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ਯੋਗ

गुर्दे की समस्यायों लिए करें योग

आज के आधुनिक जीवनशैली के कारण लोगों को कई तरह की बीमारियाँ, जैसे- डाइबीटिज, हाई ब्लड-प्रेशर, हर्ट डिजीज आदि हो रहे हैं जिसके कारण किडनी के ऊपर बहुत बूरा प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए किडनी की बीमारी आज तेजी से बढ़ रही हैं। इस रोग का पता पहले अवस्था में ही नहीं चलता है, इसलिए किडनी को स्वस्थ रखना बहुत ज़रूरी हो जाता है।गुर्दे( Kidney) को नुकसान में कई चरणो में वर्गीकृत किया जाता है। योग केवल प्रारंभिक चरण मे मददगार होना पाया जाता है।

किस रोग में कौन से योग आसन कारगर

मोटापा : वैसे तो मात्र आंजनेय आसन ही लाभयायक सिद्ध होगा लेकिन आप करना चाहे तो ये भी कर सकते हैं- वज्रासन, मण्डूकासन, उत्तानमण्डूसकासन, उत्तानकूर्मासन, उष्ट्रासन, चक्रासन, उत्तानपादासन, सर्वागांसन व धनुरासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन, कटिचक्रासन, कोणासन, उर्ध्वाहस्तोहत्तातनासन और पद्मासन।

स्तन कैंसर में योगाभ्यास का महत्व

योग करना सामान्य मनुष्य के लिए तो स्वास्थ्यवर्धक है, और कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को योग के अभ्यास विधायक उर्जा से भर देते हैं | और स्तन कैंसर की महिलाओं के लिए योग के आसन इलाज के दौरान और इलाज के बाद भी अत्यंत जरूरी होते हैं|

एसिडिटी से हैं परेशान तो इन योगासनों का करें नियमित अभ्यास

नियमित योग करने वाले कई बीमारियों से बचे रहते हैं. एसिडिटी भी उनमें से एक है. एसीडिटी आधुनिक जीवनशैली की वजह से होने वाली आम समस्या है. खाने-पीने में जरा भी अनियमितता हुई नहीं कि एसिडिटी गले पड़ गई. इससे बचने के लिए लोग कई तरह की औषधियों और दवाइयों का इस्तेमाल करते हैं फिर भी परेशान रहते हैं.
एसीडिटी की समस्याओं से बचने के लिए अपनाएं ये आसान से योगासन-

मत्स्यासन
यह आसन मांसपेशियों के लिए बहुत लाभदायक है. इसके नियमित अभ्यास से एसिडिटी की समस्या से राहत मिलती है.

ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਐਸਿਡਿਟੀ ਤੋਂ ਪ੍ਰੇਸ਼ਾਨ ਹੋ, ਤਾਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਯੋਗਾਸ਼ਾਂ ਦਾ ਨਿਯਮਿਤ ਅਭਿਆਸ ਕਰੋ

ਜੋ ਨਿਯਮਿਤ ਯੋਗਾ ਕਰਦੇ ਹਨ ਉਹ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਤੋਂ ਬਚ ਜਾਂਦੇ ਹਨ. ਐਸਿਡਿਟੀ ਵੀ ਉਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚੋਂ ਇਕ ਹੈ. ਐਸਿਡਿਟੀ ਆਧੁਨਿਕ ਜੀਵਨ ਸ਼ੈਲੀ ਦੇ ਕਾਰਨ ਆਮ ਸਮੱਸਿਆ ਹੈ. ਖਾਣ-ਪੀਣ ਵਿਚ ਕੋਈ ਮਾਮੂਲੀ ਬੇਨਿਯਮੀ ਨਹੀਂ ਹੋਈ ਕਿ ਐਸਿਡਿਟੀ ਗ੍ਰਹਿਣ ਕੀਤੀ ਗਈ. ਲੋਕ ਇਸ ਤੋਂ ਬਚਣ ਲਈ ਕਈ ਕਿਸਮਾਂ ਦੀਆਂ ਦਵਾਈਆਂ ਅਤੇ ਦਵਾਈਆਂ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਦੇ ਹਨ, ਫਿਰ ਵੀ ਉਹ ਪ੍ਰੇਸ਼ਾਨ ਰਹਿੰਦੇ ਹਨ.
ਐਸਿਡਿਟੀ ਦੀਆਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਤੋਂ ਬਚਣ ਲਈ, ਇਸ ਯੋਗ ਯੋਗ ਅਭਿਆਸ ਨੂੰ ਅਪਣਾਓ-

