खाना खान के बाद वज्रासन करने के लाभ पीरियड में

महिलाओं के लिए भोजन के बाद वज्रासन योग करना पीरियड के समय लाभदायक होता है। यह योग महिलाओं में होने वाली अनियमित माहवारी और दर्द को कम करने में सहायक होते है। महिलाओं के लिए पीरियड्स का समय बहुत ही पीड़ादायक होता। वज्रासन योग करने से उस समय होने वाले दर्द, ऐंठन और तनाव से छुटकारा मिलता है।

वज्रासन करते समय बरतें सावधानियां

दि आप इस योग को करते समय लापरवाही करते हैं तो यह नुकसानदायक हो सकता है। लेकिन यदि आपके शरीर में किसी विशेष तरह की परेशानी हो तो आपको डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी योग आसन नहीं करना चाहिए।

स्लिप डिस्क के लिए योगासन

क्या आपको भी कभी कभी कमर में अचानक से बहुत तेज दर्द होता है? यदि हां तो यह समस्या स्लिप डिस्क की वजह से हो सकती है। स्लिप डिस्क को हर्नियेट डिस्क (herniate Disc) के नाम से भी जाना जाता है। स्लिप डिस्क की समस्या आज बढ़ाती जा रही है, यह अधिकांश 22 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों को अधिक परेशान करती है। आप इसका इलाज योग की मदद से कर सकते है, आज हम आपको स्लिप डिस्क के लिए योगासन के बारे में बताएंगे।

योग का अर्थ,परिभाषा महत्व एवं उद्देश्य

प्रस्तावना ज्ञान का मूल वेदों में निहित है। दार्शनिक चिन्तन तथा वैदिक ज्ञान का निचोड आत्म तत्व की प्राप्ति है। आत्मतत्व की प्राप्ति का साधन योग विद्या के रूप में इनमें (वेद) उपलब्ध है। योगसाधना का लक्ष्य कैवल्य प्राप्ति है। वैदिक ग्रन्थ, उपनिषद्, पुराण और दर्शन आदि में यत्र-तत्र योग का वर्णन मिलता है । जिससे यह पुष्टि होती है कि योग वैदिक काल से सृष्टि में उपलब्ध है। योग के अर्थ एवं परिभाषाओं का वर्णन प्रस्तुत इकाई में किया जा रहा है।

शून्य मुद्रा

शून्य मुद्रा  -मध्यमा उंगली आकाश तत्व का प्रतिनिधित्व करती है। मध्यमा अँगुली (बीच की अंगुली) को हथेलियों की ओर मोड़ते हुए अँगूठे से उसके प्रथम पोर को दबाते हुए बाकी की अँगुलियों को सीधा रखने से शून्य मुद्रा बनती हैं। 

शून्य मुद्रा करने का समय व अवधि : शून्य मुद्रा को प्रतिदिन तीन बार प्रातः,दोपहर,सायं 15-15 मिनट के लिए करना चाहिए | एक बार में भी 45 मिनट तक कर सकते हैं |

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।