प्राणायाम
बाल उगाने के लिए योग भस्त्रिका प्राणायाम
भस्त्रिका प्राणायाम बालों को झड़ने से रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण योग है और यह एक सुपरचार्ज मोड प्राणायाम भी है। यह फेफड़ों को स्वस्थ रखता है और पूरे शरीर में रक्त परिसंचरण में सुधार करता है जो बालों का झड़ना भी रोकता है और बालों के उगने में मदद करता है। इस आसन को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को जमीन पर बिछा कर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। अपनी आँखों को बंद कर लें और अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। फिर अपनी तर्जनी को अंगूठे से मिलाएं। अब एक गहरी साँस अन्दर लें और फिर बलपूर्वक उसके बाहर निकालें। फिर से बलपूर्वक अन्दर की ओर साँस लें और फिर से बलपूर्वक उसे बाहर निकले। इस भस्त्र
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लो बीपी के लिए योग सूर्यभेदी प्राणायाम
सूर्यभेदी प्राणायाम मन को नियंत्रित करने में मदद करता है और सांस लेने की दर को धीमा करता है। जैसे ही ऑक्सीजन प्रवेश करती है और विषाक्त पदार्थ शरीर से बाहर निकलते हैं। यह दिमाग को शांत करता है जिससे सिर ठंडा रहता है और चक्कर नहीं आते हैं। यह एक उन्नत प्राणायाम है इसे योग शिक्षक के मार्गदर्शन में किया जाना चाहिए।
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श्वसन तंत्र में लाभदायक योग कपालभाति प्राणायाम
कपालभाति प्राणायाम एक साँस लेने की प्रकिया है जो हमारे श्वसन प्रणाली को मजबूत करता है। यह वजन को कम करने के लिए कपालभाति एक बहुत ही अच्छा आसन हैं। कपालभाती प्राणायाम पेट की बीमारी, मोटापा, पाचन विकार और पेट से जुड़ी कई समस्याओं को ठीक करने में बहुत प्रभावी है। इस आसन को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को जमीन पर बिछाकर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखे और ध्यान की मुद्रा में बैठे। साँस अन्दर को ओर ले अब साँस को बाहर छोड़ते हुए पेट को अन्दर की ओर इस प्रकार खींचे की पेट और पीठ आपस में मिल जाएं। फिर साँस को अन्दर ले ओर पेट को ढीला करें। यह क्रिया फिर से दोहर
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नाड़ी शोधन प्राणायाम क्या है
नाड़ीशोधन संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है जहां नाड़ी का अर्थ चैनल या प्रवाह (flow) और शोधन का अर्थ सफाई या शुद्धि (purification) है। इसलिए नाड़ी शोधन प्राणायाम को आमतौर पर नासिका की सफाई करने और शरीर एवं दिमाग को शुद्ध करने के लिए जाना जाता है। नाड़ी शोधन एक ऐसा प्राणायाम है जिसे महिला, पुरुष और किसी भी उम्र के व्यक्ति बेहद आसानी से कर सकते हैं और इसका लाभ पा सकते हैं। यह प्राणायाम शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के साथ ही हर तरह के चिंता और तनाव को दूर करने में बहुत सहायक होता है। नाड़ी शोधन प्राणायाम गहरी सांस लेने, कुछ देर तक उसे रोकने (hold) और फिर छोड़ने की एक प्रक्रिया है, इसलिए यह शरी
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नाड़ी शोधन प्राणायाम की विधि
सबसे पहले दोनों पैरों को मोड़कर जमीन पर बिल्कुल आराम से बैठ जाएं। रीढ़ की हड्डी एकदम सीधी (erect) रखें और कंधों को भी आराम की मुद्रा में रखें और अधिक तनाव न दें और दोनों आंखों को बंद करके बैठें।
इसके बाद अपने बायीं हथेली को बाएं जांघ (thigh) के ऊपर रखें। हथेली ऊपर की ओर खुली रखें और अंगूठे और तर्जनी उंगली के पोरों को एक दूसरे से सटाकर रखें।
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शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में नाड़ी शोधन प्राणायाम के फायदे
नासिका द्वार से श्वास छोड़ने और लेने की क्रिया से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है। हालांकि शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने के लिए प्रतिदिन नाड़ी शोधन प्राणायाम का अभ्यास (practice) करना जरूरी होता है। यह प्राणायाम करने से व्यक्ति को न तो अधिक ठंड लगती है और न ही अधिक गर्मी का अनुभव होता है।
नाड़ी शोधन प्राणायाम करते समय सावधानियां
अन्य प्राणायाम की तरह नाड़ी शोधन प्राणायाम करने से स्वास्थ्य को कई लाभ होते हैं। लेकिन यदि इस प्राणायाम का अभ्यास करते समय कुछ बातों का ध्यान नहीं रखा जाए तो इससे स्वास्थ्य को कई नुकसान भी हो सकता है। आइये जानते हैं कि नाड़ी शोधन प्राणायाम का अभ्यास करते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
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प्राणायाम के द्वारा रोगों का उपचार
प्राणायम योग की एक महत्वपूर्ण क्रिया है जिसमे हम अपने शरीर के पाचनतंत्र को सुद्रिड करके समस्त हैं अंदरूनी बिमारियों से मुक्ति पा सकते हैं ! जैसा कि सर्बविधित है की हमारा सरीर पञ्च तत्वों से बना है ! जो कि समय के साथ-साथ बनते टूटते रहते हैं ! उन तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए हम खाना खाते हैं, पानी की पूर्ती के लिए पानी पीते हैं, और आक्सीजन की पूर्ती के लिए साँस लेते हैं तथा बेकार हुए तत्वों को बिभिन्न रास्तों से सरीर से बाहर किया जाता है ! इस भोजन,पानी को ग्रहण करने से लेकर अनुपयोगी तत्वों को सरीर से बाहर करने तक की क्रियाओं को उपापचय क्रिया कहते हैं !
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हार्ट ब्लॉकेज के लिए योग अनुलोम विलोम प्राणायाम
अनुलोम विलोम प्राणायाम साँस पर नियंत्रण करने वाला योग है जो कोलेस्ट्रॉल कम करके हार्ट ब्लॉकेज ठीक करने में मदद करता है। यह प्राणायाम ब्लॉक नाडी या ऊर्जा चैनल को खोलने या साफ करने में मदद करता है, स्ट्रेस और टेंशन को दूर करता है और चयापचय की दर को बढ़ाता है साथ में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी नियंत्रित करता है।
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पेट की चर्बी कम करने के लिए प्राणायाम मार्जरासन
मार्जरासन योग पेट को कम करने में बहुत ही लाभदायक होता है। इस योग को करने से अधिक कैलोरी बर्न होती है जिसकी वजह से आसानी से वजन को कम किया जा सकता है। इस आसन को करने के लिए आप एक योगा मैट पर अपने सिर को सीधा रखें हुयें घुटने टेक के अपने दोनों हाथों को जमीन पर रख लें। अब साँस को अन्दर लेते हुए अपने सिर को पीछे की ओर तथा अपनी ठोड़ी को ऊपर करें।
अब साँस छोड़ते हुए सिर को सीधा करें। इसके बाद फिर से साँस को अपने सिर को नीचे करें और अपनी ठोड़ी को अपनी छाती से लगाने का प्रयास करें। इस आसन को कम से कम 5 से 6 बार करें। यह आसन पेट को कम करने के लिए लाभदायक होता हैं।
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