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ਯੋਗ

हफ्तेभर तक करें सिर्फ ये 2 योगासन, बढ़ जाएगा 5kg वजन!

अकसर लोग सोचते हैं कि योग मेडीटेशन है ये वजन बढ़ाने या फिर वज़न घटाने में कहीं से कारगार नहीं हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं योग के जरिए आप वजन नियंत्रण के आश्चर्यजनक परिणाम पा सकते हैं। बिना किसी नुकसान के आप योग का लाभ अच्छी तरह से उठा सकते हैं।

कम्प्यूटर के सामने बैठे-बैठे करें ये छोटी सी एक्सरसाइज, आंखों की जलन हो जाएगी दूर

करीब 10 घंटे कम्‍प्यूटर के सामने और फिर बाद में मोबाइल, टैब से चिपके रहने के कारण अधिकतर लोगों को आंखों में थकान, जलन और सिरदर्द रहने लगता है। दरअसल हमारी लाइफस्टाइल ऐसी हो गई है, जिससे हमारी आंखों पर लगातार दबाव पड़ता रहता है। अगर आप भी इन्हीं लोगों में शामिल है तो हम आपको कुछ ऐसी एक्सरसाइज बताने जा रहे हैं तो कहीं पर भी बिना आपका ज्यादा समय लिए हो सकती है। काम के दौरान थकान होने पर भी आप आंखों को राहत दे सकते हैं। पहले स्टेप में हथेलियों को रब करें और आंखों पर रख लें। ध्यान रहें कि आंखों पर हथेलियों का दबाव न पड़े। थोड़ी देर बार हाथ हटाएं और आंखों को धीरे-धीरे खोलें। इससे आंखों को तु

ਕੰਪਿਊਟਰ ਦੇ ਸਾਮ੍ਹਣੇ ਬੈਠਦਿਆਂ ਇਹ ਛੋਟੀਆਂ ਕਸਰਤਾਂ ਕਰੋ, ਅੱਖਾਂ ਦੀ ਜਲਣ ਦੂਰ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ

ਜ਼ਿਆਦਾਤਰ ਲੋਕ ਤਕਰੀਬਨ 10 ਘੰਟਿਆਂ ਲਈ ਕੰਪਿ tabਟਰ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਟੈਬ, ਟੈਬ ਅਤੇ ਫਿਰ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਨਜ਼ਰ ਆਉਣ ਕਾਰਨ ਅੱਖਾਂ ਵਿਚ ਥਕਾਵਟ, ਜਲਣ ਅਤੇ ਸਿਰ ਦਰਦ ਦਾ ਅਨੁਭਵ ਕਰਦੇ ਹਨ. ਦਰਅਸਲ, ਸਾਡੀ ਜੀਵਨ ਸ਼ੈਲੀ ਅਜਿਹੀ ਬਣ ਗਈ ਹੈ ਕਿ ਸਾਡੀਆਂ ਅੱਖਾਂ 'ਤੇ ਨਿਰੰਤਰ ਦਬਾਅ ਹੁੰਦਾ ਹੈ. ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਵੀ ਇਨ੍ਹਾਂ ਲੋਕਾਂ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਮਲ ਹੋ, ਤਾਂ ਅਸੀਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕੁਝ ਅਜਿਹੀਆਂ ਅਭਿਆਸਾਂ ਬਾਰੇ ਦੱਸਣ ਜਾ ਰਹੇ ਹਾਂ, ਤਾਂ ਤੁਸੀਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਮਾਂ ਲਏ ਬਿਨਾਂ ਕਿਤੇ ਵੀ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹੋ. ਤੁਸੀਂ ਕੰਮ ਦੌਰਾਨ ਥੱਕੇ ਹੋਏ ਵੀ ਅੱਖਾਂ ਨੂੰ ਰਾਹਤ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ. ਪਹਿਲਾਂ ਹਥੇਲੀਆਂ ਨੂੰ ਕਦਮ ਨਾਲ ਰਗੜੋ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਅੱਖਾਂ 'ਤੇ ਰੱਖੋ. ਧਿਆਨ ਰੱਖੋ ਕਿ ਹਥੇਲੀਆਂ ਅੱਖਾਂ 'ਤੇ ਦਬਾਅ ਨਾ ਪਾਉਣ. ਹੱਥਾਂ ਨੂੰ ਕੁਝ ਦੇਰ ਲਈ ਹਟਾਓ ਅਤੇ ਹੌਲੀ ਹੌਲੀ ਅੱਖਾਂ ਖੋਲ੍ਹੋ.

