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योग

योग से शरीर के आठ ग्लैंड करते हैं सुचारू रूप से काम

नियमित योग करने से न केवल आप बीमारियों से दूर रहते हैं बल्कि शरीर के तमाम ग्लैंड भी सुचारू रूप से काम करते हैं। शरीर में ग्लैंड अहम भूमिका निभाते हैं, वो कुछ ऐसा बनाते हैं या कुछ रिलीज करते हैं जिस कारण शरीर सुचारू रूप से काम करता है। शरीर में कई प्रकार के ग्लैंड होते हैं जो मुख्य रूप से दो प्रकार एंडोसिरिन व एक्सोसिरिन के अंतर्गत आते हैं। एंडोसिरिन ग्लैंड हार्मोन बनाने के साथ रिलीज करते हैं जो हमारी रक्त कोशिकाओं से होते हुए शरीर में जाते हैं। यही हमारे विकास के साथ मेटॉबॉलिज्म, मूड, यहां तक कि रिप्रोडक्शन में मदद करते हैं।

सर्वाइकल के लिए योग : सूर्य नमस्कार

कोई भी व्यक्ति जिसे गर्दन में दर्द, कंधे में दर्द और सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस हो उसके लिए यह आसन बेहद उपयोगी है। हालांकि, इसे करते समय बेहद सावधान रहना चाहिए। अगर आपको यह आसन नहीं आता, तो किसी विशेषज्ञ के निर्देशों का पालन करते हुए ही इस आसन को करें। इससे रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है। सूर्य नमस्कार करने के लिए बारह चरणों का पालन करना होता है।

योग से जुड़ी सात भ्रांतियां

सद्‌गुरु: इस पूरी धरती पर ज्यादातर लोग योग को ‘आसन’ समझ बैठते हैं। योग विज्ञान ने जीवन से जुड़े तकरीबन हर पहलू के बारे में तमाम तरह की बातें उजागर की हैं, लेकिन आज दुनिया योग के सिर्फ शारीरिक पहलू को ही जानती है। जबकि योगिक पद्धति में आसनों को बहुत कम महत्व दिया गया है। दो सौ से भी अधिक योग सूत्रों में से मात्र एक सूत्र आसनों के लिए है। लेकिन किसी तरीके से यही एक सूत्र आजकलं खासी अहमियत पा रहा है।

योग क्या है ? योग के 10 फायदे

योग शब्द संस्कृत की ‘युज’ धातु से बना है जिसका अर्थ है जोड़ना यानि शरीर,मन और आत्मा को एक सूत्र में जोड़ना |योग के महान ग्रन्थ पतंजलि योग दर्शन में योग के बारे में कहा गया है|

“ योगश्च चित्तवृत्ति निरोध : “ l

यानि मन की वृत्तियों पर नियंत्रण करना ही योग है l

गीता में कहा गया है – योग: कर्मसु कौशलम l

यानि कर्मों में कौशल या दक्षता ही योग है।

योग के 10 फायदे  / Benefits of Yoga in Hindi

खूबसूरती को लंबे समय तक बनाए योग

योगासन के आसनों में खास बात होती है कि हर आसन अपने आप में पूर्ण होता है। योग के इन आसनों के जरिए सेहतमंद तो आप खुद को बना ही सकते है बल्कि योग के जरिए आप अपने सौंदर्य और खूबसूरती को लंबे समय तक बनाए रख सकते है। योग के ये आसन आपकी त्वचा को ढीली नहीं पड़ने देंगे। योगासन के ये आसान आसन और पोज आपके यौवन के साथ आपकी खूबसूरती को भी बनाए रखेंगे। योग के ये आसन आपको सौंदर्य से लबालब कर देंगे। हमारे चेहरे में ही सौंदर्य और खूबसूरती का राज छिपा है जिसे अपनाकर मनचाहा सौंदर्य और यौवन पाया जा सकता है। हम अपने चेहरों को एक निश्चित आकार देकर और आसान आसनों के जरिए सुंदरता और यौवन को लंबे समय तक बनाए रख सकते

क्या योग इस्लाम विरोधी है?

