भोजन के बाद वज्रासन करने के फायदे पाचन में
नियमित रूप से खाना खाने के बाद वज्रासन योग करना आपकी पाचन क्रिया में सुधार कर सकता है। आप जब इस योग को करते है तो पाचन अंगों की वैस्कुलेरिटी यानी ब्लड फ्लो बढ़ता है। यदि आप अपच या कब्ज आदि की समस्या से परेशान है तो रूप से इस योग को करें, इससे आपको राहत मिलेगी।
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भोजन के बाद वज्रासन के फायदे विषाक्त पदार्थ दूर करने में
यदि आपके शरीर में जमा विषाक्त पदार्थ बाहर निकलने में कठिनाई होती हो तो भोजन के बाद वज्रासन करने से मल-मूत्र में त्यागने में काफी आसानी होती है और शरीर में बीमारियां नहीं लगती हैं।
वज्रासन योग, भोजन के बाद करने के फायदे एसिडिटी में
गैस और एसिडिटी के कई साधारण कारण हो सकते हैं। यह हमारे खाना खाने के कारण हो सकता है जो अत्यधिक तैलीय, नमकीन, मसालेदार या मीठा होता है। एसिडिटी का एक अन्य संभावित कारण खाना खाने के तुरंत बाद सोना हो सकता है। इस समस्या से बचने के लिए आप खाना खाने के तुरंत बाद वज्रासन योग को करें।
भोजन के तुरंत बाद वज्रासन करने से नहीं होती है अपच की समस्या, टमी भी रहती है फ्लैट
कभी कभी हम अपने पसंदीदा भोजन के मिलने पर अधिक भोजन कर लेते है, जिसकी वजह से अपच आदि की समस्या होने लगती है। अधिक भोजन करने से पेट भी बाहर निकलने लगता हैं। इस सब से बचने के लिए आप भोजन करने के तुरंत बाद वज्रासन योग को करें, यह बहुत ही लाभदायक होता है।किसी भी योग को करने का सही समय ही उसके लाभ प्राप्त करने में मदद करता है। सभी योग आसान को करने का सबसे अच्छा समय सुबह खाली पेट होता है, लेकिन वज्रासन योग को खाना खाने के तुरंत बाद करना अधिक लाभकारी माना जाता है। यह पाचन क्रिया को स्वस्थ रखने, अपच की समस्या से छुटकारा पाने और पेट को कम करने में भी मदद करता है।
पश्चिमोत्तानासन करते समय सावधानियां
किसी भी आसन का अभ्यास करने पर फायदों के साथ उसके कुछ नुकसान भी होते हैं। लेकिन आमतौर पर नुकसान तब होता है जब शरीर में कोई विशेष परेशानी हो औऱ हम उसकी अनदेखी कर किसी आसन का अभ्यास कर रहे हों। आइये जानते हैं पश्चिमोत्तानासन में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।
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पश्चिमोत्तानासन के फायदे अनिद्रा की समस्या दूर करने में
इस आसन का अभ्यास करने से व्यक्ति को सही तरीके से नींद आती है और अनिद्रा (insomnia) की समस्या दूर हो जाती है। इसके अलावा उच्च रक्तचाप, बांझपन (infertility) और डायबिटीज की समस्या को दूर करने में भी यह आसन फायदेमंद होता है।
बेहतर पाचन के लिए फायदेमंद है पश्चिमोत्तानासन
पश्चिमोत्तानासन करने से पाचन क्रिया बेहतर होती है और खाना न पचने के कारण अक्सर कब्ज एवं खट्टी डकार आने की समस्या दूर हो जाती है। इसके अलावा प्रतिदिन इस आसन का अभ्यास करने से किडनी, लिवर, महिलाओं का गर्भाशय एवं अंडाशय अधिक सक्रिय(activated) होता है।
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पश्चिमोत्तानासन करने के फायदे महिलाओं के लिए
डिलीवरी के बाद पश्चिमोत्तानासन का प्रतिदिन अभ्यास करने से महिलाओं का शरीर फिर से अपनी प्रारंभिक आकृति में आ जाता है और पेट एवं कूल्हों की चर्बी कम हो जाती है। इसके अलावा यह आसन करने से मासिक धर्म भी सही तरीके से होता है।
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नपुंसकता दूर करने में पश्चिमोत्तानासन के फायदे
पश्चिमोत्तासनासन एक ऐसा आसन है जिसका प्रतिदिन अभ्यास करने से नपुंसकता दूर हो जाती है और व्यक्ति के यौन शक्ति में वृद्धि होती है। इसके अलावा पेट और श्रोणि अंग (pelvic organs) भी अच्छे तरीके से टोन हो जाते हैं।
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पश्चिमोत्तानासन करने के लाभ हड्डियों को लचीला बनाने में
पश्चिमोत्तानासन रीढ़ की हड्डी में खिंचाव उत्पन्न करता है और उन्हें लचीला बनाने का काम करता है। इसके अलावा इस आसन का अभ्यास करने से व्यक्ति की लंबाई भी बहुत आसानी से बढ़ने लगती है।
“योग विज्ञान है” – ओशो
योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है।
जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।
नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।