अवसाद के लिए योग में करें हलासन

नियमित रूप से प्रतिदिन हलासन योग को करने से व्यक्ति को तंत्रिका तंत्र से संबंधित दिक्कत नहीं होती है और इसकी वजह से व्यक्ति को तनाव और थकान की समस्या भी कम होती है। यह आसन महिलाओं में मेनोपॉज के लक्षणों से भी राहत प्रदान करता है।

अवसाद (डिप्रेशन) में हलासन योग को करने के लिए सबसे पहले आप पीठ के बल लेट जाएं।

डिप्रेशन के लिये सेतुबंधासन योग

सेतुबंधासन योग का प्रतिदिन और सही तरीके से अभ्यास करने से डिप्रेशन, स्ट्रेस और चिंता दूर हो जाती है और व्यक्ति का मस्तिष्क शांत रहता है। मन को शांत रखने के लिए सेतुबंधासन काफी लोकप्रिय आसन माना जाता है। माइग्रेन की समस्या को दूर करने में भी यह आसन बहुत सहायक होता है।

इजी पोज योग फॉर डिप्रेशन एंड एंग्जायोगयटी

जी पोज को सुखासन योग के नाम से भी जाना जाता है। सुखासन योग के लाभ आपको शारीरिक और मानसिक रूप से आराम दिलाने में मदद करते हैं। यदि आप मानसिक थकान और तनाव से ग्रसित हैं तो सुखासन एक अच्‍छा उपाय है। क्‍योंकि यह न केवल आपके मन शांत करता है बल्कि स्‍ट्रेस को भी दूर करने में मदद करता है।

डिप्रेशन के लिए योग में करें कोबरा पोज़

कोबरा पोज़ योग तनाव को कम करके डिप्रेशन को दूर करने में मदद करता है। भुजंगासन योग करने से शरीर में रक्त का प्रवाह सही तरीके से होता है। जिससे मन भी ठीक रहता है और उसे चिड़चिड़ापन या गुस्सा बहुत कम आता है।

कोबरा पोज को करने लिए आप एक योगा मैट को बिछा के उस पर पेट के बल लेट जाएं, जिसमें आपकी पीट ऊपर की ओर रहे। अपने दोनों हाथों को जमीन पर रखें। अब अपने दोनों हाथों पर वजन डालते हुयें धीरे-धीरे अपने सिर को पीछे के ओर करें और ठुड्डी को ऊपर की ओर करने का प्रयास करें। ध्यान रखें की आपके कमर से नीचे का शरीर जमीन से ऊपर ना उठे। आप इस आसन में 20 से 30 सेकंड तक रुकने का प्रयास करें।

डिप्रेशन के लिए योगासन में करें बालासन योग

बालासन योग आसन बहुत ही सरल योग है, इसे करने वाला व्यक्ति एक छोटे बच्चे के सामान दिखाई देता है। बालासन आपके मस्तिष्क को शांत करने में मदद करता है और तनाव और चिंता से छुटकारा दिलाता है। इस योग को करते समय आप गुरुत्वाकर्षण बल के विपरीत कार्य करते है जो मानसिक और भावनात्मक राहत दिलाने में सहायक होता है।

बालासन योग को करने के लिए आप एक योगा मैट को बिछा के उस पर वज्रासन में या घुटने टेक के बैठ जाएं। अब धीरे-धीरे अपने सिर को झुकाते जाएं और जमीन पर सिर को रखें। अपने दोनों हाथों को सामने की ओर सीधे करके फर्श पर रखें। इस आसन में आप कम से कम 2 से 3 मिनिट रहने का प्रयास करें।

डिप्रेशन के कारण

न्यूरोसरकिट्स (neurocircuits) के कार्य में परिवर्तन होना
शरीर के हार्मोन के संतुलन में परिवर्तन या संतुलन बिगड़ना
दिमाग का फ्रंटल लोब (frontal lobe) कम सक्रिय होना
पुरानी बीमारी, अनिद्रा या पुराना दर्द होना
दवाओं और शराब का अत्यधिक सेवन करना
आत्म सम्मान की आलोचना होना
व्यक्तिगत मानसिक बीमारी का होना
कुछ दवाएं भी अवसाद का कारण बन सकती हैं।
 

डिप्रेशन क्या है

डिप्रेशन (Depression) को हिंदी में अवसाद के नाम से जाना जाता है। यह एक प्रकार का मानसिक विकार (mood disorder) जो मन को दुखी करने वाली भावनाओं से जुड़ा हुआ है। इसे किसी व्यक्ति की प्रतिदिन की गतिविधियों (कार्यों) में हस्तक्षेप करने वाली उदासी, निराशा या क्रोध की भावनाओं के रूप में समझा जा सकता है।

अवसाद (डिप्रेशन) महसूस करने की क्षमता, सोच और व्यवहार आदि को प्रभावित करता हैं और विभिन्न मानसिक और शारीरिक समस्याओं का कारण बन सकता है। डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति को प्रतिदिन की सामान्य गतिविधियों में परेशानी हो सकती है।

डिप्रेशन के लिये योग

डिप्रेशन आज बहुत सारे लोगों के जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है। लोग छोटी छोटी वजह से भी डिप्रेशन में चले जाते है। डिप्रेशन से बचने में योग आपकी मदद कर सकता है। आज हम आपको डिप्रेशन के लिये योग के बारे बताएंगे।

जब व्यक्ति किसी वजह से अत्यधिक तनाव लेने लगता है तब वह डिप्रेशन में चला जाता है और अधिकांश लोगों को इसका पता भी नहीं चलता है। पर्याप्त नींद लेना और टेंसन न लेकर भी डिप्रेशन से बचा जा सकता है।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।