर्ण जीवन व्‍यतीत कर रहा है। इससे भी चिंताजनक बात यह है कि  अवसाद ग्रस्‍त व्‍यक्ति भावनात्‍मक रूप से कमजोर मानसिक स्थिति में अपना जीवन ही समाप्

योग करें,हृदय-रोग से मुक्त रहें

आज की लाइफ स्टाइल में अपनी सेहत का खयाल रखने के लिए भी हम पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते। व्यस्त दिनचर्या का असर धीरे-धीरे हमारे दिल पर भी पड़ने लगता है जिससे बाद में बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है। अगर योग का थोड़ा सहयोग लें तो हम अपने दिल का खयाल रख सकते हैं। 

शरीर को मजबूत कैसे बनाएं में खाएं शकरकंद

व्‍यस्‍त जीवन और अधिक परिश्रम के कारण शरीर में कमजोरी आना सामान्‍य है। लेकिन इस कमजोरी को दूर करने और शरीर को मजबूत बनाने के लिए आप शकरकंद का सेवन कर सकते हैं। शकरकंद में बीटा-कैरोटीन, विटामिन सी, मैंगनीज आदि के साथ ही अन्‍य खनिज पदार्थ उच्‍च मात्रा में होते हैं। शकरकंद में फाइबर के साथ ही स्‍टार्चयुक्‍त कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं जो मांसपेशियों की क्षतिग्रस्‍त कोशिकाओं की मरम्‍मत करने के लिए प्रोटीन उत्‍प्रेरक के रूप में सहायक होते हैं। अधिक परिश्रम और नियमित व्‍यायाम करने वाले लोगों को अपने ऊर्जा स्‍तर को उच्‍च रखने की आवश्‍यकता होती है। यदि आप भी अपने शरीर का उचित वजन और शक्तिशाली शरीर च

शरीर को बलवान बनाना है तो खाएं साल्‍मन

साल्‍मन मछली का नियमित सेवन मांसपेशियों के निर्माण और समग्र स्‍वास्‍थ्‍य के लिए अच्‍छा उपाय है। साल्‍मन मछली की लगभग 85 ग्राम मात्रा का सेवन करने पर 17 ग्राम प्रोटीन, 2 ग्राम ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन B सहित कई महत्‍वपूर्ण विटामिन प्राप्‍त होते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड मांसपेशियों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत ही आवश्‍यक और फायदेमंद घटक है। जिसके कारण नियमित रूप से साल्मन मछली का सेवन करना मांसपेशियों सहित आपके शरीर की ताकत बढ़ाने में सहायक होता है।

शरीर मजबूत बनाने के उपाय काले

जिन लोगों को शारीरिक कमजोरी का अनुभव हो रहा है उन्हें अपने आहार में कुछ परिवर्तन करने चाहिए। काले भी एक खाद्य सब्‍जी है जिसे पावरहाउस कहा जाता है। काले में मैग्नीशियम की उच्‍च मात्रा होती है। मैग्‍नीशियम शरीर में ऊर्जा के स्‍तर को बढ़ाने में सहायक होता है। आप भी आपनी शारीरिक कमजोरी और थकान संबंधी समस्‍याओं को दूर करने के लिए काले को अपने नियमित आहार में शामिल कर सकते हैं। इसलिए शरीर को ताकतवर बनाने के आसान तरीके में काले को शामिल किया जा सकता है। काले को आप सलाद के साथ या अन्‍य स्‍वादिष्‍ट व्‍यंजनों के रूप से उपभोग कर सकते हैं।

ताकतवर बनने के घरेलू उपाय भांग के बीज

भांग के बीजों में ओमेगा-3 फैटी एसिड की अच्‍छी मात्रा होती है। स्‍वस्‍थ वसा होने के कारण नियमित रूप से भांग के बीजों की बहुत ही कम मात्रा का सेवन करना शरीर के लिए लाभकारी होता है। यह लंबे समय तक ऊर्जा प्राप्‍त करने का सबसे अच्‍छा तरीका है। आप इन्‍हें सलाद, स्‍मूदी और अन्‍य खाद्य पदार्थों के साथ मिलाकर सेवन कर सकते हैं। हालांकि भांग एक नशीला पदार्थ होता है। इसलिए इन बीजों का बहुत ही कम मात्रा में सेवन किया जाना चाहिए। साथ ही आपको इनका सेवन करने से पहले अपने डॉक्‍टर से सलाह लेना आवश्‍यक है।

जॉगिंग की शुरूआत करने के पहले सप्ताह में

जॉगिंग की शुरूआत करने के लिए पहले आप 6 मिनट तक चलें, फिर धीरे-धीरे 1 मिनट के लिए जॉगिंग करें। और दोबारा फिर 1 मिनट के लिए चलें और 1 मिनट के लिए जॉगिंग करें। जब तक आप थक नहीं जाते, तब तक इन अंतरालों को दोहराएं। शरीर का ठंडा होने के लिए 5 मिनट तक चलें।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।