Kundalini Bodywork Online Self Practice

Kundalini Bodywork & Self Practice. After moving through guilt and shame, moving through trauma expressed as anger, tears and laughter and then the physical releases through coughing, spiting and sometimes throwing up, and of course learning some basic knowledge of how to flow energy through our energetic body and the different pathways: then most people can reach a break through like the one in this video, they liberate their sexual energy and can use it to heal, or manifest more of what their soul desires.

OSHO: Books I Have Loved

"To me a book is not just a book; it is a love affair... I have loved reading from my very childhood. My own personal library consisted of one hundred fifty thousand rare books of all the religions, philosophies, poetry, literature. And I have read all of them, but with no purpose; I enjoyed it." The OSHO Library is maintained by Osho International Foundation. With the exception of about 1O,OOO, which have been gathered on his request after he stopped reading, all of these books have been read, signed and dated by Osho.

शुतुरमुर्गासन योग करने से पहले यह सावधानी रखें

शुतुरमुर्गासन योग वैसे तो एक सरल आसन है पर फिर भी इस आसन को करने से पहले आप निम्न बातों का ध्यान रखें-

यदि आप घुटनों के दर्द से परेशान है तो आपको भद्रासन योग करने से बचना चाहिए।
अगर आपको रीढ़ की हड्डी में दर्द की समस्या हैं तो आप इस आसन को करने से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
अगर आपको पीठ दर्द की समस्या हैं तो आप इस आसन को ना करें।
दिल की समस्याओं या उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को इस आसन से बचना चाहिए।
यदि आप किसी गंभीर बीमारी के रोगी है तो आपको शुतुरमुर्गासन योग करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
 

आंखों के लिए लाभदायक शुतुरमुर्गासन योग

शुतुरमुर्गासन योग करने से आपकी आँखों को भी लाभ होता है। इस योग आसन में जब आप नीचे की ओर झुकते है तब रक्त आपके सिर में अतिरिक्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व युक्त पदार्थ को भेज देता हैं, यह आपकी आँखों में रक्त के प्रवाह को बढ़ा देता हैं। शुतुरमुर्गासन योग मैक्युलर डीजेनेरेशन और आँखों से संबंधित कई प्रकार की समस्या को खत्म करने में मदद करता हैं।

पेट की गैस के लिए शुतुरमुर्गासन योग

जो लोग पेट में बनने वाली गैस की समस्या से परेशान है उसके लिए शुतुरमुर्गासन योग बहुत है। यह योग पेट में चयापचय की क्रिया को तेज करता हैं जो पेट में होने वाले अनेक रोगों से हमारी रक्षा करता हैं। यह गैस को कम करने में बहुत ही प्रभावी योग आसन है।

शुतुरमुर्गासन योग के लाभ शरीर को मजबूत करे

शारीरिक मजबूती के लिए शुतुरमुर्गासन योग बहुत ही असरदायक होता है। यह योग हमारे निचले हिस्से, बाहों और पैरों को मजबूत और टोन करने के लिए जाना जाता है। यह शरीर को स्थिर करने और संतुलन बनाने में मदद करता है क्योंकि यह सहनशक्ति को बढ़ाता है।

शुतुरमुर्गासन योग के फायदे कमर दर्द में

कमर दर्द को ठीक करने के लिए शुतुरमुर्गासन योग बहुत ही लाभदायक होता हैं। इस योग आसन को करने से पैरों के पीछे और गर्दन के पिछले हिस्से को एक अच्छा खिंचाव देता है और कमर दर्द से राहत दिलाता है। शुतुरमुर्गासन योग थके हुए पैरों को स्वस्थ करता है।

शुतुरमुर्गासन योग के फायदे

शुतुरमुर्गासन योग आसन हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद हैं। यह हमारे शरीर में होने वाली कई प्रकार की समस्या से हमें दूर रखता हैं। आइये इसके लाभों को विस्तार से जाते हैं।

शुतुरमुर्गासन योग करने का तरीका

शुतुरमुर्गासन योग एक सरल आसन है इसे करना बहुत ही आसान हैं इसे किसी भी उम्र का व्यक्ति आसानी से कर सकता हैं। नीचे इस आसन को करने की कुछ स्टेप दी गई है जिसकी मदद से आप इसे आसानी से कर सकते हैं।

शुतुरमुर्गासन योग करने से पहले यह आसन करें

शुतुरमुर्गासन योग करने से पहले आप नीचे दिए गए कुछ आसन का अभ्यास करें जिससे आपको इस आसन करने में आसानी होगी-

वीरभद्रासन
गरुड़ासन
पश्चिमोत्तानासन
जानुशीर्षासन

“योग विज्ञान है” – ओशो

 योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग का इस्लाम, हिंदू, जैन या ईसाई से कोई संबंध नहीं है। 

जिन्हें हम धर्म कहते हैं वे विश्वासों के साथी हैं। योग विश्वासों का नहीं है, जीवन सत्य की दिशा में किए गए वैज्ञानिक प्रयोगों की सूत्रवत प्रणाली है। इसलिए पहली बात मैं आपसे कहना चाहूंगा वह यह कि  योग विज्ञान है, विश्वास नहीं। योग की अनुभूति के लिए किसी तरह की श्रद्धा आवश्यक नहीं है। योग के प्रयोग के लिए किसी तरह के अंधेपन की कोई जरूरत नहीं है।

नास्तिक भी योग के प्रयोग में उसी तरह प्रवेश पा सकता है जैसे आस्तिक। योग नास्तिक-आस्तिक की भी चिंता नहीं करता है। विज्ञान आपकी धारणाओं पर निर्भर नहीं होता; विपरीत, विज्ञान के कारण आपको अपनी धारणाएं परिवर्तित करनी पड़ती हैं। कोई विज्ञान आपसे किसी प्रकार के बिलीफ, किसी तरह की मान्यता की अपेक्षा नहीं करता है। विज्ञान सिर्फ प्रयोग की, एक्सपेरिमेंट की अपेक्षा करता है।