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योग

योग का जीवन में महत्व

यह प्रमाणित तथ्य हैं की योग मुद्रा, ध्यान और योग में श्वसन की विशेष क्रियाओं द्वारा तनाव से राहत मिलती है, योग मन को विभिन्न विषयों से हटाकर स्थिरता प्रदान करता है और कार्य विशेष में मन को स्थिर करने में सहायक होता है.

हम मनुष्य किसी चीज़ की ओर तभी आकर्षित होते हैं जब उनसे हमें लाभ मिलता है. जिस तरह से योग के प्रति हमलोग आकर्षित हो रहे हैं वह इस बात का संकेत हैं कि योग के कई फायदे हैं. योग को न केवल हमारे शरीर को बल्कि मन और आत्मिक बल को सुदृढ़ और संतुष्टि प्रदान करता है. दैनिक जीवन में भी योग के कई फायदे हैं, आइये! इनसे परिचय करें.

योग मुद्रा क्या है

विधि- सर्वप्रथम पद्मासन में आइए । हाथों को पीछे ले जाइए। बायें हाथ से दायें हाथ की कलाई को पकड़ लीजिए  ।पहले साँस लीजिए और साँस को निकालते हुए नीचे फर्श पर माथा लगाइए ,फिर साँस लेते हुए वापिस आइए।
4-5 बार साँस के साथ दोहरायें।

श्वेत प्रदर(ल्यूकोरिया) में योग

ल्यूकोरिया (श्वेत प्रदर) की बीमारी महिलाओं की आम समस्या है। संकोच में इसे न बताना कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। थोड़ी सी सावधानी व उपचार के जरिए इसके घातक परिणामों से बचा जा सकता है। अन्यथा यह कैंसर का कारण बन सकती है। सामान्य तौर पर गर्भाशय में सूजन अथवा गर्भाशय के मुख में छाले होने से यह समस्या पैदा होती है। उपचार न कराने से पीडि़ता को कई तरह की मानसिक व शारीरिक समस्याओं का शिकार होना पड़ता है। इसलिए महिलाएं को श्वेत प्रदर की बीमारी को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

ये 10 योगासन करने से दूर होती है थायरायड की बीमारी

थायरॉइड मानव शरीर का एक प्रमुख एंडोक्राइन ग्लैंड यानी अंत:स्रावी ग्रंथि है। यह गर्दन के निचले हिस्से में होती है। छोटी-सी यह ग्रंथि शरीर में हार्मोन का निर्माण करती है और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित रखती है। थायरॉइड ग्रंथि के सही तरीके से काम करने से आशय है कि शरीर  का मेटाबॉलिज्म यानी भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया भी सुचारू रूप से काम कर रही है। पर जैसे ही यह ग्रंथि घटनी और बढ़नी शुरू होती है तो मानव जीवन के लिए परेशानियां शुरू हो जाती हैं। इस ग्रंथि का असर हृदय, मांसपेशियों, हड्डियों और कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर भी पड़ता है।

यौगिक ध्यान से लाभ

महर्षि पतंजलि के योगसूत्र में ध्यान भी एक सोपान है।
चित्त को एकाग्र करके किसी एक वस्तु पर केन्द्रित कर देना ध्यान कहलाता है। प्राचीन काल में ऋषि मुनि भगवान का ध्यान करते थे। ध्यान की अवस्था में ध्यान करने वाला अपने आसपास के वातावरण को तथा स्वयं को भी भूल जाता है। ध्यान करने से आत्मिक तथा मानसिक शक्तियों का विकास होता है। जिस वस्तु को चित मे बांधा जाता है उस मे इस प्रकार से लगा दें कि बाह्य प्रभाव होने पर भी वह वहाँ से अन्यत्र न हट सके, उसे ध्यान कहते है।
ध्यान से लाभ
ऐसा पाया गया है कि ध्यान से बहुत से मेडिकल एवं मनोवैज्ञानिक लाभ होते हैं।

योग से समृद्ध होता जीवन

योग का ही परिणाम है पूरी सृष्टि। गणित के योग की तरह ही यह हमारे गुणों की अभिवृद्धि करता है। हमारे भीतर की चेतना को जगाकर हमें संस्कारवान और हृष्ट-पुष्ट बनाता है। योग के महत्व पर डॉ. प्रणव पण्ड्या का आलेख... बाहरी धन-संपदा से ज्यादा महत्वपूर्ण है भीतर कीसंपदा। अंतस के धनी बनकर ही हम सही मायने में

सफल कहलाएंगे...

