Skip to main content

मुद्रा

सूर्य मुद्रा करने की विधि

सूर्य मुद्रा को करने के लिए हम यहाँ पर आपको कुछ स्टेप बता रहे हैं जिसके बाद आप आसानी से सूर्य मुद्रा को घर पर कर सकते हैं-

सूर्य मुद्रा को करने के लाभ

सूर्य मुद्रा के बहुत ही अद्भुत लाभ हैं, यह मुद्रा मानसिक और शारीरिक दोनों ही प्रकार से हमारे लिए लाभदायक हैं, आइये इसके लाभ को हम विस्तार से जानते हैं-

सूर्य मुद्रा के फायदे शारीरिक ऊर्जा के लिए

सूर्य मुद्रा हमारे शरीर में गर्मी पैदा करता हैं जिससे हमारा शरीर गर्म रहता हैं, यह गर्मी हमारे तब कम आती हैं जब हम शीतल मौसम में होते हैं, अगर आप अधिक ठंडी से परेशान हैं तो आप इसे अपना सकते हैं, इससे आपके शरीर में गर्मी बनी रहेगी।

सूर्य मुद्रा करने के फायदे पाचन करें ठीक

पाचन को ठीक करने के लिए सूर्य मुद्रा एक अच्छा योग हैं, यह हमारे पाचन को ठीक करता हैं और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायता करता हैं।

सूर्य मुद्रा के लाभ से वजन कम करें

सूर्य मुद्रा के वैसे तो अनेक लाभ हैं जिनमे से एक यह भी हैं कि यह वजन को कम करने मदद करती हैं, अगर आप भी मोटे होने के कारण अधिक वजन से परेशान हैं तो सूर्य मुद्रा आपके लिए बहुत ही लाभदायक हैं। सामान्यतः प्रसव के बाद जिन महिलाओं का वजन बढ़ जाता हैं तो उनके लिए सूर्य मुद्रा बहुत ही लाभकारी होती हैं, क्योंकि यह पाचन ठीक करती हैं। जिससे यह महिलाओं में वजन कम करने में मदद करती हैं।

सूर्य मुद्रा से करें बीमारियाँ ठीक

सूर्य मुद्रा हमारे शरीर में अग्नि तत्व को बढ़ा देती हैं जिसके कारण शरीर में गर्मी अधिक हो जाती हैं जो हमें सर्दी जुकाम, कफ, दमा, निमोनिया, अस्थमा, प्लुरीसी जैसी बीमारियों से बचाती हैं, यह शरीर को गर्म रखती हैं इसलिए ठंड के सभी रोगों में लाभकारी हैं। यह हमें सुबह उठ के रोज 10 से 15 मिनिट करनी हैं।

सूर्य मुद्रा करने का समय व अवधि

किसी भी प्रकार के योग को नियमित करने की आवश्यकता होती हैं अतः हमे सूर्य मुद्रा रोज करनी चाहियें, अच्छे परिणाम के लिए हमें यह मुद्रा सुबह और शाम के समय करनी चाहियें, शाम के समय आप सूर्य मुद्रा को सूर्यास्त से पहले कर सकते हैं। यह मुद्रा आप 8 मिनिट से 25 मिनिट तक दिन में तीन बार कर सकते हैं। प्रतेक बार सूर्य मुद्रा करने में कम से कम एक घंटे का अंतराल अवश्य होना चाहिए।

सूर्य मुद्रा में बरती जाने वाली सावधानियां

सूर्य मुद्रा करने के वैसे तो अनेक लाभ हैं पर इसे करने से पहले कुछ सावधानी रखनी बहुत जरुरी हैं आप इस मुद्रा को एक दिन में केवल 3 बार ही 15-15 मिनिट के लिए कर सकते हैं। इसे भोजन के पहले करें और सूर्य मुद्रा करने के बाद कम से कम एक घंटे तक भोजन ना करें।गर्मी के मौसम में इसे ज्यादा देर तक ना करें और गर्मी के समय सूर्य मुद्रा करने से पहले थोड़ा पानी पी लेना चाहिए। अधिक रक्तचाप वाले और कमजोर, दुर्बल व्यक्ति इसे ना करें। शरीर में अधिक कमजोरी होने पर सूर्य मुद्रा को ना करें।

प्राणायाम एवं ध्यान पर बैठने की मुद्राएँ

प्राणायाम एवं ध्यान पर बैठने की मुद्राएँ

योग में पाँच सर्वश्रेष्ठ बैठने की अवस्थाएँ/स्थितियाँ हैं :
सुखासन - सुखपूर्वक (आलथी-पालथी मार कर बैठना)।

सिद्धासन - निपुण, दक्ष, विशेषज्ञ की भाँति बैठना।

वज्रासन - एडियों पर बैठना।

अर्ध पद्मासन - आधे कमल की भाँति बैठना।

पद्मासन - कमल की भाँति बैठना।

ध्यान लगाने और प्राणायाम के लिये सभी उपयुक्त बैठने की अवस्थाओं के होने पर भी यह निश्चित कर लेना जरूरी है कि :
शरीर का ऊपरी भाग सीधा और तना हुआ है।

सिर, गर्दन और पीठ एक सीध में, पंक्ति में हैं।

प्राण, अपान और अपानवायु मुद्रा

मुद्राओं का जीवन में बहुत महत्व है। मुद्रा दो तरह की होती है पहली जिसे आसन के रूप में किया जाता है और दूसरी हस्त मुद्राएँ होती है। मुद्राओं से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ प्राप्त किया जा सकता है। यहाँ प्रस्तुत है प्राण, अपान और अपानवायु मुद्रा की विधि और लाभ।

प्राण मुद्रा : छोटी अँगुली (चींटी या कनिष्ठा) और अनामिका (सूर्य अँगुली) दोनों को अँगूठे से स्पर्श करो। इस स्थिति में बाकी छूट गई अँगुलियों को सीधा रखने से अंग्रेजी का 'वी' बनता है।