योग द्वारा जोड़ों के दर्द का उपचार

अपने दैनिक जीवन के सामान्य कामकाज को निपटाते वक्त क्या आपके घुटनों, कन्धों या कलाई में दर्द होता है? क्या आप इन जोड़ों के दर्द के कारण अपने अपनी इच्छानुसार जीवन जीने के आनंद से वंचित है? क्या आप दिन में कई कई बार दर्द निवारक दवाओं के सेवन से परेशान है?

सर्वाइकल के लिए योग : मत्स्यासन

मत्स्यासन यानी मछली की तरह किया जाने वाला आसन। यह योगासन हमारी रीढ़ की हड्डी को मजबूती और लचीलापन प्रदान करता है। इसके साथ ही, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या से राहत मिलती है। इस आसन को करने से हमारे कंधे और गर्दन की मांसपेशियों को भी आराम मिलता है।

कसरत, योग और फ़िटनेस की आवश्यकता

अन्य देशों जैसा हमारे यहाँ शारीरिक तन्दुरूस्ती पर खास ध्यान नहीं दिया जाता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे देशों में जनसंख्या के एक बड़े हिस्से को अपना जीवन यापन करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। पर हम आगे देखेंगे यह ज़रूरी नहीं है कि कड़ी मेहनत से शारीरिक तंदरुस्ती सुनिश्चित हो जाए। शारीरिक कसरत से ताकत भी बढ़ती है और तनाव और थकान को झेलने की क्षमता भी। इससे कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव होता है, स्वास्थ्य में सुधार होता है और कई एक बीमारियॉं ठीक भी हो जाती हैं। इस अध्याय में शारीरिक तन्दुरूस्ती क्या है इसके बारे में हम जानेंगे और कुछ एक कसरतों के मुख्य अवयवों के बारे में भी।

बुजुर्गों के लिए आसान योगासन : कटिचक्रासन

यह आसन शरीर को सीधा रखने में मदद करता है, क्योंकि इससे स्पाइन सीधी रहती है। इसके अलावा, यह हाथों और पैरों की मसल्स को मजबूती प्रदान करता है। बुजुर्गों के लिए योगासन में यह आसन काफी आसान है और फायदेमंद भी है। इसे करने के लिए पैरों को थोड़ा सा खोलकर आराम से खड़े हो जाएं। इसके बाद अपने हाथों को कंधे की सीध में रखते हुए सामने की तरफ फैला लें। अब लंबी और गहरी सांस लें और सांस छोड़ते हुए जितना हो सके अपनी कमर को दायीं तरफ ले जाएं और सिर को दाएं कंधे की तरफ झुकाएं। अब सांस लेते हुए पिछली वाली पोजीशन में आ जाएं और फिर इस प्रक्रिया को दूसरी तरफ से भी दोहराएं।

योग से शरीर के आठ ग्लैंड करते हैं सुचारू रूप से काम

नियमित योग करने से न केवल आप बीमारियों से दूर रहते हैं बल्कि शरीर के तमाम ग्लैंड भी सुचारू रूप से काम करते हैं। शरीर में ग्लैंड अहम भूमिका निभाते हैं, वो कुछ ऐसा बनाते हैं या कुछ रिलीज करते हैं जिस कारण शरीर सुचारू रूप से काम करता है। शरीर में कई प्रकार के ग्लैंड होते हैं जो मुख्य रूप से दो प्रकार एंडोसिरिन व एक्सोसिरिन के अंतर्गत आते हैं। एंडोसिरिन ग्लैंड हार्मोन बनाने के साथ रिलीज करते हैं जो हमारी रक्त कोशिकाओं से होते हुए शरीर में जाते हैं। यही हमारे विकास के साथ मेटॉबॉलिज्म, मूड, यहां तक कि रिप्रोडक्शन में मदद करते हैं।

सर्वाइकल के लिए योग : सूर्य नमस्कार

कोई भी व्यक्ति जिसे गर्दन में दर्द, कंधे में दर्द और सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस हो उसके लिए यह आसन बेहद उपयोगी है। हालांकि, इसे करते समय बेहद सावधान रहना चाहिए। अगर आपको यह आसन नहीं आता, तो किसी विशेषज्ञ के निर्देशों का पालन करते हुए ही इस आसन को करें। इससे रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। सूर्य नमस्कार करने के लिए बारह चरणों का पालन करना होता है।

पादहस्तासन योग के लाभ रक्त परिसंचरण में

रक्त परिसंचरण में सुधार करने में पादहस्तासन योग फायदेमंद होता है। इस योग को करने के लिए आपको आगे की ओर झुकना होता है जो विशेष रूप से शरीर के ऊपरी हिस्से में रक्त परिसंचरण में सुधार करता है।

पादहस्तासन योग करने फायदे हाईट बढ़ाने में

यदि आप अपनी हाईट बढ़ाने के लिए कोई योग खोज रहें है तो पादहस्तासन योग आपके लिए बहुत ही अच्छा विकल्प हो सकता है। यह योग आपकी जांघ की मांसपेशियों को एक अच्छा खिंचाव देता है। पादहस्तासन संतुलन, मुद्रा और लचीलेपन में सुधार करता है। इसका नियमित अभ्यास आपके कद को बढ़ाने में आपकी मदद कर सकता है।

पादहस्तासन योग करने लाभ पाचन सुधारने में

पाचन को सुधारने और चयापचय की क्रिया को बढ़ाने के लिए पादहस्तासन योग बहुत ही फायदेमंद होता है। हमारे शरीर में उत्पन्न होने वाले लगभग सभी रोगों का कारण पेट के पाचन तंत्र में खराबी होता हैं। अगर आप पादहस्तासन योग को करते हैं तो एक प्रकार से आपके पेट की मालिश होती हैं और यह पेट की कार्य प्रणाली को अधिक क्रियाशील बनता हैं।

पादहस्तासन योग करने फायदे तनाव कम करे

तनाव को कम करने के लिए पादहस्तासन योग बहुत ही लाभदायक है। वैसे तो सभी योग अपने तनाव को कम करने में मदद करते हैं पर यह योग आपके शरीर की थकान को खत्म करता हैं और तनाव को कम कर के मन को शांति प्रदान करता हैं।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।