अर्ध मत्स्येन्द्रासन योग करने के फायदे हार्ट ब्लॉकेज में

हार्ट ब्लॉकेज को ठीक करने के लिए आप अर्ध मत्स्येन्द्रासन योग करें। यह ख़राब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। अर्ध मत्स्येन्द्रासन योग को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को बिछा के उस पर दण्डासन में बैठ जाएं। अपने दायं पैर को बाएं पैर के घुटने के साइड में बाहर की ओर रखें। रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें अपने गर्दन कंधे और कमर को दाहिनी ओर घुमा लें। कुछ सेकंड के लिए इस मुद्रा में रहे और फिर यही पूरी प्रक्रिया दूसरे पैर से करें।

हार्ट ब्लॉकेज के लिए योग धनुरासन

धनुरासन योग हार्ट ब्लॉकेज को ठीक करने में मदद करता है। यह आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रण में लाने में मदद करता है। धनुरासन योग को करने के लिए एक योगा मैट को जमीन पर बिछा के उस पर पेट के बल लेट जाएं। अब अपने दोनों हाथों को शरीर के समांतर रखें, अब अपने दोनों पैरों को पीछे की ओर घुटनों के यहाँ से मोड़े। अपने हाथों को पीछे की ओर ले जाएं और दोनों पैरों को दोनों हाथों से पकड़ लें। इस आसन में कम से कम 20 से 30 सेकंड तक रुकने का प्रयास करें। अंत में दोनों हाथों को खोल के अपनी प्रारंभिक स्थिति में आयें।

हार्ट ब्लॉकेज के लिए योग

हार्ट ब्लॉकेज के लिए योग करना बहुत ही फायदेमंद होता है। योग के दौरान गहरी और लंबी साँस लेना आपको सभी प्रकार के हृदय रोगों से दूर रखता है। हार्ट ब्लॉकेज का मुख्य कारण खराब कोलेस्ट्रॉल का बॉडी में अधिक होना है।

OSHO: I Am Ignorant

For years Osho has spoken to a worldwide audience on timeless issues such as meditation, freedom, love, happiness, and enlightenment. In these talks, the human mind is put under the microscope as never before, analyzed to the smallest wrinkle. In the process Osho exposes hypocrisy and humbug wherever he sees it.

शुरुआती योगा अभ्यास दिन 15

यह शुरुआती योगा अभ्यास का दिन 15 है । यह सीरीज़ इस तरह से बनाया गया है कि कोई भी व्यक्ति योगा को आराम से समझ पाए और योग का लाभ उठा सके । इस वीडियो में मैंने समझाया गया है * सुखासन * बद्धकोणासन * जानुशीर्षासन * पश्चिमोत्तानासन * उत्तानासन * मरीच्यासन * शवासन * भस्त्रिका ========================== आप मुझसे इंस्टाग्राम पे कनेक्ट कर सकते हैं https://www.instagram.com/prakash.shristi/

मन को शांत करने के लिए मेडिटेशन करें

चिंता मुक्त रहने के लिए मेडिटेशन करना सबसे अच्छा और प्रभावी तरीका है। यह मेडिटेशन योग दिमाग में चल रही उथल पुथल को शांत करके दिमाग को आराम देता है। मेडिटेशन करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को जमीन पर बिछा कर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। अब गहरी लंबी साँस लें और छोड़ें। इसे योग को आप अपनी क्षमता के अनुसार कर सकते है।

शवासन योग से शांत करें भावनात्मक उथल-पुथल को

शवासन योग आसान को आराम की मुद्रा कहा जाता है, क्योंकि इसे सभी योग आसान को करने के बाद में किया जाता है। मन को शांत और प्रसन्न रखने में शवासन योग आपकी मदद कर सकता है। टेंशन को दूर करने के लिए शवासन योग आसन एक बहुत ही अच्छा माध्यम है।

मूड स्विंग के लिए योग में करें विपरीत करणी

विपरीता करणी एक संस्कृत शब्द है जो उल्टे होने के एक कार्य को दर्शाता है। यह मन को शांत करने और मूड स्विंग आदि से राहत देता है। विपरीत करणी योग करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को फर्श पर बिछा के उस पर पीठ के बल लेट जाएं और दोनों हाथ और पैरों को जमीन पर सीधा रखें।

अब धीरे-धीरे दोनों पैरों को ऊपर उठायें और अपने ऊपर के शरीर को फर्श पर ही रखा रहने दें। अपने दोनों पैरों को 90 डिग्री कोण तक ऊपर उठायें। आप आराम पाने के लिए अपने कूल्हों के नीचे किसी तकिये या कंबल को मोड़ के रखें लें। अपनी आँखों को बंद करें और इस स्थिति में आप कम से कम पांच मिनट के लिए रुकें।

माइंड फ्रेश करने के लिए करें सुप्त बद्ध कोणासन योग

अपने दिमाग में चल रही कई प्रकार की परेशानी से राहत पाने में सुप्त बद्ध कोणासन योग आपकी सहायता कर सकता है। योग आपके दिमाग को तनाव मुक्त करके माइंड फ्रेश करने में आपकी मदद करता है।

सुप्त बद्ध कोणासन योग को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को साफ जगह में बिछा के दोनों पैरों को सीधा करके बैठ जाएं। इसके बाद दोनों पैर को अपनी ओर मोड़ लें और दोनों पैरों के पंजों से पंजे मिलाएं। अब हाथों को ऊपर करके, पीछे की ओर फर्श पर लेट जाएं। इस योग को आप 2 से 3 मिनिट के लिए करें।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।