आसन
पेट की चर्बी घटाए तोलांगुलासन
वजन तोलते वक्त दोनों तराजू संतुलन में रहते हैं अर्थात तराजू का कांटा बीचोंबीच रहता है उसी तरह इस योगासन में भी शरीर का संपूर्ण भार नितंब पर आ जाता है और व्यक्ति की आकृति ताराजू जैसी लगती है इसीलिए इसे तोलांगुलासन कहते हैं।
आसन विधि : सर्वप्रथम दण्डासन में बैठ जाएं। फिर शरीर के भार को नितंबों पर संतुलित करते हुए श्वास अन्दर लें। अब थोड़ा-सा पीछे झुकते हुए हाथ-पैरों को भूमि पर से धीरे-धीरे ऊपर उठा दें। कुछ देर रुकने के बाद पुन: दण्डासन में लौट आएं।
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वृष-भासन रोज करें और पाये परफेक्ट फिगर
आकर्षक फिगर के लिए अधिकतर लड़कियां डाइटिंग करती हैं, लेकिन डाइटिंग करने से शरीर सुडौल नहीं होता, बल्कि दुर्बल हो जाता है। इसीलिए आकर्षक फिगर पाने के लिए योगासन से अच्छा कोई उपाय नहीं है। वृष-भासन एक ऐसा ही आसन है जिसके नियमित अभ्यास से चेहरे की चमक बढ़ती है और फिगर आकर्षक बन जाता है।
वृष-भासन की विधि
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पेट-पीठ को स्वस्थ बनाए उष्ट्रासन
वर्तमान युग में हममें से अधिकांश व्यक्तियों की आम शिकायत या तो पीठ के बारे में होती है या पेट के बारे में। उष्ट्रासन के नियमित अभ्यास से इन दोनों परेशानियों से हम बच सकते हैं।
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पीठ दर्द को जड़ से खतम करे मार्जारी आसन
मार्जारी आसन एक बहुत ही सरल आसन है जो कि खासतौर पर रीढ़ को लचीला बनाने के लिये किया जाता है। रीढ़ हमारे शरीर का स्तंभ होता है, अगर यह ठीक नहीं रहेगा तो आप ठीक से काम नहीं कर पाएंगे। मार्जारी आसन करने में बहुत ही आसान है। अगर आपको पीठ दर्द रहता है तो आप के लिये यह मार्जारी आसन बहुत लाभकारी होगा। पीठ दर्द की वजह से शरीर के अन्य भाग जैसे, कंधों में दर्द, मांसपेशियों में लोच की कमी, वजन का घटना, गर्दन में दर्द, कमजोरी और कभी-कभी सिरदर्द की भी शिकायत हो सकती है। मार्जारी आसन महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभदायक है। गर्भावस्था के दौरान पहले तीन महीने तक मार्जारी आसन का अभ्यास किया जा सकता है। यह
नाभि का टलना दूर करता है सुप्तवज्रासन
सुप्त का अर्थ होता है सोया हुआ अर्थात वज्रासन की स्थिति में सोया हुआ। इस आसन में पीठ के बल लेटना पड़ता है, इसिलिए इस आसन को सुप्त-वज्रासन कहते है, जबकि वज्रासन बैठकर किया जाता है
विधिः
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हरिकासन पेट की समस्या के लिए रामबाण
असंतुलित खाना और असंयमित दिनचर्या पेट से जुड़ी हर समस्या की मुख्य वजह है। कब्ज, गैस व एसीडिटी पेट से जुड़ी कुछ ऐसी प्राब्लम्स हैं जो हर उम्र के लोगों में देखी जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए योग सबसे अच्छा और आसान तरीका है। हरिकासन के लिए थोड़ा समय निकाले आपको यह आसन हमेशा के लिए इस समस्या से निजात दिला सकता है। पेट साफ रखने के लिए हरिकासन काफी फायदेमंद है। इस आसन को पद्मासन की ही तरह खाने के बाद भी किया जा सकता है। हरिकासन प्रार्थना व ध्यान के लिए भी लाभकारी है। इस आसन में काफी समय तक बैठा जा सकता है। इसलिए अधिकांश ऋषि-मुनि, योगी आदि इस आसन की मुद्रा में ही बैठते थे।
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लाभदायक है त्रिकोणासन
शरीर का बाह्य रूप से ही नहीं भीतरी रूप से भी ठोस होना मौजूदा जीवनशैली की जरूरत है। ऐसे में सिर्फ खानपान पर आश्रित रहना सही नहीं है। जरूरत इससे कुछ ज्यादा की है। त्रिकोणासन इसमें हमारी मदद कर सकता है। सामान्यतः त्रिकोणासन चैड़े सीने की चाह रखने वालों के लिए लाभकर है। लेकिन त्रिकोणासन के तिगुने लाभ हैं। यह शारीरिक रूप से फिट रहने की चाह रखने वालों को अवश्य करना चाहिए। पेट, कूल्हे और कमर के बेहतरीन शेप के लिए तो त्रिकोणासन से बेहतर और कुछ है ही नहीं। यह आसन सिर्फ कुछ शारीरिक अंगों पर ही कारगर नहीं है वरन हमारी मांसपेशियों के लिए भी त्रिकोणासन सहायक है। कहने का मतलब यह है त्रिकोणासन हमारे संपूर
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कटिचक्रासन : डाइबिटीज को रखें कंट्रोल में हमेशा
वर्तमान समय में हर उम्र वाले लोगों में डाइबिटीज के रोगी देखे जा सकते हैं। डाइबिटीज एक ऐसा रोग है जो अगर एक बार इंसान को लग जाए तो उसे जिंदगी भर दवाईयां खानी पड़ती है। अगर आपके साथ भी यही समस्या है तो योग के कटिचक्रासन के माध्यम से आप इस पर काबू पा सकते हैं।
भूचरी आसन दिमाग तेज रखने और याददाश्त बढ़ाने के लिए
काम में ध्यान न लगे या फिर पढ़ी हुई चीजें न याद रहें, याददाश्त और दिमाग से जुड़ी छोटी-छोटी समस्याओं का पुख्ता उपचार योग में मौजूद है।
ऐसे में योग की भूचरी मुद्रा का नियमित अभ्यास न सिर्फ याददाश्त बढ़ाने में मदद करता है बल्कि यह मानसिक शांति देता है और फोकस बढ़ाता है। साथ ही, इसके नियमित अभ्यास से बहुत अधिक गुस्से पर काबू पाया जा सकता है।
जानिए, इस मुद्रा की सही विधि और आप खुद आजमाकर देखिए।
– इसे करने के लिए सुखासन में यानी पालथी मारकर सीधे बैठें और कमर सीधी रखें।
– अब हथेलियों को ऊपर की ओर करके अपनी जांघों या घुटनों पर रखें। आराम महसूस करें।
पवनमुक्तासन पेट में गैस की समस्या में रामबाण
लगातार बैठ कर काम करने और खाना-पानी लेने में जरूरी सावधानी नहीं बरते जाने के कारण गैस की समस्या आज आम हो गई है। इससे बचाव जरूरी है और कुछ यौगिक क्रियाओं का अभ्यास भी।
आजकल के मशीनी युग की भागदौड़ से गैस की शिकायत एक आम समस्या बन गई है। हालांकि गांवों में भी इस समस्या से पीडित लोगों की संख्या कम नहीं, लेकिन शहर में रहने वाला प्राय: हर व्यक्ति गैस की परेशानी से पीडित है।
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