મૂલ બંધ
મૂલ બંધ (basal lock)
સંસ્કૃતમાં મૂલ શબ્દનો અર્થ વૃક્ષના મુળિયાં કે કોઈ વસ્તુનો આધાર એમ કરવામાં આવે છે. પરંતુ યૌગિક રીતે મૂલ શબ્દ કરોડરજ્જુનો છેક નીચેનો ભાગ કે છેડો - એ અર્થમાં વાપરવામાં આવે છે. આ બંધ કરોડરજ્જુના સૌથી નીચેના કેન્દ્ર કે મુળ સાથે સંકળાયેલો હોવાથી એને મૂલ બંધ કહેવામાં આવે છે. અંગ્રેજીમાં એને basal lock કહેવામાં આવે છે.
- Read more about મૂલ બંધ
- 2 comments
- Log in to post comments
ત્રાટક
अथ त्राटकम् ।
निरीक्षेन्निश्चलदृशा सूक्ष्मलक्ष्यं समाहितः ।
अश्रुसम्पातपर्यन्तमाचार्यैस्त्राटकं स्मृतम् ॥३१॥
मोचनं नेत्ररोगाणां तन्दाद्रीणां कपाटकम् ।
यत्नतस्त्राटकं गोप्यं यथा हाटकपेटकम् ॥३२॥
હઠયોગપ્રદીપિકામાં ત્રાટક વિશે ઉપર પ્રમાણેનો ઉલ્લેખ કરેલો જોવા મળે છે. જેનો અર્થ સરળ ગુજરાતીમાં એમ કરી શકાય કે અનન્ય ચિત્તથી નિશ્ચલ દૃષ્ટિ વડે સૂક્ષ્મ લક્ષ્યને અશ્રુપાત થાય ત્યાં સુધી, એટલે કે આંખમાંથી આંસુ નીકળે ત્યાં સુધી નિરીક્ષણ કરવું તે ક્રિયા એટલે ત્રાટક.
- Read more about ત્રાટક
- Log in to post comments
મત્સ્યાસન
મત્યાસન : મત્સ્ય એટલે માછલી. આ આસનમાં શરીરનો આકાર માછલી જેવો થતો હોવાથી તેને મત્સ્યાસન કહેવામાં આવે છે. વળી આ આસન કરનાર વ્યક્તિ પ્લાવિની પ્રાણાયામની મદદથી પાણીમાં લાંબો સમય સુધી તરી શકે છે તેથી પણ એને મત્સ્યાસન કહેવામાં આવે છે.
મૂળ સ્થિતિ : મૂલાયમ આસન પાથરી પદ્માસનની સ્થિતિમાં બેસવું.
- Read more about મત્સ્યાસન
- Log in to post comments
क्या आपको भी सोते समय लगते हैं झटके, जानिए मतलब
एक थकान भरे दिन के बाद सुकून भरी नींद लेना हर व्यक्ति की चाहत होती है. लेकिन सोने के बाद कुछ लोगों को झटके महसूस होते हैं. क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? एक स्टडी के मुताबिक, 60 से 70 फीसदी लोगों को सोने के बाद झटके महसूस होते हैं. ये झटके उस समय महसूस होते हैं जब व्यक्ति कच्ची नींद में होता है. यानी ना तो पूरी तरह उठा हुआ होता है और ना गहरी नींद में होता है.
अलग-अलग लोग इसके पीछे अलग-अलग वजह बताते हैं. कुछ लोगों का कहना है कि उनके शरीर में तब झटके आते हैं, जब वे सपने में गिर रहे होते हैं या किसी उलझन में होते हैं.
योग और सुदर्शन क्रिया में क्या अंतर है?
योग एक आध्यात्मिक प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें शरीर, मन और आत्मा को एक साथ लाने का काम होता है। योग मे हर आसन और प्राणायाम मे साँसों का विशेष महत्व होता है
वही दूसरी तरफ अगर सुदर्शन क्रिया की बात की जाए तो यह एक सहज लयबद्ध शक्तिशाली तकनीक है जो विशिष्ट प्राकृतिक श्वांस की लयों के प्रयोग से शरीर, मन और भावनाओं को एक ताल में लाती है। अध्यात्मिक खोज है यह क्रिया को सबसे पहले लाने और सिखाने का श्रेय श्री श्री रविशंकर जी को जाता है ,यह क्रिया हमें अनंत की एक झलक देती है। सुदर्शन क्रिया स्वास्थ्य, प्रसन्नता, शांति और जीवन से परे के ज्ञान का अज्ञात रहस्य है!
