क्रंच एक्सरसाइज करने का तरीका

क्रंच एक्सरसाइज को करने के लिए आप पहले फर्श पर एक एक्सरसाइज मैट को बिछाकर उस पर सीधे लेट जाएं।
अब अपने दोनों पैरों को घुटनों से मोड़ कर फर्श पर सीधे रखें।
फिर अपने हाथों को मोड़े और हथेलियों को सिर के पीछे रख लें, इससे आपके सिर को सहारा मिलता है।
साँस को बाहर की ओर छोड़ते हुए अपने कंधों को फर्श से 1-2 इंच तक ऊपर उठायें और अपनी गर्दन को पूरी तरह से सीधी रखें। ध्यान रखें अपने धड़ को अधिक ऊंचाई तक ऊपर नहीं करना हैं।
अब अपनी साँस को अन्दर लेते हुए फिर से सिर और कंधों को नीचे फर्श पर रखें।
आप क्रंच एक्सरसाइज को 15-20 रेप्स में दो से तीन बार कर सकते हैं।
 

क्रंच एक्सरसाइज क्या हैं

पेट के लिए क्रंच सबसे लोकप्रिय व्यायामों में से एक है। क्रंच एक्सरसाइज मुख्य रूप से रेक्टस एब्डोमिनिस (rectus abdominis) मांसपेशी पर काम करता है। यह आपके तिरछेपन यानि शरीर की साइड की मांसपेशियों पर (obliques) भी काम करता है। यह व्यायाम आपके पेट को कम करने के लिए अधिक प्रसिद्ध हैं। क्रंच एक्सरसाइज को करने के लिए किसी भी प्रकार के उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है, आप इसे घर पर भी आसानी से कर सकते हैं। आइये क्रंच एक्सरसाइज को करने के तरीको को विस्तार से जानते हैं।

बॉडी स्टैमिना बढ़ाने के लिए माचा चाय

यह एक औषधीय चाय है जो विशेष रूप से जापान में उपयोग की जाती है। नियमित रूप से माचा चाय का सेवन शरीर की ऊर्जा बढ़ाने में सहायक होती है। माचा चाय में अमीनो एसिउ एल-थीनिन (l-theanine) की मात्रा बहुत अधिक होती है जो मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने में सहायक होती है। हालांकि माचा चाय में अन्‍य चाय की तरह ही कैफीन भी होता है लेकिन इसके प्रभाव को कम करने के लिए एल-थीनिन पर्याप्‍त मात्रा में उपलब्‍ध होता है। इसके अलावा माचा चाय में भी ग्रीन टी की तरह ही एंटीऑक्‍सीडेंट भी भरपूर मात्रा में होते हैं जो शरीर को फ्री रेडिकल्‍स और विभिन्‍न प्रकार की बीमारियों से बचाने में सहायक होते हैं। आप भी अपने शरी

बॉडी को ताकतवर बनाने के लिए जैतून तेल

बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य के लिए जैतून का तेल बहुत ही फायदेमंद और लोकप्रिय खाद्य तेलों में से एक है। नियमित रूप से उपभोग करने पर यह शरीर में स्‍वस्‍थ कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को बढ़ाता है साथ ही खराब कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम करने में सहायक होता है। इसके अलावा जैतून तेल में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट रक्‍त कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव से बचाते हैं। अध्‍ययनों से पता चलता है कि शारीरिक क्षमता और सहनशक्ति को बढ़ाने में जैतून के तेल बहुत ही प्रभावी होता है। शरीर की ताकत बढ़ाने के लिए आप भोजन पकाने के लिए जैतून के तेल का उपयोग कर सकते हैं। विकल्‍प के रूप में आप नियमित रूप से प्रतिदिन 2 चम्‍मच जैतून के

ताकत की आयुर्वेदिक दवा एवोकैडो

शरीर का उचित ढंग से काम करने के लिए पर्याप्‍त ऊर्जा की आवश्‍यकता होती है। शरीर की ताकत बढ़ाने के उपाय के रूप में आप एवोकैडो का उपयोग कर सकते हैं। यह फल वसा की स्‍वस्‍थ खुराक प्रदान करने में सहायक होता है। एवोकैडो में विटामिन सी, फाइबर, विटामिन K, फोलिक एसिड और विटामिन बी6 की अच्‍छी मात्रा होती है। विटामिन सी हमारे शरीर में एंटीऑक्‍सीडेंट का काम करता है जो तनाव और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने में सहायक होता है। जबकि विटामिन हमारे शरीर को ऊर्जा उत्‍पादन करने और अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने में प्रभावी होता है। इसलिए इन पोषक तत्‍वों की मौजूदगी के कारण एवोकैडो एक अच्‍छा आहार व

