सूर्य नमस्कार वजन बढ़ाने के लिए

सुबह सूर्य नमस्कार करने से शरीर में ऊर्जा आती है और वह चुस्त दुरुस्त रहता है। यह योग वजन बढ़ाने के लिए बहुत असरदार है। सूर्य नमस्कार के लिए सबसे पहले सीधे खड़े होकर दोनों हाथों को जोड़कर नमस्कार की मुद्रा में आ जाएं। शरीर को धीरे धीरे झुकाते हुए हाथों से पैरों को छूने का प्रयास करें।

वापस पहले वाली मुद्रा में आ जाएं। अब एक पैर को पीछे करके दूसरे पैर को आगे की ओर निकालें और घुटना मोड़ लें। इसी मुद्रा में थोड़ी देर रुकिए।

सूर्य नमस्कार का असर कंधों और छाती पर ज़्यादा पड़ता है। वजन बढ़ाने के उपाय के रूम में इस योग की सभी 12 मुद्राओं को 5-5 सेकेंड का समय देना चाहिए।

सर्वांगासन वजन बढ़ाने के लिए

जल्दी जल्दी वजन बढ़ाने के लिए सर्वांगासन योग कीजिए। इस आसन में जमीन पर लेटकर पैरों को ऊपर उठाना होता है, जबकि कंधे और गर्दन नीचे रहते हैं। इसको करने से शरीर में रक्त संचार बढ़िया होता है, खाना अच्छे से पचता है और भूख बढ़ती है।

योग द्वारा वजन बढ़ाने के उपाय

सुबह जल्दी उठकर योग करने से फायदा मिलता है। लेकिन अगर आप योग पहली बार करने जा रहे है तो योग किसी योगाचार्य की देखरेख में ही करें।

योग के द्वारा वजन बढ़ाने के तरीके

अगर आप भी अपने दुबलेपन से परेशान है और सब उपाय करके देख चुके है फिर भी आपका दुबलापन नहीं जा रहा है तो आपको योग का सहारा जरुर काम आयेगा सुनने में थोडा अजीब लगा ना, आपने देखा होगा कि दुबले पतले लोग वजन बढ़ाने के लिए बहुत परेशान रहते हैं। कई कोशिशें करने के बाद भी मनचाहे परिणाम नहीं मिलते हैं। तब योग ही वजन बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका बचता हैं।

योग से बिना किसी दुष्प्रभाव का सामना किए वजन बढ़ाया जा सकता है। योग करने के साथ-साथ आपको पोषक तत्वों से भरपूर भोजन भी करना चाहिए। जिससे आपको अच्छे परिणाम प्राप्त होगे

चक्रासनम

चक्रासन करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और शरीर लचीला बनता है। इसके अभ्यास से पेट की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में भी मदद मिलती हैं।

धनुरासन

धनुरासन पेट की चर्बी तेजी से घटाने में मददगार है धनुरासन के नियमित अभ्यास से कब्‍ज़, पीठ दर्द, पेट की सूजन, थकान और मासिक धर्म के समय होने वाली समस्याएं दूर हो जाती है। साथ ही शरीर में रक्त का संचार अच्छे से होता है। इससे आपके शरीर में लचीलापन भी आता है।

बालासन

इस आसन को रोज करने से मांसपेशियां मजबूत होती हैं और पेट की चर्बी घटती है।

बालासन करने की विधि
सबसे पहले आसान बिछाइए।
फिर दोनों घुटने के बल जमीन पर बैठ जाइए।
अब आपके शरीर का सारा भार आपकी पैरों की एड़ियों पर होना चाहिए।
एक लम्बी गहरी सांस लेते हुए शरीर को आगे की ओर झुकाएं।
इस मुद्रा में आपका सीना जांघों को और माथा फर्श को छूएगा।
कुछ सेकंड इस अवस्था में रहें और वापस उसी अवस्था में आ जाएं।
 

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।