पादहस्तासन योग करने का तरीका और लाभ

पादहस्तासन योग में खड़े होकर आगे की ओर झुका जाता है जिसमें अपने दोनों हाथों से पैर को छूना पड़ता है। पादहस्तासन योग हठ योग के 12 मूल आसनों में से एक है। यह सूर्य नमस्कार अनुक्रम की तीसरी मुद्रा भी है। पादहस्तासन योग पेट की चर्बी को कम करने, पाचन संबंधी समस्याओं को ठीक करने, आपकी लम्बाई बढ़ाने और जांघ की मांसपेशियों को एक अच्छा खिंचाव देने के लिए जाना जाता है। पादहस्तासन योग सिर के रक्त संचार को बढ़ने में मदद करता हैं। इसे अलावा यह हमारे शरीर के अनके रोगों से लड़ने में मदद करता हैं। पादहस्तासन योग (Hand under Foot pose) अपने शरीर को गर्म करने और अपने शरीर को अन्य योग को करने के लिए लचीला बनाने के

पीलिया रोग के लिए योग निद्रा

योग निद्रा शरीर और दिमाग के लिए एक अच्छी आराम देने वाली तकनीक है और शरीर को प्राकृतिक रूप से ऊर्जा भरने में मदद करती है, जिससे उसे अच्छी नींद मिलती है। योग निंद्रा आसन को करने के लिए आप किसी खुले शांत स्थान पर योगा मैट बिछाकर लेट जाएं। हाथों को सीधा और अपने दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें। अब आंखे बंद करके सामान्य रूप से साँस ले और अपने मन में आने वाले सभी विचारों को रोक दें और कुछ भी ना सोचें। इसे अपनी क्षमता के अनुसार बिना कर सकते है।

योनि मुद्रा क्या है

योनि मुद्रा को इस तरीके से परिभाषित किया जा सकता है कि यह मुद्रा एक ऐसी मुद्रा है जो किसी व्यक्ति को बाहरी दुनिया के शोरगुल या उथल पुथल से अलग कर देती है। योनि संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ कोख (womb) या गर्भाशय (uterus) होता है। इस मुद्रा को योनि मुद्रा इसलिए कहा जाता है क्योंकि जो व्यक्ति नियमित रुप से इस मुद्रा का अभ्यास करता है उसका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं रहता है और वह गर्भाशय में एक बच्चे की तरह खुद को महसूस करता है। योनि मुद्रा को भ्रमरी प्राणायाम (Bhramari pranayama) और शंमुखी मुद्रा (Shanmukhi mudra) भी कहा जाता है। भ्रमरी का अर्थ मधुमक्खी की तरह आवाज निकालना। वास्तव में इस

योनि मुद्रा करने का तरीका

सबसे पहले जमीन पर चटाई बिछाएं और पदमासन या फिर किसी अन्य ध्यान मुद्रा में बैठ जाएं।
अपनी पीठ की मांसपेशियों को एकदम सीधे रखें और पेट एवं पीठ को किसी भी तरह से लचीला ना करें।
मन को शांत रखें और दोनों आंखों को बंद कर लें।
इसके बाद अपने दोनों अंगूठे को दोनों कान पर रखें और तर्जनी उंगली को आंख की पलकों पर टिकाएं।
मध्यमा उंगली को नासिका के ऊपर रखें।
रिंग फिंगर को होठों के ऊपर और छोटी ऊंगली को होठों के नीचे रखें।
इसके बाद यह सुनिश्चित करें कि आपकी कोहनी आपके कंधे के एकदम बराबर एवं सीधी रेखा में हो।
अब गहरी सांस लें और अपनी मध्यमा उंगली से नासिका को बंद कर लें।

योनि मुद्रा के फायदे

माना जाता है कि योनि मुद्रा एक ऐसी मुद्रा है जिसमें शांत मन से सांस छोड़ने लेने और सांस पर केंद्रित होने की क्रिया की जाती है। इस कारण से यह शरीर को आंतरिक शांति प्रदान करने में फायदेमंद है। इसके अलावा भी योनि मुद्र करने के अन्य कई फायदे हैं। आइये जानते हैं इन फायदों के बारे में।