ਮਾਤਸਿਆਸਨ
ਇਹ ਆਸਣ ਮਾਸਪੇਸ਼ੀਆਂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਫਾਇਦੇਮੰਦ ਹੈ. ਇਸ ਦੇ ਨਿਯਮਤ ਅਭਿਆਸ ਨਾਲ ਐਸਿਡਿਟੀ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਤੋਂ ਛੁਟਕਾਰਾ ਮਿਲਦਾ ਹੈ.

योग से गैस की दिक्कत को यूं करें गायब

पेट गैस को अधोवायु बोलते हैं। इसे पेट में रोकने से कई बीमारियां हो सकती हैं, जैसे एसिडिटी, कब्ज, पेटदर्द, सिरदर्द, जी मिचलाना, बेचैनी आदि। लंबे समय तक अधोवायु को रोके रखने से बवासीर भी हो सकती है। आयुर्वेद कहता है कि आगे जाकर इससे नपुंसकता और महिलाओं में यौन रोग होने की भी आशंका हो सकती है।

गैस बनने के लक्षण 
पेट में दर्द, जलन, पेट से गैस पास होना, डकारें आना, छाती में जलन, अफारा। इसके अलावा, जी मिचलाना, खाना खाने के बाद पेट ज्यादा भारी लगना और खाना हजम न होना, भूख कम लगना, पेट भारी-भारी रहना और पेट साफ न होने जैसा महसूस होना।

योग का महत्व

यह प्रमाणित तथ्य हैं की योग मुद्रा, ध्यान और योग में श्वसन की विशेष क्रियाओं द्वारा तनाव से राहत मिलती है, योग मन को विभिन्न विषयों से हटाकर स्थिरता प्रदान करता है और कार्य विशेष में मन को स्थिर करने में सहायक होता है.

हम मनुष्य किसी चीज़ की ओर तभी आकर्षित होते हैं जब उनसे हमें लाभ मिलता है. जिस तरह से योग के प्रति हमलोग आकर्षित हो रहे हैं वह इस बात का संकेत हैं कि योग के कई फायदे हैं. योग को न केवल हमारे शरीर को बल्कि मन और आत्मिक बल को सुदृढ़ और संतुष्टि प्रदान करता है. दैनिक जीवन में भी योग के कई फायदे हैं, आइये! इनसे परिचय करें.

योग द्वारा जोड़ों के दर्द का उपचार

अपने दैनिक जीवन के सामान्य कामकाज को निपटाते वक्त क्या आपके घुटनों, कन्धों या कलाई में दर्द होता है? क्या आप इन जोड़ों के दर्द के कारण अपने अपनी इच्छानुसार जीवन जीने के आनंद से वंचित है? क्या आप दिन में कई कई बार दर्द निवारक दवाओं के सेवन से परेशान है?

सर्वाइकल के लिए योग : मत्स्यासन

मत्स्यासन यानी मछली की तरह किया जाने वाला आसन। यह योगासन हमारी रीढ़ की हड्डी को मजबूती और लचीलापन प्रदान करता है। इसके साथ ही, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस की समस्या से राहत मिलती है। इस आसन को करने से हमारे कंधे और गर्दन की मांसपेशियों को भी आराम मिलता है।

कसरत, योग और फ़िटनेस की आवश्यकता

अन्य देशों जैसा हमारे यहाँ शारीरिक तन्दुरूस्ती पर खास ध्यान नहीं दिया जाता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे देशों में जनसंख्या के एक बड़े हिस्से को अपना जीवन यापन करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। पर हम आगे देखेंगे यह ज़रूरी नहीं है कि कड़ी मेहनत से शारीरिक तंदरुस्ती सुनिश्चित हो जाए। शारीरिक कसरत से ताकत भी बढ़ती है और तनाव और थकान को झेलने की क्षमता भी। इससे कुछ स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव होता है, स्वास्थ्य में सुधार होता है और कई एक बीमारियॉं ठीक भी हो जाती हैं। इस अध्याय में शारीरिक तन्दुरूस्ती क्या है इसके बारे में हम जानेंगे और कुछ एक कसरतों के मुख्य अवयवों के बारे में भी।