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आसन

भुजंगासन या कोबरा पोज से बढ़ता है स्तन का आकार

इस पोज को करते समय सांप की आकृति बनती है इसलिए इसे भुजंगासन कहा जाता है। भुजंगासन को करते समय सांप की तरह गर्दन को ऊपर उठाना पड़ता है। यह आसन ब्रेस्ट साइज को बढ़ाने में मदद करता है और उन्हें बिल्कुल गोलाकार बनाता है। इसके अलावा यह नितंबों को भी गोल बनाता है और रीढ़ को मजबूत रखने में टोन करने का कार्य करता है। इस योग से आपके ब्रेस्‍ट के आस पास के मसल्‍स में खिंचाव आएगा, जिससे ब्रेस्‍ट का साइज बढ़ेगा। इस आसन का अभ्यास सुबह या शाम के समय खाली पेट करना चाहिए और कम से कम 15 से 30 सेकेंड तक इस पोजीशन में बने रहना चाहिए।

स्तन का आकार बढ़ाने के लिए ऐसे करें उष्ट्रासन

जमीन पर चटाई बिछाएं और घुटने के बल बैठ जाएं।
अपने हाथों को कमर पर रखें।
अब धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकें और अपनी एड़ियों को पकड़ें।
अपने नितंबों को हवा में दबाएं और धीरे-धीरे अपने सिर को फर्श की ओर नीचे लाएं।
अब कुछ देर तक इस पोजीशन में बने रहें और धीरे-धीरे दस तक गिनें और वापस सामान्य स्थिति में आ जाएं।
दो गहरी सांसें लें और कम समय में बड़े एवं गोल स्तन पाने के लिए इस आसन को 10 बार दोहराएं।

छाती को सही शेप देता है ये आसन

योगा करने से आपके शरीर को किसी भी प्रकार का साइड इफेक्‍ट नहीं होगा और स्‍वास्‍थ्‍य लाभ भी मिलेगा। स्तनों को बड़ा करने के लिए योग आपकी खूबसूरती में चार चांद लगा सकता है, इसलिए जब भी समय मिले तब इन योगासनों को करना शुरू कर दें।

स्टेमिना बढ़ाने के लिए करें सेतुबंध आसन

स्टेमिना को बढ़ाने के लिए सेतुबंध योग आसन बहुत ही फायदेमंद होता हैं। इसके साथ यह आसन पाचन और गले की खराश जैसी स्थितियों से राहत प्रदान करने में भी मदद करता है।

विष्णु आसन पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए

अनंतासन योग पैरों, विशेष रूप से घुटना, टखनों, और जांघों में मांसपेशियों को टोन करता है। इसके अलावा इस योग से धड़ और पीठ के निचले हिस्से को मजबूत किया जाता है। इस अनंतासन योग का अभ्यास करने से कूल्हों, रीढ़ और छाती की मांसपेशियों को एक अच्छा खिंचाव मिलता है।

पर्श्वोत्तनासन करने के बाद करे ये आसन

पर्श्वोत्तनासन योग करने से पहले आप नीचे दिए गए कुछ आसन का अभ्यास करें, जिससे आपको इसक योग आसन का पूरी तरह से लाभ मिल सके –

वीरभद्रासन 1
वीरभद्रासन 2
उत्कटासन
उत्थित हस्त पादंगुष्ठासन
अर्ध बद्ध पद्मोत्तासन
 

पर्श्वोत्तनासन के फायदे पाचन में

यह योग पेट और उसके अंगो को उत्तेजित करके एसिडिटी, कब्ज और पेट की कई समस्याओं के इलाज में मदद करता है। पर्श्वोत्तनासन योग आसन को करते समय आपके पेट और आंतों में दबाव पड़ता है जो पाचन प्रक्रिया को भी बढ़ाता है। इस योग से आंतरिक पेट के अंगों की एक हल्की मालिश होती जो कि पेट की मांसपेशियों को टोन करता है।

शुरुआती लोगों के लिए पर्श्वोत्तनासन करने की प्रारंभिक टिप

अगर आप बिगिनर है और योग अभ्यास की अभी-अभी शरुआत कर रहे हैं तो हो सकता हैं की आपको पर्श्वोत्तनासन योग आसन को करते समय दोनों हाथों को पीठ के पीछे ले जाने और दोनों को नमस्कार मुद्रा जोड़ने में थोड़ी कठिनाई हो सकती हैं क्योकि आपके हाथ पर्याप्त लचीले नहीं होते है तो इसके लिए आप अपने दोनों हाथों को पीठ के पीछे ले जाकर कमर के समानांतर रख लें। इसके अलावा आप प्रत्येक कोहनी को विपरीत हाथ से पकड़ सकते हैं। बिगिनर को पूरी तरह से नीचे झुकने भी कठिनाई हो सकती है तो आप इसे अभ्यास के साथ आसानी से कर सकते हैं।

पर्श्वोत्तनासन क्या है

पर्श्वोत्तनासन योग अष्टांग विनयसा शैली की अंतिम मुद्रा है। पर्श्वोत्तनासन शब्द तीन शब्दों से मिलकर बना है जिसमें पहला शब्द “पार्श्व” है जिसका अर्थ ‘पक्ष’ है, दूसरा शब्द “उत्ताना” जिसका अर्थ ‘तीव्र खिंचाव’ है और तीसरा शब्द आसन है जिसका अर्थ ‘मुद्रा’ होता है। इस योग में आंशिक रूप से आगे झुकना होता हैं इसलिए यह आसन Parivrtta Trikonasana और Utthita Trikonasana के बीच का एक मध्य मार्ग है। पर्श्वोत्तनासन योग को अंग्रेजी में इंटेंस साइड स्ट्रेच (Intense Side Stretch) कहा जाता है। इस योग को पिरामिड पोज़ (Pyramid Pose) भी कहा जाता है क्योंकि यह एक पिरामिड जैसा दिखता है। आइये इस योग आसन को करने की वि

पर्श्वोत्तनासन करने का तरीका और फायदे

पर्श्वोत्तनासन योग सभी योग असानो में बहुत ही महत्वपूर्ण योग आसन है। यह योग आपके शरीर के लिए अनेक प्रकार से लाभदायक है। पर्श्वोत्तनासन योग करने के लिए आपको एक पैर को दूसरे पैर आगे रख कर आगे की और झुकाना होता है। पर्श्वोत्तनासन योग रीढ़ हड्डी, हॅम्स्ट्रिंग और पैर को मजबूत करता है। आइये पर्श्वोत्तनासन योग करने का तरीका और उससे होने वाले लाभो को विस्तार से जानते हैं।