रनिंग में साँस को सामान्य रखें

महिलाएं जब पीरियड के दौरान रनिंग कर रही होती है तब साँस को सामान्य रखें। क्योंकि यह आपकी मांसपेशियों को ऑक्सीजन प्राप्त करने के सर्वोत्तम तरीकों में शामिल है।

अच्छी तरह से आराम करें

पीरियड में रनिंग करने से पहले अच्छी तरह से आराम करें। अगर आप कोई काम करती है तो सप्ताह में एक दिन का रेस्ट लें और हर रात पर्याप्त नींद लें।

अधिक पानी का सेवन करें

दौड़ते समय हाइड्रेट रहना हमेशा महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इससे भी अधिक जब आप पीरियड से होती हैं। इस समय आप अतिरिक्त तरल पदार्थ खो रहे होती हैं।

माहवारी में रनिंग करने के फायदे सहन-शक्ति बढ़ाने में

जब महिलाएं पीरियड में रनिंग करती है तो इससे उनके अंदर सहन-शक्ति का विकास होता है। माहवारी के दौरान महिलाओं में फीमेल हॉर्मोन की कमी हो जाती है जिसकी वजह से थकान और कमजोरी लगती है। मासिक धर्म में दौड़ने से इन सभी समस्यों से छुटकारा मिल सकता है।

पीरियड में रनिंग करने के फायदे मूड स्विंग्स में

लड़कियों में पीरियड के दौरान मूड स्विंग्स होना बहुत आम बात है। इसे ठीक करने में रनिंग आपकी मदद कर सकता है। इसके अलावा रनिंग से महिलाओं में पीएमएस (Premenstrual syndrome) के लक्षणों को भी कम किया जा सकता है।

मासिक धर्म में रनिंग करने के लाभ तनाव और चिड़चिड़ापन में

माहवारी के दौरान रनिंग करने से कई प्रकार के लाभ होते है। पीरियड में अधिकांश महिलाओं को थकान, चिड़चिड़ाहट और दर्द आदि की समस्या होती है। इससे बचाने के लिए आपको रनिंग करना चाहिए, रनिंग करना आपके मूड को ठीक करने में मदद कर सकता है।

पीरियड में रनिंग करने से एंडोर्फिन हार्मोन लेवल बढ़ता है

एंडोर्फिन हार्मोन महिलाओं के शरीर में निवारक की तरह काम करता है और दर्द और थकान को कम करने में बहुत मदद करता है। जब आप दौड़ती है तो बॉडी में एंडोर्फिन का स्तर बढ़ता है। इससे पीरियड होने वाले दर्द, थकान, तनाव को दूर करने में मदद मिलती है।

पीरियड में रनिंग करना चाहिए या नहीं

पीरियड का समय ऐसा होता है जिसमें महिलाओं को थकान और पेट दर्द आदि समस्यायों का सामान करना पड़ता है। इसलिए बहुत से लोग पीरियड के दौरान आराम करने की सलाह देते है। लेकिन डॉक्टरों की मानें तो पीरियड में लाइट वर्कआउट किया जा सकता है। आज हम आपको पीरियड में रनिंग करना चाहिए या नहीं इसके बारे में बताएंगे।लड़कियों के लिए पीरियड्स का समय बहुत ही पीड़ादायक होता। महिलाएं ऐसे समय में आराम करना पसंद करती है क्योंकि माहवारी का समय बहुत ही कष्टदायक होता है। इसी वजह से अधिकांश लड़कियां यह जानना चाहती है कि मासिक धर्म के दौरान रनिंग करना चाहिए या नहीं करना चाहिए।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।