कर्मयोग से तात्पर्य
“अनासक्त भाव से कर्म करना”। कर्म के सही स्वरूप का ज्ञान।
कर्मयोग दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘कर्म’ तथा ‘योग’ ।
कर्मयोग के सन्दर्भ ग्रन्थ – गीता, योगवाशिष्ठ एवं अन्य।
1. कर्मों का मनोदैहिक वर्गीकरण –
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योग करते समय रहें सावधान... और बनें स्वास्थ्य
कहते हैं जहां भोग है वहां रोग है. जहां योग है वहां निरोग, लेकिन गलत योग रोगी बना सकता है. यानी योग करते समय सावधान रहें.
एक्सरसाइज करना अच्छी बात है. यह शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखती है. लेकिन अधकचरा ज्ञान कभी-कभी आपको बड़ी मुश्किल में डाल सकता है.
इसलिए एक्सरसाइज करने से पहले कुछ बातें जरूर ध्यान कर लें. फिट रहने के कुछ खास मंत्र होते हैं जिन्हें आप अपनी दिनचर्या में यदि शामिल कर लें तो आप फिटनेस की ओर निरंतर बढ़ते चले जायेंगे.
प्रशिक्षक से सलाह ले
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योग और जिम में से क्या बेहतर है?
जिम और योगा दोनों शरीर को स्वस्थ बनाता है । पर दोनों में कुछ अंतर है।
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योग क्या है
पतंजलि योग-दर्शन में योग | योग-दर्शन में मोक्ष को अपनाने के लिये तत्वज्ञान पर अधिक बल दिया गया है। योग-दर्शन के अनुसार तत्वज्ञान की प्राप्ति तब तक नहीं हो सकती जब तक मनुष्य चित्त विकारों से परिपूर्ण है। अतः योग-दर्शन में चित्त की स्थिरता को प्राप्त करने के लिये तथा चित्तवृत्ति का निरोध करने के लिए योग-मार्ग की व्याख्या हुई है। योग-दर्शन में योग का अर्थ चित्तवृत्तियों का निरोध है। योग-दर्शन में राजयोग का विवेचन मिलता है। योग-मार्ग की आठ सीढ़ियाँ हैं। इसीलिये इसे अष्टांगयोग भी कहा जाता है।
यह अष्टांग-मार्ग इस प्रकार है
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प्रेगनेंसी के समय में योगा
भले ही प्रेगनेंसी का समय बहुत ही तनावपूर्ण माना जाता हो, लेकिन उस अवस्था में आपको अपनी मन की शांति को बनाए रखना चाहिये। अगर तन और मन शांत रहेगा, तो यह स्ट्रेसफुल प्रोसेस भी बिल्कुल आसान हो जाएगा। इसके लिये जरुरी है कि प्रेगनेंसी के दौरान में योग आसन किया जाए, जिसको करने के पहले डॉक्टर की सलाह ले लें। योगा, चौथे महीने से ले कर प्रेगनेंसी के नवे महीने तक करने की सलाह दी जाती है। आइये जानते हैं कि प्रेनेंसी के दौरान कौन सा योगा करना फायदेमंद रहेगा।
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दिमाग के लिए कुछ योगासन
दिनभर की थकान और तनाव के बाद कई बार हम छोटी छोटी चीजें भूल जाते हैं। लेकिन दिन में सिर्फ 10 मिनट योगा करने से इस परेशानी को भी दूर कर सकते हैं और अपनी याद्दाश्त मजबूत कर सकते हैं।
सर्वांगसन
कंधों के बल अपने शरीर को ऊपर की तरफ उठाने की यह मुद्रा दिमाग तक खून के बहाव को बढ़ाती है। यह योग आपको भावात्मक रूप से भी मजबूत बनाता है।
भुजंगासन
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स्वप्नदोष, शीघ्रपतन, नपुंसकता की योग चिकित्सा
मनुष्य ने स्वयं की गलतियों से शरीर को रोगी और अपूर्ण बना दिया | योग अपने आप में पूर्ण वैज्ञानिक विद्या है | हमारे ऋषियों ने योग का प्रयोग भोग के वजाय आध्यात्मिक प्रगति करने के लिए जोर दिया है जो नैतिक दृष्टि से सही भी है | परन्तु ईश्वर की सृष्टि को बनाये रखने के लिए संसारिकता भी आवश्यक है, वीर्यवान व्यक्ति ही अपना सर्वांगीण विकास कर सकता है,संतानोत्पत्ति के लिए वीर्यवान होना आवश्यक है पौरूषवान (वीर्यवान) व्यक्ति ही सम्पूर्ण पुरुष कहलाने का अधिकारी होता है | वीर्य का अभाव नपुंसकता है इसलिए मौज-मस्ती के लिए वीर्य का क्षरण निश्चित रूप से दुखदायी होता है | ऐसे व्यक्ति स्वप्नदोष,शीघ्रपतन और नपुं
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योग का जीवन में महत्व
यह प्रमाणित तथ्य हैं की योग मुद्रा, ध्यान और योग में श्वसन की विशेष क्रियाओं द्वारा तनाव से राहत मिलती है, योग मन को विभिन्न विषयों से हटाकर स्थिरता प्रदान करता है और कार्य विशेष में मन को स्थिर करने में सहायक होता है.
हम मनुष्य किसी चीज़ की ओर तभी आकर्षित होते हैं जब उनसे हमें लाभ मिलता है. जिस तरह से योग के प्रति हमलोग आकर्षित हो रहे हैं वह इस बात का संकेत हैं कि योग के कई फायदे हैं. योग को न केवल हमारे शरीर को बल्कि मन और आत्मिक बल को सुदृढ़ और संतुष्टि प्रदान करता है. दैनिक जीवन में भी योग के कई फायदे हैं, आइये! इनसे परिचय करें.
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योग मुद्रा क्या है
विधि- सर्वप्रथम पद्मासन में आइए । हाथों को पीछे ले जाइए। बायें हाथ से दायें हाथ की कलाई को पकड़ लीजिए ।पहले साँस लीजिए और साँस को निकालते हुए नीचे फर्श पर माथा लगाइए ,फिर साँस लेते हुए वापिस आइए।
4-5 बार साँस के साथ दोहरायें।
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श्वेत प्रदर(ल्यूकोरिया) में योग
ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर) की बीमारी महिलाओं की आम समस्या है। संकोच में इसे न बताना कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। थोड़ी सी सावधानी व उपचार के जरिए इसके घातक परिणामों से बचा जा सकता है। अन्यथा यह कैंसर का कारण बन सकती है। सामान्य तौर पर गर्भाशय में सूजन अथवा गर्भाशय के मुख में छाले होने से यह समस्या पैदा होती है। उपचार न कराने से पीडि़ता को कई तरह की मानसिक व शारीरिक समस्याओं का शिकार होना पड़ता है। इसलिए महिलाएं को श्वेत प्रदर की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
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“योग विज्ञान है” – ओशो
योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है।
जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।
नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।