- Read more about योग और सुदर्शन क्रिया में क्या अंतर है?
- Log in to post comments
फेंफड़े शुद्ध करने के योगा टिप्स
व्यक्ति प्राकृतिक श्वास लेना भूल गया है। प्रदूषण और तनाव के कारण उसकी श्वास उखड़ी-उखड़ी और मंद हो चली है। यहां प्रस्तुत है श्वास को शुद्ध करने के योगा टिप्स।
1.जहां भी प्रदूषण भरा माहौल हो वहां केवली प्राणायाम करने लगें और उस प्रदूषण भरे माहौल से बच निकलने का प्रयास करें। यदि रूमाल साथ रखते हैं तो केवली की आवश्यकता नहीं।
2.बदबू से बचें, यह उसी तरह है जिस तरह की हम खराब भोजन करने से बचते हैं। बेहतर इत्र या स्प्रे का इस्तेमाल करें। श्वासों की बदबू के लिए आयुर्वेदिक इलाज का सहारा ले सकते हैं।
- Read more about फेंफड़े शुद्ध करने के योगा टिप्स
- Log in to post comments
नौकासन सिर से ले कर पैरों तक की सभी बीमारियां दूर करे
नौका आसन यानी नाव के समान मुद्रा। पीठ एवं मेरूदंड को लचीला व मजबूत बनाये रखने के लिए नौकासन का अभ्यास काफी लाभदायक होता है। यह आसन ध्यान और आत्मबल को बढ़ाने में भी कारगर होता है। कंधों एवं कमर के लिए भी यह व्यायाम फायदेमंद है। शरीर को सुडौल बनाये रखने के लिए भी यह आसन बहुत ही लाभदायक होता है। 7 योग आसन जो आपके पेट को रखें स्वस्थ इससे पाचन क्रिया, छोटी-बड़ी आँत में लाभ मिलता है। अँगूठे से अँगुलियों तक खिंचाव होने के कारण शुद्ध रक्त तीव्र गति से प्रवाहित होता है, जिससे काया निरोगी बनी रहती है। हर्निया रोग में भी यह आसन लाभदायक माना गया है। निद्रा अधिक आती हो तो उसे नियंत्रित करने मे ये नौका आ
বিড়ালাসন
বিড়ালাসন
যোগশাস্ত্রে বর্ণিত আসন বিশেষ। বিড়ালের অঙ্গভঙ্গি অনুসারে এর নামকরণ করা হয়েছে বিড়ালাসন (বিড়াল + আসন)। এই আসনের অপর নাম হলো মার্জারাসন (মার্জার + আসন)। উল্লেখ্য, সংস্কৃত মার্জার শব্দের অর্থ হলো বিড়াল।
- Read more about বিড়ালাসন
- Log in to post comments
বিপরীত পরিবৃত্ত কোণাসন
বিপরীত পরিবৃত্ত কোণাসন
যোগশাস্ত্রে বর্ণিত আসন বিশেষ। এটি কোণাসনের একটি প্রকরণ। উর্ধ্বদিকে পা রেখে- পা ঘুরিয়ে কোণাসন তৈরি করা হয়, বলে এর এরূপ নামকরণ করা হয়েছে। শীর্ষাসনে আসীন হয়ে এই আসন করা হয়। এই কারণে একে শীর্ষাসনের একটি প্রকরণ হিসাবেও বিবেচনা করা হয়।
পদ্ধতি
১. প্রথমে শীর্ষাসনে আসীন হন
২. এরপর পা দুটো প্রসারিত করে কোণ সৃষ্টি করুন।
৩. এবার প্রসারিত পা দুটো একটু ঘুরিয়ে স্থির হন।
৪. এবার এইভাবে ১০ সেকেণ্ড অবস্থান করুন এরপর ধীরে ধীরে পা দুটো বিপরীত দিকে ঘুরান এরপর আসন ত্যাগ করে ২০ সেকেণ্ড শবাসনে বিশ্রাম নিন এরপর পুরো আসনটি আরও দুই বার করুন।
- Read more about বিপরীত পরিবৃত্ত কোণাসন
- Log in to post comments
বদ্ধ পরিবৃত্ত ভটনাশন
বদ্ধ পরিবৃত্ত ভটনাশন
যোগশাস্ত্রে বর্ণিত আসন বিশেষ। এটি ভটনাসন-এর বদ্ধ ও ঘূর্ণন রূপ।
- Read more about বদ্ধ পরিবৃত্ত ভটনাশন
- Log in to post comments
“योग विज्ञान है” – ओशो
योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है।
जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।
नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।