लंबाई बढ़ाए उर्ध्वोत्तानासन योगासन

उर्ध्वोत्तानासन को रीढ़ विकृतियों में, कमजोर पैरों की स्थिति में, मोटापे में, ड्रॉपिंग शोल्डर व नैरो चेस्ट की स्थिति में योग चिकित्सक की सलाह अनुसार करना चाहिए तो लाभ मिलेगा। यह अति उत्तम और सरल आसन आपको स्फूर्तिवान और प्रसन्नचित्त बनाए रखने में सक्षम है।

आसन परिचय : उर्ध्व का अर्थ होता है ऊपर और तान का अर्थ तानना अर्थात शरीर को ऊपर की और तानना ही उर्ध्वोत्तानासन है। अनजाने में ही व्यक्ति कभी-कभी आलसवश दोनों हाथ ऊपर करके शरीर तान देता है। शरीर को ऊपर की ओर तानते हुए त्रिबंध की स्थिति में स्थिर रहना चाहिए।

शरीर और मन की शांति के लिये बालासन

माना जाता है कि मां की कोख से अच्‍छी आराम की जगह और कोई नहीं होती। तभी तो जब आप इस अवस्‍था में कभी लेटते हैं तो शरीर और दिमाग दोनों को ही आराम पहुंचता है। बालासन योग का अभ्‍यास आप अपने शरीर को आरामदायक स्थिति में लाने के लिए कर सकते हैं। इस आसन से मेरूदंड और कमर में खींचाव होता है और इनमें मौजूद तनाव दूर होता है। बालाअसन करने के फायदे- यह पीठ, कंधे और गर्दन के तनाव को दूर करता है। शरीर के भीतरी अंगो में लचीलापन लाता है। अगर गर्दन और कमर में दर्द रहता है तो वह भी ठीक हो जाता है। शरीर और दिमाग को शांति देता है। घुटनों और मासपेशियों को स्‍ट्रेच करता है।

मोटापे के लिए झूलन-ढुलकन आसन

मोटापे के लिए झूलन-ढुलकन आसन

झूलन-ढुलन आसन! आपने इस आसन का नाम कम ही सुना होगा। हालांकि बालपन में आपने यह आसन जरूर किया होगा। शरीर का आधार रीढ़ होता है। रीढ़ को मजबूत बनाने के लिए यह आसन बहुत अच्छा है। झूलन-लुढ़कन आसन को करने से रीढ़ की हड्डी और जोड़ पहले से ज्यादा लचकदार और मजबूत होते हैं।

झूलना-लुढ़कना आसन की विधि:- 

(अ)
* सबसे पहले पीठ के बल सीधा लेट जाएं।
* अब दोनों पैरों को मोड़ते हुए वक्ष तक लाएं
* दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में फंसाकर घुटनों के पास पैरों को कसकर पकड़ें।
-यह प्रारंभिक स्थिति है।

रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाए हलासन

इस आसन के अभ्यास की स्थिति में आसन करने वाले व्यक्ति का आकार हल के समान होता है, इसलिए इसे हलासन कहते हैं। अगर आप दिनभर ऑफिस में बैठ कर काम करते हैं और आपकी गर्दन और पीठ हमेशा अकड़ी रहती है तो यह आसन उसे ठीक कर सकता है। शास्त्रों के अनुसर जिस व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी जितनी मुलायम व लचीली होगा व्यक्ति उतना ही स्वस्थ एवं लम्बी आयु को प्राप्त करेगा। हलासन के अभ्यास से थायरायड तथा पैराथायरायड ग्रंथियों की अच्छी तरह से मालिश हो जाती है, जिससे गले सम्बन्धी सभी रोग दूर हो जातेहैं। इस आसन को करते समय हृदय व मस्तिष्क को बिना किसी कोशिश की खून की पूर्ति होती है। जिससे हृदय मजबूत होता है और शरीर में खू

अंडकोष वृधि के लिए विशेष लाभदायक::गोमुखासन

गोमुखासन आसन में व्यक्ति की आकृति गाय के मुख के समान बन जाती है इसीलिए इसे गोमुखासन कहते हैं। यह आसन आध्‍यात्मिक रूप से अधिक महत्‍व रखता है तथा इस आसन का प्रयोग स्‍वाध्‍याय एवं भजन, स्‍मरण आदि में किया जाता है। यह आसन पीठ दर्द, वात रोग, कंधे के कडे़ंपन, अपच तथा आंतों की बीमारियों को दूर करता है।

यह अंडकोष से संबन्धित रोगों को दूर करता है। यह आसन उन महिलाओं को अवश्‍य करना चाहिये, जिनके स्‍तन किसी कारण से छोटे तथा अविकसित रह गए हों। यह आसन स्‍त्रियों की सौंदर्यता को बढ़ाता है और यह प्रदर रोग में भी लाभकारी है।

गोमुखासन की विधि-

ਅੰਡਕੋਸ਼ ਦੇ ਵਾਧੇ ਲਈ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਲਾਭ: ਗੋਮੁਖਾਸਨ

ਗੋਮੁਖਾਸਣ ਆਸਣ ਵਿਚ, ਇਕ ਵਿਅਕਤੀ ਦੀ ਸ਼ਕਲ ਇਕ ਗ cow ਦੇ ਚਿਹਰੇ ਵਰਗੀ ਬਣ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਇਸੇ ਲਈ ਇਸ ਨੂੰ ਗੋਮੁਖਾਸਨ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ. ਇਹ ਆਸਣ ਅਧਿਆਤਮਿਕ ਤੌਰ 'ਤੇ ਵਧੇਰੇ ਮਹੱਤਵ ਰੱਖਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਆਸਣ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਸਿਹਤ ਅਤੇ ਭਜਨ, ਯਾਦ ਆਦਿ ਵਿਚ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ. ਇਹ ਆਸਣ ਕਮਰ ਦਰਦ, ਗੱਠਿਆਂ, ਮੋ shoulderੇ ਦੇ ਝਟਕਿਆਂ, ਬਦਹਜ਼ਮੀ ਅਤੇ ਅੰਤੜੀਆਂ ਦੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਦੂਰ ਕਰਦਾ ਹੈ.

ਇਹ ਅੰਡਕੋਸ਼ ਨਾਲ ਜੁੜੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਠੀਕ ਕਰਦਾ ਹੈ. ਇਹ ਆਸਣ ਉਨ੍ਹਾਂ toਰਤਾਂ ਨੂੰ ਦਿੱਤਾ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਛਾਤੀ ਛੋਟੇ ਅਤੇ ਕਿਸੇ ਕਾਰਨ ਕਰਕੇ ਪੱਕੇ ਰਹੇ ਹਨ. ਇਹ ਆਸਣ womenਰਤਾਂ ਦੀ ਖੂਬਸੂਰਤੀ ਨੂੰ ਵਧਾਉਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਕੋਹੜ ਵਿਚ ਵੀ ਲਾਭਕਾਰੀ ਹੈ.

ਗੋਮੁਖਾਸਨ ਦੀ ਵਿਧੀ