पैरों की मांसपेशियों को बनाने के लिए करें कार्डियो एक्सरसाइज

कार्डियो एक्सरसाइज करके आप अपने शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियां बना सकते हैं। कार्डियो व्यायाम में बहुत सारी एक्सरसाइज शामिल होती है जैसे कि जंपिंग जैक्स, लंजेस, लैटरल (lateral), बर्पीज, बॉक्स कूद, ओबलिक ट्विस्ट्स (Oblique twists) आदि को करें। इन सभी व्यायाम को एक एक मिनट के लिए करे। इससे पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

अपर बॉडी को बनाने के लिए करें कर्ल्स एक्सरसाइज

घर पर अपर बॉडी को बनाने के लिए आप कर्ल्स एक्सरसाइज को कर सकते हैं, यह बहुत फायदेमंद होती है। इस व्यायाम में आपको डंबल के सामान घर की किसी भी वस्तु को उठाना होता हैं। इसके लिए आप दूध की बोतल, कोई वजनदार बुक या घरेलू डम्ब-बेल्स का इस्तेमाल करें।

बाँहों के व्यायाम में करें डिप्स

बिना जिम जाएं ऊपरी शरीर को बनाने में डिप्स एक्सरसाइज आपकी मदद कर सकती हैं, यह बहुत ही प्रभावी होती है। डिप्स एक्सरसाइज करने के लिए आपको एक मजबूत ब्रेंच या मेज की जरूरत होगी, जिसकी ऊंचाई लगभग एक से दो फीट हो। अब इस ब्रेंच को पीछ की ओर रख कर फर्श पर बैठ जाएँ। अपने दोनों हाथों को पीछे ले जाकर इन ब्रेंच पर रखें। अब हाथों पर वजन को डालते हुए फर्श से हिप्स को ऊपर उठाएं और फिर नीचे लायें। इस क्रिया को 15-20 बार करें।

सीना बनाने के लिए करें पुश अप एक्सरसाइज

पुश अप एक्सरसाइज करना बहुत आसान है और यह शरीर के ऊपरी भाग को बनाने मदद करता हैं। पुश अप करने के लिए आप फर्श पर पेट के बल लेट जाएं और अपने दोनों हाथों की हथेलियों को फर्श पर अपनी छाती के पास में रखें।अब दोनों हाथों और पैर की उंगलियों पर वजन डालते हुए शरीर को ऊपर करें और फिर से हाथ की कोहनी को मोड़ें और शरीर को नीचे करें। यह क्रिया आप बार-बार दोहराहएं और इसके आप 3 सेट पूरा करें।

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।