स्पोर्ट्स के फायदे पाचन को मजबूत करने में

खेल या स्पोर्ट्स आपको आनंद देने के अलावा और भी कई प्रकार से शारीरिक लाभ देते है। नियमित रूप से खेल में व्यस्तता पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के सबसे आसान तरीकों में से एक है। इसलिए खेलों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की कोशिश करें।

पाचन तंत्र को मजबूत करने वाले योग

कुछ योग पोज़ जैसे कि नौकासन, बालासन, अधोमुखश्वानासन, उत्तानासन, त्रिकोणासन और धनुरासन पाचन में सुधार करने और पेट की चर्बी कम करने के लिए बहुत बढ़िया योग आसन हैं। ये योग पेट की मांसपेशियों को खिंचाव देते, उनको आराम करने में मदद करते और सूजन तथा अम्लता जैसी समस्याओं से बचाते हैं। योग आसन आपके तनाव को कम करने में भी मदद कर सकते है जो पाचन संबंधी मुद्दों का कारण बनता है।

स्वस्थ पाचन क्रिया के लिए पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज

पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज हमारे पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और पाचन क्रिया को मजबूत करने में मदद करती है। जब आंत्र नियंत्रण की समस्याओं (मल असंयम – faecal incontinence) की बात आती है, तो पेल्विक फ्लोर व्यायाम से बेहतर कोई व्यायाम नहीं है। पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज के 5 सेट में कम से कम 50 प्रतिनिधि को करें।

मजबूत पाचन तंत्र क्यों जरूरी होता है

हमारा दिमाग कैसे काम करता है और हम कितना खुश महसूस करते हैं इसमें पेट का स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर हमारे पेट की सेहत ठीक नहीं है, तो हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी खराब हो सकता है। यह सुनिश्चित करना कि हम सही चीजें खाते हैं और पीते हैं, स्पष्ट रूप से महत्वपूर्ण है। एक्सरसाइज करना आंत को उत्तेजित करने और आंतों की गतिविधि को बढ़ाने में मदद करता है। शोध यह भी बताते हैं कि एक्सरसाइज आंत में बैक्टीरिया के संतुलन को प्रभावित करता है। यह आंत फ्लोरा (gut flora) के रूप में जाना जाता है जो हमारे प्रतिरक्षा प्रणाली को सुधारने में मदद करता है, खराब जीवाणुओं के विकास को रोकता है और शरीर क

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।