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योग

स्तन कैंसर के उपचार के बाद योग करना लाभदायक l

 एक शोध में पता चला है कि स्तन कैंसर के इलाज के बाद यदि कम से कम तीन महीनों तक नियमित रूप से योगाभ्यास किया जाए , तो इससे थकान और सूजन काफी हद तक कम होती है। अमेरिका की ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर और मनोरोग विशेषज्ञ जेनिस कीकॉल्ट-ग्लासेर ने कहा, "कुछ महीनों तक लगातार योगाभ्यास करने से स्तन कैंसर से उबरे मरीजों को काफी फायदा पहुंचता है।" उन्होंने कहा, "नियमित योगाभ्यास के सकारात्मक परिणाम उन लोगों के लिए भी फायदेमंद है जिनको थकान और सूजन की समस्या रहती है।" योगा करने से हमारे शरीर को कई प्रकार के लाभ मिलते हैं जिसका अनुमान शायद ही हम इस जिंदगी में लगा सकते हैं।

पेट की चर्बी घटाए तोलांगुलासन

वजन तोलते वक्त दोनों तराजू संतुलन में रहते हैं अर्थात तराजू का कांटा बीचोंबीच रहता है उसी तरह इस योगासन में भी शरीर का संपूर्ण भार नितंब पर आ जाता है और व्यक्ति की आकृति ताराजू जैसी लगती है इसीलिए इसे तोलांगुलासन कहते हैं।

आसन विधि : सर्वप्रथम दण्डासन में बैठ जाएं। फिर शरीर के भार को नितंबों पर संतुलित करते हुए श्वास अन्दर लें। अब थोड़ा-सा पीछे झुकते हुए हाथ-पैरों को भूमि पर से धीरे-धीरे ऊपर उठा दें। कुछ देर रुकने के बाद पुन: दण्डासन में लौट आएं।

खांसी और जुकाम बस दस मिनट..........गायब

मौसम के परिवर्तन के कारण संक्रमण से कई बार वाइरल इंफेक्शन के कारण हमारे गले व फेफड़ों में जमने वाली एक श्लेष्मा होती है जो खांसी या खांसने के साथ बाहर आता है। यह फायदेमंद और नुकसानदायक दोनों है। इसे ही कफ कहा जाता है। अगर आप भी खांसी या जुकाम से परेशान है तो बिना दवाई लिए भी रोज सिर्फ दस मिनट इस मुद्रा के अभ्यास से कफ छुटकारा पा सकते हैं।

मुद्रा- बाएं हाथ का अंगूठा सीधा खडा कर दाहिने हाथ से बाएं हाथ कि अंगुलियों में परस्पर फँसाते हुए दोनों पंजों को ऐसे जोडें कि दाहिना अंगूठा बाएं अंगूठे को बहार से कवर कर ले,इस प्रकार जो मुद्रा बनेगी उसे अंगुष्ठ मुद्रा कहेंगे।

वृष-भासन रोज करें और पाये परफेक्ट फिगर

आकर्षक फिगर के लिए अधिकतर लड़कियां डाइटिंग करती हैं, लेकिन डाइटिंग करने से शरीर सुडौल नहीं होता, बल्कि दुर्बल हो जाता है। इसीलिए आकर्षक फिगर पाने के लिए योगासन से अच्छा कोई उपाय नहीं है। वृष-भासन एक ऐसा ही आसन है जिसके नियमित अभ्यास से चेहरे की चमक बढ़ती है और फिगर आकर्षक बन जाता है।

वृष-भासन की विधि

 

पेट-पीठ को स्वस्थ बनाए उष्ट्रासन

वर्तमान युग में हममें से अधिकांश व्यक्तियों की आम शिकायत या तो पीठ के बारे में होती है या पेट के बारे में। उष्ट्रासन के नियमित अभ्यास से इन दोनों परेशानियों से हम बच सकते हैं। 

सिर्द दर्द और माइग्रेन है तो करें प्राणायाम

 सिरदर्द कभी गर्मी लगने से हो जाता है कभी शर्दी लगने से हो जाता है और कभी गैस के कारन सिरदर्द होता है। यदि शर्दी के कारन से सिर  दर्द है तो कपालभाति प्राणायाम करे, अगर गैस के कारन आपको सिरदर्द है तो अनुलोम विलोंम प्राणायाम करे। ये प्राणायाम १५ मिनिट से ले के ३० मिनिट तक करना चाहिए।

 

अनुलोम-विलोम प्राणायाम

 

प्राणायाम से दूर होते हैं ये रोग

 चरक ने वायु को मन का नियंता एवं प्रणेता माना है। आयुर्वेद अनुसार काया में उत्पन्न होने वाली वायु है उसके आयाम अर्थात निरोध करने को प्राणायाम कहते हैं। आओ जानते हैं कैसे करें प्राणायाम और कौन-सा रोग मिटेगा प्राणायाम से...

प्राणायाम के पांच फायदे जानना जरूरी

प्राणायाम की शुरुआत : प्राणायाम करते समय 3 क्रियाएं करते हैं- 1.पूरक, 2.कुंभक और 3.रेचक। इसे ही हठयोगी अभ्यांतर वृत्ति, स्तम्भ वृत्ति और बाह्य वृत्ति कहते हैं।

सिरदर्द ओर माइग्रेन से छुटकारा पाने के लिए प्राणायाम

 सिरदर्द कभी गर्मी लगने से हो जाता है कभी शर्दी लगने से हो जाता है और कभी गैस के कारन सिरदर्द होता है। यदि शर्दी के कारन से सिर  दर्द है तो कपालभाति प्राणायाम करे, अगर गैस के कारन आपको सिरदर्द है तो अनुलोम विलोंम प्राणायाम करे। ये प्राणायाम १५ मिनिट से ले के ३० मिनिट तक करना चाहिए।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम (ANULOM-VILOM PRANAYAM)

दमा से राहत दिलाए योग व प्राणायाम

दमा की यह कहावत अब पुरानी हो चुकी है कि दमा दम लेकर ही दूर होता है। दमा को श्वास रोग कहते हैं। दमा के रोगियों में सांस नली चौड़ी होने के बजाय सिकुड़ जाती है। सांस नली में पड़ी कार्बन डाई ऑक्साइड बाहर नहीं निकल पाती है और रोगी को बलपूर्वक एवं कठिनाई से उसे निकालने का प्रयास करना पड़ता है। परन्तु योग ने यह सिद्ध कर दिया है कि उन्हें भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। दमे के रोगियों के लिए कुछ खास योगों में गोमुखासन और सूर्यभेदी प्राणायाम अत्यन्त लाभदायक है।
गोमुखासन

प्राणायाम के लाभ एवं महत्व

हमारे शरीर में जितनेही चेष्टाएँ होती है उन सभी का प्राण से प्रत्यक्ष सम्बन्ध है। प्रणायाम से इन्द्रियों एवं मन के दोष्  दूर होते है।