योगासन दिलाए पीरियड्स के दर्द में आराम

कई महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान शरीर, खासतौर कमर में काफी दर्द होता है। इस दर्द को दूर करने के लिये आप योगासनों का सहारा ले सकती हैं। योग के पास हर बीमारी का इलाज है इसलिये इन्‍हें एक बार जरुर आजमाइये। नियमित तौर पर इन आसनों को करने से आपकी कमर और अन्‍य हिस्‍से मजबूत बनेंगे। आसन करने से शरीर के हर हिस्‍से स्‍ट्रेच होते हैं तथा खून का संचार अच्‍छी प्रकार से होने लगता है, जिससे शरीर की थकान, पेट की सूजन, गैस और दर्द आदि दूर होते हैं। आइये जानते हैं कि कौन-कौन से हैं वे योगासन जिन्‍हें करने से मासिकधर्म का दर्द दूर हो सकता है।

योग के आसन दूर कर सकते हैं डिप्रेशन

अक्सर किसी को खोने या जीवन में छोटी-बड़ी घटनाएं घटने से हम डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं। कई बार हम लंबे समय तक इसे नजरंदाज करते रहते हैं। इस तरह ना तो हम प्रफेशनली अपना बेस्ट दे पाते हैं और न ही निजी जिंदगी में खुश रह पाते हैं। ऐसा माना गया है कि डिप्रेशन का इलाज योग में भी है। आइए जानें कि किस तरह दिनचर्या से कुछ वक्त निकालकर योग के जरिए हम डिप्रेशन को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं- 

पैंक्रियास के लिए योग हलासन

हलासन एक और बेहतरीन योग आसन है जो थकान और तनाव को कम करने में मदद करता है। पैंक्रियास के लिए हलासन योग बहुत ही लाभदायक होता है। इसके अलावा, यह पाचन में भी सुधार करता है और भूख को नियंत्रित करता है। इस आसन को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट बिछा के सीधे हाथ पैर कर के लेट जाएं। अब अपने दोनों पैरों को कमर के यहाँ से मुड़े और उनकों ऊपर करें। अपने दोनों हाथों को सीधा जमीन पर ही रखें रहने दें। अब दोनों पैरों को धीरे-धीरे अपने सिर के पीछे की ओर जमीन से लगाने की कोशिश करें। एक मिनट के लिए इस स्थिति में रहें, फिर साँस छोड़ें और अपने पैरों को नीचे लाएं।

पैंक्रियास के लिए योग गोमुखासन

पैंक्रियास के लिए योग गोमुखासन बहुत ही लाभदायक माना जाता है यह मूत्राशय को सक्रिय करता है, गुर्दे की कार्यप्रणाली में सुधार करता है और मधुमेह को भी नियंत्रित करता है। गोमुखासन विश्राम को प्रेरित करने के लिए उत्कृष्ट आसन है। यह आसन न केवल छाती के क्षेत्र को खोलता है बल्कि पीठ दर्द, थकावट, तनाव और चिंता को कम करता है। इस आसन को करने के लिए आप आप सबसे एक योगा मैट बिछा के सुखासन में बैठ जाएं। अपने दाएं पैर को खिंच के अपने शरीर के पास लाएं फिर अपने बाएं पैर को भी खिंच के दाएं पैर की जांघ के ऊपर से अपने पास लाएं। अब अपने दाएं हाथ को कंधे के ऊपर से पीठ पर ले जाएं और बाएं हाथ को कोहनी के यह से मोड़े

पादहस्तासन योग करने करते समय यह सावधानी रखें

पादहस्तासन योग एक मध्यम स्तर का योग है इसे थोड़े अभ्यास के साथ अच्छी तरह से किया जा सकता है। पादहस्तासन योग करने के लिए आप निम्न बातों को अपने ध्यान में रखें-

  • यदि आप सायटिका की समस्या से परेशान हैं तो आप इस आसन को ना करें।
  • अगर आप पीठ के दर्द से परेशान हैं तो आप इस आसन को ना करें।
  • अगर आपकी जांघों में दर्द या हैमस्ट्रिंग में समस्या हैं तो आपको इस योग को करने से बचना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाएं इस आसन को करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

पादहस्तासन योग करने फायदे शारीरिक ग्रंथि को उत्तेजित करने में

शारीरिक ग्रंथि को उत्तेजित करने में पादहस्तासन योग लाभदायक होता है। यह योग पीनियल और अधिवृक्क ग्रंथि को उत्तेजित करके उनकी कार्य प्रणाली को बेहतर बनता है। पादहस्तासन योग लीवर और गुर्दों को स्वस्थ रखने के लिए एक अच्छा आसन हैं। लीवर और किडनी हमारे शरीर का मुख्य अंग होते हैं यह हमारे शरीर में विभिन्न प्रक्रार के महत्वपूर्ण कार्य जैसे पोषक तत्वों का भंडारण, पदार्थों को छानना, अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकलना आदि कार्य करते हैं। इस अंगों का अच्छे से काम करने पर हमें भोजन का अधिक लाभ मिलता हैं।

योग से जुड़ी सात भ्रांतियां

सद्‌गुरु: इस पूरी धरती पर ज्यादातर लोग योग को ‘आसन’ समझ बैठते हैं। योग विज्ञान ने जीवन से जुड़े तकरीबन हर पहलू के बारे में तमाम तरह की बातें उजागर की हैं, लेकिन आज दुनिया योग के सिर्फ शारीरिक पहलू को ही जानती है। जबकि योगिक पद्धति में आसनों को बहुत कम महत्व दिया गया है। दो सौ से भी अधिक योग सूत्रों में से मात्र एक सूत्र आसनों के लिए है। लेकिन किसी तरीके से यही एक सूत्र आजकलं खासी अहमियत पा रहा है।

योग क्या है योगासनों के गुण एवं योगाभ्यास के लिए आवश्यक बातें

चित्तवृत्तियों का निरोध ही योग है।
(मृत्यु) दु:ख से छूटने और (अमृत) आनन्द प्राप्त करने का साधन (योग) ईश्वर उपासना करना है।

योग शब्दों के बारे में भाष्यकारों के अपने-अपने मत हैं। कुछ भाष्यकारों ने योग शब्द को ‘वियोग’, ‘उद्योग’ और ‘संयोग’ के अर्थों में लिया है, तो कुछ लोगों का कहना है कि योग आत्मा और प्रकृति के वियोग का नाम है। कुछ कहते हैं कि यह एक विशेष उद्योग अथवा यत्न का नाम है, 

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।