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ਯੋਗ

ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਕਮਜ਼ੋਰ ਯਾਦਦਾਸ਼ਤ ਤੋਂ ਛੁਟਕਾਰਾ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ, ਤਾਂ ਭਾਦ੍ਰਸਣਾ ਕਰੋ

ਭਾਵੇਂ ਤੁਸੀਂ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹੋ, ਤੁਸੀਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਯਾਦ ਕਰਨ ਵਿਚ ਅਸਮਰੱਥ ਹੋ. ਜੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵੀ ਇਹ ਸਮੱਸਿਆ ਹੈ, ਤਾਂ ਹਰ ਰੋਜ ਆਪਣੇ ਚਲ ਰਹੇ ਰੁਕਾਵਟ ਵਿਚੋਂ ਥੋੜਾ ਸਮਾਂ ਕੱ spendੋ ਅਤੇ ਭਦਰਸਨਾ ਕਰੋ. ਕਮਜ਼ੋਰ ਯਾਦਦਾਸ਼ਤ ਦੀ ਸਮੱਸਿਆ ਹੌਲੀ ਹੌਲੀ ਖਤਮ ਹੋ ਜਾਵੇਗੀ.

ਭਦਰਸਾਨਾ

हाइट एवं परफेक्ट पर्सनालिटी बनाने के लिए ताड़ासन

परफेक्ट पर्सनालिटी पाने के लिये लंबी हाइट होनी बहुत जरुरी है। जिन लोगों की हाइट कम होती है वे लोग अपने पर्सनालिटी में कुछ कमी सी महसूस करते हैं। लंबाई कम होने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें सबसे महत्‍वपूर्ण रोल आनुवांशिक गुण अदा करते हैं। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि आपकी हाइट बढ जाए तो इसमें योग आपकी निश्चित रूप से सहायता कर सकता है। माना जाता है कि प्रोटिन युक्त भोजन करने से व नियमित रूप से दस मिनट ताडा़सन करने से हाइट बढती है। लेकिन यह आसन २३ साल की उम्र तक ही हाइट बढाने में मददगार है। ताड़ासन की खासियत यह है कि बच्चों की लंबाई निश्चित रूप से बढ़ती है

मन की शांति और सुकून के लिये करें सुखासन

अगर आप योगा करते हैं तो आपको पता होगा कि सुखासन करना कितना आसान होता है। जो लोग सुखासन करते हैं उनका मन एक दम शांत हो जाता है। चित्त की एकाग्रता से धारणा सिद्ध होती है। यह योग श्वास प्रश्वास और ध्यान पर आधारित है। यह योगा की सबसे आसान विधि है इसलिए इसे सुखासन के नाम से जानते हैं। इसको करने से घुटने 90 डिग्री मुडते हैं, जिससे उन्‍हें दर्द से आराम मिलता है। यह आसान प्रणायाम करने से पहले किया जाता है। सुखासन से पैरों का रक्त-संचार कम हो जाता है और अतिरिक्त रक्त अन्य अंगों की ओर संचारित होने लगता है जिससे उनमें क्रियाशीलता बढ़ती है। यह तनाव हटाकर चित्त को एकाग्र कर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।

विपरीत करनी आसन से पाइये मां बनने का सुख

वे महिलाएं जिन्‍हें स्‍ट्रेस की वजह से बच्‍चा नहीं हो पा रहा है, उनके लिये विपरीत करनी मुद्रा बहुत ही फायदेमंद है। विपरीत करनी योग मुद्रा करने से मानसिक तनाव दूर होता है। इस करने में मन को शांति और मन स्‍थ‍िर हो जाता है। इस योग मुद्रा को करते समय मन को शांत रखें और चाहें तो हल्‍का सा म्‍यूजिक चला लें। यह मुद्रा करने से शरीर का हार्मोन प्राकृतिक रूप से बैलेंस होता है। इसके अलावा भी पैरों में थकान एवं दर्द की स्थिति में इस योग से लाभ होता है। यह आसन रक्त संचार को सुचारू बनाता है। अनिद्रा सम्बनधी रोग में इस आसन का अभ्यास लाभकारी होता है। गर्दन और कंधों में मौजूद तनाव को दूर करने के लिए भी यह व

