एक्सरसाइज करने के लिए हमेशा ट्रेनर की मदद लें

अगर आप पहली बार जिम जा रहे है और आपको ठीक से एक्सरसाइज करने के बारे में जानकारी नहीं है तो हमेशा अपने ट्रेनर की ही मदद लें बिना ट्रेनर की मदद के अकेले एक्सरसाइज करने की कोशिश ना करें इससे आपको चोट लग सकती है या आपकी हड्डियों को नुकसान पहुँच सकता है।

गर्मी में मोटा होने के लिए खाएं ताजे फल

फलों में सभी प्रकार के पोषक तत्व और विटामिन होते है जो वजन बढ़ाने में मदद करते है। गर्मियों के मौसम में आपको कई प्रकार के फल आसानी से मिल जायेंगें। गर्मी में मोटे होने के उपाय में आप आम, सेब, केला आदि फलों का सेवन करें। केला में पोटेशियम की अच्‍छी मात्रा होती है। एक्सरसाइज के दौरान शरीर में इलेक्‍ट्रोलाइट की कमी हो सकती है जो थकान और कम ऊर्जा दर्शाता है। फलों में पानी की मात्रा भी अधिक होती है।

गर्मियों में मोटा होने के उपाय में खाएं पनीर

पनीर में फैट और कैलोरी की मात्रा होती है। यह स्वाद में तो अच्छा होता ही है इसके साथ ही यह प्रोटीन का एक बहुत अच्छा स्त्रोत है। प्रोटीन को आप अपने खाने शामिल करने के लिए पनीर की सब्जी भी खा सकते हैं, जिससे आपको अतिरिक्त कैलोरी मिले। अगर आप गर्मियों में वजन बढ़ाना चाहते हैं तो पनीर का सेवन जरुर करें।

पेट की चर्बी कम करने के लिए प्राणायाम में करें धनुरासन योग

धनुरासन योग बेली फैट को कम करने में बहुत ही फायदेमंद होता है। इस आसन को करने के लिए एक योगा मैट को जमीन पर बिछा के उस पर पेट के बल लेट जाएं। अब अपने अपने दोनों हाथों शरीर के समान्तर रखें, अब अपने दोनों पैरों को पीछे की घुटनों के यहाँ से मोड़े।

अपने हाथों को पीछे की ओर ले जाएं और दोनों पैरों को दोनों हाथों से पकड़ लें। इस आसन में कम से कम 20 से 30 सेकंड तक रुकने का प्रयास करें। अंत में दोनों हाथों को खोल के अपनी प्रारंभिक स्थिति में आयें।

पेट कम करने के लिए प्राणायाम

पेट कम करने के लिए प्राणायाम बहुत ही फायदेमंद होते है, इनका नियमित अभ्यास करने से आप जल्दी ही पेट को कम करके अपना वजन घटा सकते है। यदि आप भी मोटापा से परेशान है और जिम नहीं जा सकते तो घर पर ही इन प्राणायाम को करें।


प्राणायाम न केवल आपके वजन को कम कर सकते है बल्कि यह आपके आपके रक्तचाप, तनाव, चिंता, पेट की बीमारियों, अवसाद, मधुमेह और हृदय की समस्याओं को भी ठीक करता है।

सिर्द दर्द और माइग्रेन है तो करें प्राणायाम

 सिरदर्द कभी गर्मी लगने से हो जाता है कभी शर्दी लगने से हो जाता है और कभी गैस के कारन सिरदर्द होता है। यदि शर्दी के कारन से सिर  दर्द है तो कपालभाति प्राणायाम करे, अगर गैस के कारन आपको सिरदर्द है तो अनुलोम विलोंम प्राणायाम करे। ये प्राणायाम १५ मिनिट से ले के ३० मिनिट तक करना चाहिए।

 

अनुलोम-विलोम प्राणायाम

 

प्राणायाम से दूर होते हैं ये रोग

 चरक ने वायु को मन का नियंता एवं प्रणेता माना है। आयुर्वेद अनुसार काया में उत्पन्न होने वाली वायु है उसके आयाम अर्थात निरोध करने को प्राणायाम कहते हैं। आओ जानते हैं कैसे करें प्राणायाम और कौन-सा रोग मिटेगा प्राणायाम से...

प्राणायाम के पांच फायदे जानना जरूरी

प्राणायाम की शुरुआत : प्राणायाम करते समय 3 क्रियाएं करते हैं- 1.पूरक, 2.कुंभक और 3.रेचक। इसे ही हठयोगी अभ्यांतर वृत्ति, स्तम्भ वृत्ति और बाह्य वृत्ति कहते हैं।

सिरदर्द ओर माइग्रेन से छुटकारा पाने के लिए प्राणायाम

 सिरदर्द कभी गर्मी लगने से हो जाता है कभी शर्दी लगने से हो जाता है और कभी गैस के कारन सिरदर्द होता है। यदि शर्दी के कारन से सिर  दर्द है तो कपालभाति प्राणायाम करे, अगर गैस के कारन आपको सिरदर्द है तो अनुलोम विलोंम प्राणायाम करे। ये प्राणायाम १५ मिनिट से ले के ३० मिनिट तक करना चाहिए।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम (ANULOM-VILOM PRANAYAM)

दमा से राहत दिलाए योग व प्राणायाम

दमा की यह कहावत अब पुरानी हो चुकी है कि दमा दम लेकर ही दूर होता है। दमा को श्वास रोग कहते हैं। दमा के रोगियों में सांस नली चौड़ी होने के बजाय सिकुड़ जाती है। सांस नली में पड़ी कार्बन डाई ऑक्साइड बाहर नहीं निकल पाती है और रोगी को बलपूर्वक एवं कठिनाई से उसे निकालने का प्रयास करना पड़ता है। परन्तु योग ने यह सिद्ध कर दिया है कि उन्हें भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। दमे के रोगियों के लिए कुछ खास योगों में गोमुखासन और सूर्यभेदी प्राणायाम अत्यन्त लाभदायक है।
गोमुखासन

प्राणायाम के लाभ एवं महत्व

हमारे शरीर में जितनेही चेष्टाएँ होती है उन सभी का प्राण से प्रत्यक्ष सम्बन्ध है। प्रणायाम से इन्द्रियों एवं मन के दोष्  दूर होते है।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।