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प्राणायाम

प्राणायाम एवं ध्यान पर बैठने की मुद्राएँ

प्राणायाम एवं ध्यान पर बैठने की मुद्राएँ

योग में पाँच सर्वश्रेष्ठ बैठने की अवस्थाएँ/स्थितियाँ हैं :
सुखासन - सुखपूर्वक (आलथी-पालथी मार कर बैठना)।

सिद्धासन - निपुण, दक्ष, विशेषज्ञ की भाँति बैठना।

वज्रासन - एडियों पर बैठना।

अर्ध पद्मासन - आधे कमल की भाँति बैठना।

पद्मासन - कमल की भाँति बैठना।

ध्यान लगाने और प्राणायाम के लिये सभी उपयुक्त बैठने की अवस्थाओं के होने पर भी यह निश्चित कर लेना जरूरी है कि :
शरीर का ऊपरी भाग सीधा और तना हुआ है।

सिर, गर्दन और पीठ एक सीध में, पंक्ति में हैं।

अधिक समय तक सेक्स करे अनुलोम विलोम प्राणायाम से

अनुलोम विलोम प्राणायाम एक साँस लेने की तकनीक है और यह श्वसन एलर्जी, राइनाइटिस (rhinitis), साइनसाइटिस (sinusitis), सर्दी और खांसी जैसी कई समस्याओं को हल करने में मदद करने के लिए जानी जाती है। इसके अलावा अनुलोम विलोम प्राणायाम यौन आनंद को बढ़ाने में भी मदद करता है और संभोग की भावना को रोकता है। यह स्खलन में देरी करने में भी मदद करता है और पूरे शरीर को ताकत देता है। इस आसन को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को जमीन पर बिछा कर सुखासन या वज्रासन में बैठ जाएं।

बालों को उगाये अनुलोम विलोम प्राणायाम योग –

अनुलोम विलोम प्राणायाम योग फेफड़ों के काम को बेहतर बनाने और अवसाद तथा तनाव को दूर करने में मदद करता है, जो बालों के झड़ने का मुख्य कारण है। यह साँस लेने का व्यायाम फेफड़ों को स्वस्थ रखता है और शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त के प्रवाह को भी उत्तेजित करता है जो खोपड़ी को भी पोषण देता है जिसके कारण बाल फिर से उगना प्रारंभ हो जाते है। अनुलोम विलोम प्राणायाम योग को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को जमीन पर बिछा कर सुखासन या वज्रासन में बैठ जाएं।अब अपने दाहिने हाथ को ऊपर उठायें और अंगूठे से दाहिने नाके नथुने को बंद करके बाएं नथुने से लम्बी साँस लें अब अपने दाहिने हाथ की अनामिका से बाएं नथुने क

पेट की चर्बी कम करने के लिए प्राणायाम में करें धनुरासन योग

धनुरासन योग बेली फैट को कम करने में बहुत ही फायदेमंद होता है। इस आसन को करने के लिए एक योगा मैट को जमीन पर बिछा के उस पर पेट के बल लेट जाएं। अब अपने अपने दोनों हाथों शरीर के समान्तर रखें, अब अपने दोनों पैरों को पीछे की घुटनों के यहाँ से मोड़े।

अपने हाथों को पीछे की ओर ले जाएं और दोनों पैरों को दोनों हाथों से पकड़ लें। इस आसन में कम से कम 20 से 30 सेकंड तक रुकने का प्रयास करें। अंत में दोनों हाथों को खोल के अपनी प्रारंभिक स्थिति में आयें।

पेट कम करने के लिए प्राणायाम

पेट कम करने के लिए प्राणायाम बहुत ही फायदेमंद होते है, इनका नियमित अभ्यास करने से आप जल्दी ही पेट को कम करके अपना वजन घटा सकते है। यदि आप भी मोटापा से परेशान है और जिम नहीं जा सकते तो घर पर ही इन प्राणायाम को करें।


प्राणायाम न केवल आपके वजन को कम कर सकते है बल्कि यह आपके आपके रक्तचाप, तनाव, चिंता, पेट की बीमारियों, अवसाद, मधुमेह और हृदय की समस्याओं को भी ठीक करता है।

सिर्द दर्द और माइग्रेन है तो करें प्राणायाम

 सिरदर्द कभी गर्मी लगने से हो जाता है कभी शर्दी लगने से हो जाता है और कभी गैस के कारन सिरदर्द होता है। यदि शर्दी के कारन से सिर  दर्द है तो कपालभाति प्राणायाम करे, अगर गैस के कारन आपको सिरदर्द है तो अनुलोम विलोंम प्राणायाम करे। ये प्राणायाम १५ मिनिट से ले के ३० मिनिट तक करना चाहिए।

 

अनुलोम-विलोम प्राणायाम

 

प्राणायाम से दूर होते हैं ये रोग

 चरक ने वायु को मन का नियंता एवं प्रणेता माना है। आयुर्वेद अनुसार काया में उत्पन्न होने वाली वायु है उसके आयाम अर्थात निरोध करने को प्राणायाम कहते हैं। आओ जानते हैं कैसे करें प्राणायाम और कौन-सा रोग मिटेगा प्राणायाम से...

प्राणायाम के पांच फायदे जानना जरूरी

प्राणायाम की शुरुआत : प्राणायाम करते समय 3 क्रियाएं करते हैं- 1.पूरक, 2.कुंभक और 3.रेचक। इसे ही हठयोगी अभ्यांतर वृत्ति, स्तम्भ वृत्ति और बाह्य वृत्ति कहते हैं।

सिरदर्द ओर माइग्रेन से छुटकारा पाने के लिए प्राणायाम

 सिरदर्द कभी गर्मी लगने से हो जाता है कभी शर्दी लगने से हो जाता है और कभी गैस के कारन सिरदर्द होता है। यदि शर्दी के कारन से सिर  दर्द है तो कपालभाति प्राणायाम करे, अगर गैस के कारन आपको सिरदर्द है तो अनुलोम विलोंम प्राणायाम करे। ये प्राणायाम १५ मिनिट से ले के ३० मिनिट तक करना चाहिए।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम (ANULOM-VILOM PRANAYAM)

दमा से राहत दिलाए योग व प्राणायाम

दमा की यह कहावत अब पुरानी हो चुकी है कि दमा दम लेकर ही दूर होता है। दमा को श्वास रोग कहते हैं। दमा के रोगियों में सांस नली चौड़ी होने के बजाय सिकुड़ जाती है। सांस नली में पड़ी कार्बन डाई ऑक्साइड बाहर नहीं निकल पाती है और रोगी को बलपूर्वक एवं कठिनाई से उसे निकालने का प्रयास करना पड़ता है। परन्तु योग ने यह सिद्ध कर दिया है कि उन्हें भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। दमे के रोगियों के लिए कुछ खास योगों में गोमुखासन और सूर्यभेदी प्राणायाम अत्यन्त लाभदायक है।
गोमुखासन

प्राणायाम के लाभ एवं महत्व

हमारे शरीर में जितनेही चेष्टाएँ होती है उन सभी का प्राण से प्रत्यक्ष सम्बन्ध है। प्रणायाम से इन्द्रियों एवं मन के दोष्  दूर होते है।