चक्‍की चलनासन

अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो रोज़ाना चक्की चलनासन का अभ्यास ज़रूर करें। इससे कुछ ही दिनों में फर्क नज़र आने लगेगा।

चक्‍की चलनासन करने की विधि
समतल ज़मीन पर दरी या चटाई बिछाकर बैठ जाइए।
अब अपने दोनों पैरों को आपस में सटा कर सामने की ओर फैलाएं।
फिर अपने दोनों हाथों को आपस में मिलाकर पकड़ लें।
अब दोनों हाथों को 5 से 6 बार घड़ी की दिशा में घुमाएं।
फिर कुछ देर रूककर घड़ी की विपरीत दिशा में घुमाएं।
फिर रिलैक्स हो जाएं।

पेट की चर्बी कम करने वाले 5 प्रभावी और आसान योगासन

क्या आप भी पेट की चर्बी से परेशान हैं! और डायट, एक्सर्साइज और न जाने क्या-क्या नहीं किया लेकिन कोई असर नहीं? योग में हर चीज का इलाज है। लेकिन, जल्द नतीजे के लिए यह जानना जरूरी है कौन-से योगासन हैं जो पेट की चर्बी कम करने में सबसे ज्यादा असरदार है। आजकल लोग सबसे ज़्यादा मोटापे या एक्स्ट्रा फैट के शिकार होते जा रहे हैं। यह मोटापा या एक्स्ट्रा फैट सबसे ज़्यादा हमारे पेट, जांघ और हिप्स पर नज़र आता है।

Full body yoga and stretching

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तितली आसन करने में सावधानी

अगर घुटनों में किसी प्रकार की चोट या दर्द हो तो यह आसन ना करें।
यदि आपको साइटिका या पीठ के निचले हिस्से में दर्द हो तो तितली आसान ना करें।
इस आसन को करते समय पैरों को ज्यादा जोर से नहीं हिलाएं। जितना हो सके उतना ही करे| अभ्यास करते रहने से धीरे धीरे आपके पैर अच्छे से मुड़ने लगेंगे|
ऊपर आपने जाना तितली आसन के फायदे Titli Asana in Hindi यदि आप भी उपरोक्त लाभ चाहते है तो तितली आसन का अभ्यास जरूर करे| योग शरीर व मन का विकास करता है| इसके अनेक शारीरिक और मानसिक लाभ हैं

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।