इस्लाम मतलब आप किस इस्लाम कि बात कर रहे है? ज़्यादातर मुस्लमान जिस हन्नाफी इस्लाम का अमल करते है उसके हिसाब से योग इस्लाम विरोधी नही है।

यदि आप वहाब्बी इस्लाम कि बात करतें हैं तो ज़िंदगी में जो चिज़े सब लोग करते है उस में से 80–90% चिज़े जैसे गाना गाना, फिल्में देखना, बिना हिजाब घर से बाहर निकलना, टी वी देखना वैगैरा सब इस्लाम विरोधी है। फिर योग तो दुर कि बात है।


योग शब्द यूजिर योगे से बना है जिसका अर्थ है जोड़ना

योग’ और ‘मेडिटेशन’ के बीच क्या अंतर है?

योग एक सम्पूर्ण प्रक्रिया व प्रणाली है जबकि मेडिटेशन या ध्यान महज एक भाग है अष्टांगिक योग प्रणाली का।

योग का अर्थ है - “मिलन”। जीव की समष्टिगत चेतना का व्यष्टिगत चेतना से एकाकार होना ही योग है।

पातंजल योगसूत्र के अनुसार - “योगश्चित्तवृत्ति निरोधः” —

अर्थात, चित्त की समस्त वृत्तियों यथा - प्रमाण-विपर्यय-विकल्प-निद्रा और स्मृति रूप समस्त वृत्तियों का पूरी तरह से निरुद्ध हो जाना ही योग है।

योग समाधि को भी कहते हैं क्योंकि यह ‘योग’ शब्द “युज् समाधौ” से निष्पन्न होता है, ना कि “युजिर् योगे” संयोग अर्थ वाली युजिर धातु से।

योग क्या है

पतंजलि योग-दर्शन में योग | योग-दर्शन में मोक्ष को अपनाने के लिये तत्वज्ञान पर अधिक बल दिया गया है। योग-दर्शन के अनुसार तत्वज्ञान की प्राप्ति तब तक नहीं हो सकती जब तक मनुष्य चित्त विकारों से परिपूर्ण है। अतः योग-दर्शन में चित्त की स्थिरता को प्राप्त करने के लिये तथा चित्तवृत्ति का निरोध करने के लिए योग-मार्ग की व्याख्या हुई है। योग-दर्शन में योग का अर्थ चित्तवृत्तियों का निरोध है। योग-दर्शन में राजयोग का विवेचन मिलता है। योग-मार्ग की आठ सीढ़ियाँ हैं। इसीलिये इसे अष्टांगयोग भी कहा जाता है।


यह अष्टांग-मार्ग इस प्रकार है

योग क्या है योगासनों के गुण एवं योगाभ्यास के लिए आवश्यक बातें

चित्तवृत्तियों का निरोध ही योग है।
(मृत्यु) दु:ख से छूटने और (अमृत) आनन्द प्राप्त करने का साधन (योग) ईश्वर उपासना करना है।

योग शब्दों के बारे में भाष्यकारों के अपने-अपने मत हैं। कुछ भाष्यकारों ने योग शब्द को ‘वियोग’, ‘उद्योग’ और ‘संयोग’ के अर्थों में लिया है, तो कुछ लोगों का कहना है कि योग आत्मा और प्रकृति के वियोग का नाम है। कुछ कहते हैं कि यह एक विशेष उद्योग अथवा यत्न का नाम है, 

​​कर्मण्येवाधिकारस्ते मां फलेषु कदाचन’ अर्थात कर्म योग

श्रीमद्भगवद्​गीता में योग शब्द का प्रयोग  व्यापक रूप में हुआ है | गीता के प्रत्येक अध्याय के नाम के साथ योग शब्द लगाया गया है जैसे ‘अर्जुन विषाद योग, सांख्य योग, कर्म योग, ज्ञान कर्म सन्यास योग आदि। एक विद्वान् के अनुसार गीता में इस शब्द उपयोग एक उद्देश्य़ से किया गया है। उन का कहना है कि जिस काल में गीता कही गयी थी, उस समय कर्म का अर्थ प्रायः यज्ञादि जैसे अनुष्ठानों के सन्दर्भ में किया जाता था। इसलिए गीता में कर्म के साथ योग शब्द जोड़ कर इसे अनुष्ठानों से अलग कर दिया। इस योग में कर्म को ईश्वर प्राप्ति का एक साधन बताया गया है। गीता में कर्म योग को