मन शांत रखने का उपाय मेडिटेशन करना

मेडिटेशन मन को शांत रखने के लिए एक प्रभावी घरेलू उपाय है। वास्तव में मेडिटेशन एक आध्यात्मिक अभ्यास है और सदियों से लोग अपने मन को शांत रखने के लिए इसे करते आ रहे हैं। अगर आप अपने दिमाग को शांत रखना चाहते हैं, तो प्रतिदिन कम से कम 15 से 30 मिनट तक शांत वातावरण में बैठकर एकाग्र होकर मेडिटेशन करें। इससे तनाव और डिप्रेशन दोनों कम होगा और मन एकदम शांत रहेगा।

दिमाग को शांत रखने का तरीका गहरी सांस लें

मन को शांत रखने का अचूक मंत्र गहरी सांस लेना है। जब हम अपने श्वास पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तब हमारे दिमाग में अच्छे रसायन स्रावित होते हैं, जो मन को कंट्रोल करने तथा मन को खुश रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मन शांत रखने के लिए नियमित रूप से पांच बार गहरी सांस लेना और कुछ देर बाद सांस को छोड़ना चाहिए। गहरी सांस लेते समय फेफड़े और डायफ्राम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इससे मन और मस्तिष्क में भावनात्मक विचार नहीं आते हैं, और तुरंत शांति, राहत और एक अलग तरीके का सुकून मिलता है।

मन को शांत रखने का उपाय है योग

योग के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति आसानी से अपने मन को शांत रख सकता है। योग करने के दौरान हमारे मस्तिष्क से कई प्रकार के हार्मोन रिलीज होते है, जो मन की बेचैनी और व्याकुलता को दूर करके आपके मन को शांति और दिमाग को आराम देते हैं। मन को शांत करने के लिए आप निम्न योग आसान कर सकते हैं:

ब्रिज पोज
जानुशीर्षासन
उत्तानासन योग
भुजंगासन
बालासन
अनुलोम विलोम प्राणायाम
शवासन
सुप्त बद्ध कोणासन।

मन को शांत कैसे करें

इस संसार और प्रकृति में मन को सुकून पहुंचाने वाली बहुत सी चीजें मौजूद हैं, बस जरूरत है तो सही तरह से तलाश करने की। यदि आप मन को शांत रखने के तरीके खोज रहें हैं तो इसके लिए आप निम्न उपाय अपना सकते हैं:

मन को शांत करने के उपाय

आज की दौड़-भाग भरी जिन्दगी में मन और दिमाग का अशांत रहना एक आम बात है। मन शांत रखने के लिए नित्य प्रयास न करना और प्रकृति से जुड़े न रहना, व्यक्तियों को टेंसन और डिप्रेसन का शिकार बना सकता है। यदि हर समय आपका मन विचलित और अशांत रहता है, तो यह आपके स्वस्थ और सम्पूर्ण जीवनशैली पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। मन शांत न रहने पर व्यक्ति अक्सर गलत फैसले ले लेते हैं, जिसके कारण उन्हें अक्सर पछताना पड़ता है। अतः मन की दुविधा को दूर करने तथा मन व दिमाग को शांत रखने के लिए कुछ उपाय अपनाये जा सकते हैं, जिनके बारे में हम यहाँ बताने जा रहें हैं।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।