डिप्रेशन के लिए योनि मुद्रा के फायदे

यह मुद्रा हर उम्र के लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है। नियमित रुप से योनि मुद्रा का अभ्यास करने से मस्तिष्क में अच्छे रसायन का स्राव होता है। इसके अलावा शरीर से भी विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं जिसके कारण मन हल्का लगता है। योनि मुद्रा का अभ्यास करने से कॉर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर घटता है जिसके कारण तनाव, चिंता, डिप्रेशन, नींद न आने की समस्या, नकारात्मक विचार, चिड़चिड़ापन आदि समस्याएं दूर हो जाती हैं। यही कारण है कि आज के समय के अनुसार योनि मुद्रा बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है।

योनि मुद्रा करने के फायदे ऊर्जा के लिए

माना जाता है कि योनि मुद्रा करने से शरीर का कायाकल्प होता है और व्यक्ति के अंदर एक नयी तरह की ऊर्जा का संचार होता है। इस मुद्रा में श्वास लेने और छोड़ने की प्रक्रिया बेहद अहम होती है और इसी क्रिया से व्यक्ति को फायदे भी होते हैं। यह मुद्रा उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो लोग एक्टिव नहीं होते हैं, सुस्ती का अनुभव करते हैं या फिर जल्दी थक जाते हैं। ऐसी स्थिति में योनि मुद्रा का अभ्यास करने से शरीर ऊर्जा से भर जाता है।

प्रजनन के लिए योनी मुद्रा के फायदे

कई बीमारियों के उपचार का समर्थन करने और शरीर, मन और आत्मा में सद्भाव लाने के लिए उनका उपयोग हजारों वर्षों से किया जाता रहा है। योनी मुद्रा- यह हाथ की यह स्थिति महिलाओं को एक सहज महिला ऊर्जा के संपर्क में लाने में मदद करती है। यह भी गर्भ और रचनात्मक शक्ति को प्रोत्साहित करने के लिए जानी जाती है। हाथ की स्थिति वास्तव में योनी की तरह दिखती है। हाथों को एक साथ लाते हुए, बाकी उंगलियों का जुड़ाव करते हुए अंगूठे और पॉइंटर उंगलियों के टिप्स एक दूसरे को छूते हैं।

सूर्य मुद्रा क्या हैं

सूर्य मुद्रा जैसे कि नाम से ही स्पष्ट हैं कि यह सूर्य से जुड़ा हुआ हैं, यह हमारे योग के विभिन्न प्रकार की मुद्राओ में से एक महत्वपूर्ण मुद्रा हैं, यह एक ऊर्जा बूस्टर के तरह कार्य करती है। यह मुद्रा अग्नि तत्व को बढ़ाने के लिए अंगूठे से उंगली को ढक के की जाती हैं, सूर्य मुद्रा का अग्नि तत्व पाचन शक्ति को बढ़ाता हैं इसलिए यह मुद्रा बहुत ही प्रसिद्ध हैं। आइये जानते हैं सूर्य मुद्रा करने का तरीका क्या हैं।

सूर्य मुद्रा करने के तरीका और लाभ

सूर्य मुद्रा योग का ही एक प्रकार हैं, मोटापा, डायबिटीज, थायरायड आदि समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए सूर्य मुद्रा का अभ्यास बहुत ही फायदेमंद होता है। योग हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, योग के द्वारा हम अपने शरीर में ऊर्जा का स्तर बढ़ा सकते हैं, इस योग से हम बड़ी-बड़ी बिमारियों दूर कर सकते हैं। योग से रोगों को दूर करने का सिद्धांत बहुत ही प्राचीन समय से चला आ रहा हैं। इस लेख में आप सूर्य मुद्रा करने की विधि और उसके लाभ के बारे में जानेंगे।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।