तंत्रिका तंत्र मजबूत बनाने में नाड़ी शोधन के लाभ

नाड़ी शोधन का अभ्यास करते समय धीरे-धीरे गहरी (deep)सांस लेने और कुछ देर तक सांस को वैसे ही रोके रहने के बाद श्वास छोड़ने से नर्वस सिस्टम को तनाव कम करने का संदेश मिलता है और तंत्रिका तंत्र (nervous system) में ऑक्सीजन का सीधे प्रवाह होता है जिससे कि व्यक्ति का नर्वस सिस्टम मजबूत होता है।

शरीर को एनर्जी प्रदान करने में नाड़ी शोधन क्रिया के फायदे

यदि आपको लगता है कि आप स्वस्थ हैं और आपको किसी तरह की कमजोरी नहीं है लेकिन इसके बावजूद आप खुद को ऊर्जाहीन महसूस करते हैं तो आपको नाड़ी शोधन प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए। एक एक ऐसा प्राणायाम है जो शरीर को ऊर्जा से भर देता है और व्यक्ति को एक्टिव रखता है।

तनाव दूर करने में नाड़ी शोधन बेनिफिट्स

नाड़ी शोधन प्राणायाम का प्रतिदिन सही तरीके से अभ्यास करने से मस्तिष्क नियंत्रित रहता है और मन में नकारात्मक विचार नहीं आते हैं। इस प्राणायाम को करने से चिंता, तनाव, डिप्रेशन जल्दी दूर हो जाता है। इसलिए डिप्रेशन या तनाव की समस्या होने पर नाड़ी शोधन प्राणायाम जरूर करना चाहिए।

बकासन करने के लाभ से पाचन क्रिया बेहतर होती है

यह आसन करने से व्यक्ति के पेट में अम्ल कम मात्रा में बनता है जिसके कारण सीने में जलन या खट्टी डकार नहीं आती है और पाचन क्रिया बेहतर होती है। जिन लोगों को अपच की समस्या है उनके लिए बकासन काफी फायदेमंद हो सकता है।

नियमित रूप से बकासन करने से तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है

बकासन करने से व्यक्ति का तंत्रिका तंत्र मजबूत होता है जिसके कारण उसकी इम्यूनिटी बढ़ती है और उसे भूख न लगने, कब्ज और पेट से संबंधित परेशानियां नहीं होती हैं।

बकासन के फायदे कूल्हे मजबूत होते हैं

विशेषरूप से महिलाएं अपने कूल्हे की चर्बी कम करने के लिए तरह-तरह के उपाय करती हैं। यह आसन करने से कूल्हों पर जमा अतिरिक्त फैट घटता है और कूल्हे मजबूत और आकर्षक होते हैं।

एकाग्रता बढ़ाने में बकासन योग के फायदे

चूंकि बकासन करते समय पूरा भार हथेलियों पर रहता है इसलिए व्यक्ति पूरा ध्यान केंद्रित करके अपने शरीर के भार को संभाले रखता है, तभी यह आसन पूरा होता है। इसकी वजह से व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ती है और वह अधिक केंद्रित होकर अपना काम करता है।

बकासन करने के फायदे रीढ़ की हड्डी को टोन करने में

बकासन करने से पीठ और पेट की मांसपेशियां सीधी अवस्था में हो जाती हैं। यह आसान रीढ़ की हड्डी को टोन करने का कार्य करता है जिसके कारण हड्डी से जुड़े रोगों का खतरा कम होता है।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।