पश्चिमोत्तानासन करने के फायदे पेट की चर्बी दूर करने में

सही तरीके से पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास करते समय पेट (abdomen) की मांसपेशियों खिंचती हैं जिसके कारण पेट और उसके आसपास की जगहों पर जमी चर्बी दूर हो जाती है।

तनाव दूर करने में पश्चिमोत्तानासन के फायदे

पश्चिमोत्तानासन करने से पूरे शरीर के साथ सिर और गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव उत्पन्न होता है जिसके कारण यह आसन तनाव, चिंता, और मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में बहुत सहायक होता है। इसके अलावा यह क्रोध और चिड़चिड़ापन (irritability) को भी दूर करता है और दिमाग को शांत रखता है।

पश्चिमोत्तानासन करने का तरीका

किसी भी आसन का अभ्यास शुरू करने से पहले उसके सही तरीकों के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेना चाहिए अन्यथा उस आसन का पूरा लाभ हमें नहीं मिल पाता है।

तो आइये जानते हैं कि पश्चिमोत्तानासन करने का सही तरीका क्या है –

हनुमानासन करते समय सावधानियां

आसन का अभ्यास करते समय कुछ बिंदु हमेशा ध्यान में रखना चाहिए क्योंकि योगा या आसन सेहत के लिए जितना लाभकारी होता है, शरीर में कोई विशेष परेशानी होने पर आसन का अभ्यास करना हानिकारक भी हो सकता है। इसलिए हनुमानासन का अभ्यास करते समय ये सावधानियां बरतें।

हनुमानासन के फायदे अस्थमा को ठीक करने में

इस आसन के दौरान लगातार सांस लेने और छोड़ने से फेफड़े(lungs) अच्छी तरह से खुल जाते हैं और अस्थमा के अटैक का खतरा कम हो जाता है। प्रतिदिन हनुमानासन का अभ्यास करने से श्वसन संबंधी बीमारियां दूर हो जाती हैं।

हनुमानासन करने के फायदे महिलाओं में बांझपन दूर करने में

यह आसन पेल्विक में खून के प्रवाह को बढ़ाने का कार्य करता है और प्रजनन अंगों(reproductive organs) को हल्का मसाज और टोन करने का काम भी करता है। यह आसन नितंबों की ओपनिंग के तनाव को कम करता है और महिलाओं में बांझपन की समस्या को दूर करने में सहायक होता है।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।