बुजुर्गों के लिए योगासन- भुजंगासन

भुजंगासन करने से बुजुर्गों के शरीर में रक्त प्रवाह सुधरता है और उनकी कमर और कंधों की मसल्स को मजबूती मिलती है। इससे वह काफी ऊर्जावान महसूस करते हैं। इसे करने के लिए जमीन पर पेट के बल लेट जाएं। अब तलवों को रखते हुए एड़ियों को मिलाकर रखें। अब हथेलियों को कंधों के ठीक नीचे रखें और कोहनियों को अपने शरीर के पास रखें। अब गहरी सांस लें और अपनी छाती और सिर को ऊपर की तरफ उठाएं। जितना हो सके अपनी सिर और छाती को पीछे की तरफ खींचे। इसी अवस्था में कुछ सेकेंड रहने की कोशिश करें और फिर सांस छोड़ते हुए आराम से पिछली अवस्था में लौट आएं।

ब्रेस्ट साइज बढ़ाना चाहती हैं, तो आज से शुरू कर दें गोमुखासन

योग ब्रेस्ट साइज बढ़ाने के लिए काफी सही उपचार है। इससे किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता है। ऐसे में गोमुखासन करने से आपको फर्क जरूर दिखेगा।

शोध: रोज करें ये आसान काम, दूर हो जाएगा गुस्सैलझगड़ालू स्वभाव और

आज के दौर में दुनियाभर के युवाओं में रोष, गुस्सा और जरूरत से ज्यादा आक्रामक व्यवहार देखने को मिल रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि दिमाग को शांत रखने वाला योग, उन युवाओं की मदद कर सकता है जो पारिवारिक झगड़ों को बीच रह हैं या झगड़ालु व्यवहार दिखाते हैं या फिर नकारात्मक और खतरनाक रवैया अपनाए हुए हैं।

योग एक परिचय

योग भारतीय वैदिक परंपरा की अमूल्य देन है योग का प्रारंभिक ज्ञान वैदिक दर्शन से ही प्राप्त हुआ है ऋग्वेद में सर्वप्रथम योग संबंधी विचारधारा का उल्लेख मिलता है वेद भारतीय अध्यात्म दर्शन की के प्रेरणा स्रोत हैं वेदों में ही मानव मुक्ति हेतु योग दर्शन के ज्ञान का प्रादुर्भाव मिलता है

योग से पाएं खतरनाक रोगों पर नियंत्रण

किसी कठिन और थका देने वाली दो-ढाई घंटे लंबी कसरत के बजाय बीस से तीस मिनट तक किया जाने वाला योगाभ्यास ज्यादा कारगर होता है। कसरत में फिर भी नुकसान की गुंजाइश रहती है क्योंकि पता नहीं शरीर में कौन सा रोग पल रहा है और की जा रही कसरत अपने दबाव से उस रोग को बढ़ा या बिगाड़ दे।

मंदिर बनाने का नक्शा

|| प्राचीन भारत में मंदिर बनाने का नक्शा ||

|| कुण्डलिनी जाग्रत करने के स्थान थे प्राचीन मंदिर ||

प्राचीन भारत में मंदिर बनाने से पहले जगह और दिशा का विशेष महत्व होता था | मंदिरो का निर्माण अलग अलग शैलियों के हिसाब से हुआ करता था पर अधिकतर मंदिर ऐसी पद्धति से बनते थे जिसमे हर एक कुण्डलिनी चक्र के हिसाब से गर्भगृह, मंडप, प्रस्थान, परिक्रमा आदि का निर्माण होता था और जिस चक्र के हिसाब से उस जगह का निर्माण होता था वहा व्यक्ति को चलकर या बैठकर उस चक्र को जागृत करने में सहयोग मिलता था |