 

योगासन दिलाए पीरियड्स के दर्द में आराम

कई महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान शरीर, खासतौर कमर में काफी दर्द होता है। इस दर्द को दूर करने के लिये आप योगासनों का सहारा ले सकती हैं। योग के पास हर बीमारी का इलाज है इसलिये इन्‍हें एक बार जरुर आजमाइये। नियमित तौर पर इन आसनों को करने से आपकी कमर और अन्‍य हिस्‍से मजबूत बनेंगे। आसन करने से शरीर के हर हिस्‍से स्‍ट्रेच होते हैं तथा खून का संचार अच्‍छी प्रकार से होने लगता है, जिससे शरीर की थकान, पेट की सूजन, गैस और दर्द आदि दूर होते हैं। आइये जानते हैं कि कौन-कौन से हैं वे योगासन जिन्‍हें करने से मासिकधर्म का दर्द दूर हो सकता है।

बालों को उगाने के लिए योग कपालभाति प्राणायाम

कपालभाति प्राणायाम योग आपके बालों को फिर से उगाने में मदद कर सकता है। कपालभाति प्राणायाम पूरे शरीर में रक्त परिसंचरण की समस्या का मुकाबला करता है और बालों के विकास में मदद करता है। इस योग को करने से आपके पेट की पाचन क्रिया स्वस्थ रहती है जो वजन कम करने और मधुमेह में मदद करती है। इस आसन को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट को जमीन पर बिछाकर पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखे और ध्यान की मुद्रा में बैठे। साँस अन्दर को ओर ले, अब साँस को बाहर छोड़ते हुए पेट को अन्दर की ओर इस प्रकार खींचे की पेट और पीठ आपस में मिल जाएं। फिर साँस को अन्दर ले ओर पेट को ढीला करें। य

योग से शरीर के आठ ग्लैंड करते हैं सुचारू रूप से काम

नियमित योग करने से न केवल आप बीमारियों से दूर रहते हैं बल्कि शरीर के तमाम ग्लैंड भी सुचारू रूप से काम करते हैं। शरीर में ग्लैंड अहम भूमिका निभाते हैं, वो कुछ ऐसा बनाते हैं या कुछ रिलीज करते हैं जिस कारण शरीर सुचारू रूप से काम करता है। शरीर में कई प्रकार के ग्लैंड होते हैं जो मुख्य रूप से दो प्रकार एंडोसिरिन व एक्सोसिरिन के अंतर्गत आते हैं। एंडोसिरिन ग्लैंड हार्मोन बनाने के साथ रिलीज करते हैं जो हमारी रक्त कोशिकाओं से होते हुए शरीर में जाते हैं। यही हमारे विकास के साथ मेटॉबॉलिज्म, मूड, यहां तक कि रिप्रोडक्शन में मदद करते हैं।

पैंक्रियास के लिए योग हलासन

हलासन एक और बेहतरीन योग आसन है जो थकान और तनाव को कम करने में मदद करता है। पैंक्रियास के लिए हलासन योग बहुत ही लाभदायक होता है। इसके अलावा, यह पाचन में भी सुधार करता है और भूख को नियंत्रित करता है। इस आसन को करने के लिए आप सबसे पहले एक योगा मैट बिछा के सीधे हाथ पैर कर के लेट जाएं। अब अपने दोनों पैरों को कमर के यहाँ से मुड़े और उनकों ऊपर करें। अपने दोनों हाथों को सीधा जमीन पर ही रखें रहने दें। अब दोनों पैरों को धीरे-धीरे अपने सिर के पीछे की ओर जमीन से लगाने की कोशिश करें। एक मिनट के लिए इस स्थिति में रहें, फिर साँस छोड़ें और अपने पैरों को नीचे लाएं।