शरीर की ताकत बढ़ाने के उपाय केला

शरीर को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए विभिन्‍न प्रकार के खनिज पदार्थ और पोषक तत्‍वों की आवश्‍यकता होती है। केला भी ऐसा ही खाद्य पदार्थ है जो शरीर की ताकत को बढ़ाने में सहायक होता है। केला में पोटेशियम की अच्‍छी मात्रा होती है। परिश्रम और व्‍यायाम के दौरान शरीर में  इलेक्‍ट्रोलाइट की कमी हो सकती है जो थकान और कम ऊर्जा दर्शाता है। एक अध्‍ययन में बताया गया कि व्‍यायाम या कठिन परिश्रम करने वाले लोगों के शरीर में त्‍वरित ऊर्जा प्राप्त करने में केला बहुत ही प्रभावी होता है। यह मांसपेशियों की थकान को रोकने के लिए बहुत ही प्रभावी है। अपने शरीर की क्षमता और स्‍टैमिना बढ़ाने के लिए विकल्‍प के रूप मे

ताकतवर बनने के उपाय चिया बीज

नियमित रूप से चिया बीज का सेवन शरीर की ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक होता है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि चिया बीज में फाइबर की उच्‍च मात्रा होती है। फाइबर पाचन तंत्र को उत्‍तेजित करने में सहायक होता है जिससे शरीर को अधिक ऊर्जा उत्‍पान करने में मदद मिलती है। इस तरह से आप अपने दैनिक आहार में चिया बीजों को शामिल कर शारीरिक क्षमता को बढ़ा सकते हैं।

जॉगिंग की शुरूआत करने के दूसरे सप्ताह में

पहले आप 10 मिनट तक चलें, फिर धीरे-धीरे 2 मिनट के लिए जॉगिंग करें। और दोबारा फिर 2 मिनट के लिए चलें और 2 मिनट के लिए जॉगिंग करें। जब तक आप थक नहीं जाते, तब तक इन अंतरालों को दोहराएं। शरीर ठंडा होने के लिए 5 मिनट तक चलें।

महिलाओं के पेट को अन्दर करने की एक्सरसाइज एलीगेटर ड्रैग

महिलाओं के निकले हुए पेट को अंदर करने में एलीगेटर ड्रैग एक्सरसाइज बहुत मदद कर सकता हैं। इस व्यायाम को करने के लिए पूरी कोर का उपयोग किया जाता हैं। यह एक्सरसाइज तीव्र मूवमेंट और प्रतिरोध को शामिल करता हैं। एलीगेटर ड्रैग एक्सरसाइज को करने के लिए एक चिकने फर्श और एक तौलिया की आवश्यकता होती है। महिलाएं अपने पेट को कम करने और एलीगेटर ड्रैग एक्सरसाइज करने के लिए सबसे पहले फर्श पर पुश अप की स्थिति में आ जाएं और अपने दोनों हाथों को पूरी तरह से सीधा रखें। अपने दोनों पैरों की उँगलियों के नीचे एक तौलिया रखें, क्योंकि इसमें आपके पूरे पैर ऊपर रहेंगे केवल पैरों की उंगलियां फर्श पर रहेंगी। अपने कोर और ग्ल

फ्लैट पेट के लिए महिलाओं के व्यायाम रिवर्स क्रंच एक्सरसाइज

रिवर्स क्रंच एक्सरसाइज से महिलाएं आसानी से एक फ्लैट पेट पा सकती हैं और इस व्यायाम को करना बहुत ही आसान है। रिवर्स क्रंच एक्सरसाइज रेक्टस एब्डोमिनस (rectus abdominis) पर जोर देता है। इस एक्सरसाइज को करने के लिए आप पहले 90 डिग्री कोण पर बैठ जाएं और अपनी रीढ़ को पूरी तरह से सीधा रखें। अपने दोनों पैरों को नीचे घुटनों से मोड़ें और दोनों हाथों को सामने की ओर सीधा कर लें। अब साँस को छोड़ते हुए अपने पेट को अन्दर की ओर करें और अपनी रीढ़ की हड्डी को C आकार में मोड़ें। फिर अपनी साँस को अन्दर की ओर लें और पेट को ढीला करके सामान्य हो जाएं। यह रिवर्स क्रंच एक्सरसाइज की एक रेप्स है आप इसे 15 बार दोहराहएं।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।