Happy New Year 2021
शुभ दीपावली...
असत्य पर सत्य, कदाचार पर सदाचार, अंधकार पर प्रकाश की विजय के महापर्व प्रकाशोत्सव दीपावली की सभी देशवासियों को अनन्त शुभकामनाएं।
कामना करता हूँ कि प्रभु श्री राम के आशीर्वाद से आप सभी का जीवन सुख, शांति, सद्भाव व समृद्धि के उजास से आलोकित हो।
शुभ दीपावली..
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योग दिवस चैलेंज में हिस्सा लेने के लिए
योग दिवस चैलेंज में हिस्सा लेने के लिए आयुष कवच एप अथवा उत्तर प्रदेश राज्य आयुष सोसाइटी की वेबसाइट www.ayushup.in के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
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घर पर योग, परिवार के साथ योग
छठे अतंरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर 'घर पर योग, परिवार के साथ योग' की परिकल्पना को साकार करते हुए इस विश्वव्यापी मुहिम का हिस्सा बनें।
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Through the practice of Yoga
Through the practice of Yoga, mind can be trained to relax and stay calm. http://yoga.ayush.gov.in/
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अर्धा चक्रसन
अर्धा चक्रसन पीठ को मजबूत करता है और यह पाचन, उत्तेजक और प्रजनन अंगों सहित पेट में अंगों को भी टोन करता है ।
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पतंजलि योग-दर्शन
पतंजलि योग-दर्शन में योग | योग-दर्शन में मोक्ष को अपनाने के लिये तत्वज्ञान पर अधिक बल दिया गया है। योग-दर्शन के अनुसार तत्वज्ञान की प्राप्ति तब तक नहीं हो सकती जब तक मनुष्य चित्त विकारों से परिपूर्ण है। अतः योग-दर्शन में चित्त की स्थिरता को प्राप्त करने के लिये तथा चित्तवृत्ति का निरोध करने के लिए योग-मार्ग की व्याख्या हुई है। योग-दर्शन में योग का अर्थ चित्तवृत्तियों का निरोध है। योग-दर्शन में राजयोग का विवेचन मिलता है। योग-मार्ग की आठ सीढ़ियाँ हैं। इसीलिये इसे अष्टांगयोग भी कहा जाता है।
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“योग विज्ञान है” – ओशो
योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है।
जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।
नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।